आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

इस रिश्ते में वह गर्मजोशी कहां

पुष्पेश पंत

Updated Wed, 26 Dec 2012 09:01 PM IST
where warmth in relationship
राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा जिस माहौल में हुई, उसमें यह लग सकता है कि उनकी अनदेखी हुई। लेकिन इस प्रसंग से पहले भी रूस के राष्ट्रपति के आगमन को लेकर खास गर्मजोशी नहीं दिखाई दे रही थी। खुद पुतिन ने कहा था कि जूडो के अभ्यास के वक्त पीठ में चोट लगने से मैं ज्यादा देर तक काम नहीं कर पा रहा, अतः भारत दौरे पर चोटी के नेताओं से मिलने का बहुत कम वक्त रहेगा।
जाहिर है कि कुछ दूसरी औपचारिक रस्म अदायगी के साथ मनमोहन सिंह के अलावा सोनिया गांधी तथा विपक्ष के नेता से मिलना राजनयिक अनिवार्यता है। सो कोई बड़ी अपेक्षा किसी के मन में नहीं थी। सच तो यह है कि पिछले दशक में भारत और रूस के रिश्तों में बहुत बड़ा बदलाव आया है। आज इस रिश्ते में वह ‘विशेषता’ शेष नहीं रही, जैसी 1971 में बांग्लादेश के मुक्ति अभियान के दौरान प्रकट हुई थी। यह खास मैत्री स्वयंभू नहीं थी- बरसों के राजनयिक परिश्रम का परिणाम थी।

भारत की आजादी के तत्काल बाद भले ही स्टालिन के राज में गुटनिरपेक्ष और राष्ट्रसंघ के सदस्य भारत को लेकर सोवियत संघ आशंकित रहा था और ‘सुधारवादी’ कांग्रेसी नेताओं को रूस शक की नजर से देखता था, लेकिन शीतयुद्ध के क्रमशः विस्तार के बाद उस स्थिति में परिवर्तन हुआ। नेहरू के समाजवादी रुझान तथा अफ्रीका, एशिया में उनकी साख को देख ख्रुश्चेव ने उन्हें अपना समर्थन खुले हाथ से दिया। हमारे औद्योगिक विकास में सोवियत सहायता को कम कर नहीं आंका जा सकता।

इस्पात, उर्वरक, प्राणरक्षक औषधियों का उत्पादन, ऊर्जा उत्पादन, तेल शोध-शायद ही कोई क्षेत्र होगा, जो इस सहकार से लाभान्वित नहीं हुआ। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के पक्ष में ‘वीटो’ का उपयोग करने के साथ-साथ सोवियत रूस ने भारत को किसी भी हमले का सामना करने में सक्षम बनाने के लिए लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, टैंक आदि सुलभ कराए। सैनिक साज-ओ-सामान बेचना खुद रूस के लिए फायदेमंद था, लेकिन उसने भारत में इनके उत्पादन के लिए तकनीकी हस्तांतरण स्वीकार किया और आवश्यकतानुसार प्रशिक्षण भी दिया।

यह वह युग था, जब सिर पर लाल टोपी रूसी फिर भी दिल है हिंदुस्तानी जैसे फिल्मी गाने भारत और रूस में समान रूप से लोकप्रिय थे। वर्ष 1971 के बाद यह रिश्ता और घनिष्ठ हुआ। अंतरिक्ष विषयक शोध एवं परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के क्षेत्र में भी रूस-भारत के बीच महत्वपूर्ण आदान-प्रदान होता रहा है। लगभग चार दशक तक अंतरराष्ट्रीय व्यापार में रूस भारत का सबसे अहम आर्थिक साझेदार रहा।

यह सोचना तर्कसंगत नहीं कि बदलाव के लिए भारत के राजनय में कोई खोट या लापरवाही जिम्मेदार है। वास्तव में मिखाइल गोर्बाचौव के कार्यकाल में पेरस्त्रोइका और ग्लासनोस्त के सूत्रपात के साथ सोवियत व्यवस्था में नाटकीय परिवर्तन होने लगा, जिसका नतीजा  सोवियत संघ के विघटन में हुआ। पुरानी कांग्रेस पार्टी के क्षय के साथ साम्यवादी विचारधारा वाली इस महाशक्ति का पतन हुआ तथा अराजकता वाली उथल-पुथल का अंतराल झेलने के बाद संकुचित आकार वाले यूरेशियाई नहीं, यूरोपीय संस्कार वाले रूस का उदय हुआ।

बदले हुए रूस की प्राथमिकताएं बहुत भिन्न थीं। भारत के साथ उसके पहले जैसे विशेष रिश्ते बरकरार नहीं रह सकते थे। उधर आर्थिक सुधारों के बाद भारत भी तेजी से बदल रहा था। भूमंडलीकरण का बाजारवादी तर्क स्वीकार कर चुके नेतागण रूस के बजाय अमेरिका की तरफ रुख करने लगे। आकर्षक नए दोस्तों की तलाश में दोनों ने ही गाढ़े वक्त में आजमाए मित्र की सुध बिसरा दी।

यह भी याद दिलाने की सख्त जरूरत है कि जिस समय सोवियत संघ के विघटन के बाद रूस भयंकर आर्थिक दुर्दशा का शिकार था, तब भारत द्वारा खरीदे जाने वाले सैनिक शस्त्रास्त्रों से कमाई बड़ा सहारा थी। भारतीय उद्यमियों ने रूस की अस्थिरता की अनदेखी कर वहां बड़े पैमाने पर निवेश किया और रोजगार पैदा किया। ओएनजीसी विदेश ने सखालिन (साइबेरिया) में तीन अरब डॉलर लगाए। विमान-वाहक युद्धपोत एडमिरल गोर्श्कोव की मरम्मत कर भारत को बेचने का सौदा भी इसका उदाहरण है।

परमाणु चालित पनडुब्बी तथा परिष्कृत ब्रह्मोस मिसाइल का महत्वाकांक्षी संयुक्त निर्माण कार्यक्रम भी इस परस्पर लाभकारी अवसरवादिता वाले राजनय को झलकाता है। बीच-बीच में मनमुटाव भी सतह पर आता रहा है। कभी रुपया-रूबल व्यापार जनित शिकायत से, तो कभी विमान-वाहक पोत की मरम्मत में देरी से होने वाली महंगाई के कारण। पोखरण-2 के बाद पश्चिमी देशों द्वारा लगाए प्रतिबंधों का सम्मान रूसियों ने किया, नतीजतन भारत को आत्मनिर्भर बनाने वाली तकनीकी का विकास बाधित होता रहा।

जब तक तेल की कीमत आसमान छू रही थी, पुतिन के पहले कार्यकाल में रूस का आत्मविश्वास बढ़ा-चढ़ा रहा। आठ साल बाद जब उनकी कुर्सी गरम रखने के लिए मेदवेदेव राष्ट्रपति बने, तब ये अटकलें लगाई जाने लगीं कि पुतिन का युग खत्म हुआ। लेकिन वह भविष्यवाणी गलत साबित हो चुकी है।

हालांकि यह भी सच है कि रूस दोबारा पहले जैसी महाशक्ति नहीं बन सका। पुतिन ने अपनी इस संक्षिप्त यात्रा का राजनयिक दबाव भारत द्वारा अधिक से अधिक हेलीकॉप्टर, टैंक, लड़ाकू हवाई जहाज की खरीद के लिए किया। यह स्वाभाविक भी है। अमेरिका हो या ब्रिटेन या फ्रांस-सबके सब अपने राष्ट्रहित में ही मित्रता को अहमियत देते हैं। शौकिया कसरत से चोट खाई पीठ के बावजूद जवान पुतिन तने खड़े नजर आए। क्या हमारे आंतरिक कलह से त्रस्त, जनाक्रोश के विविध विस्फोटों से घायल बुढ़ाते नेता राष्ट्रहित की रक्षा करने में समर्थ हैं?
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

Bigg Boss : मनवीर से अंडे फुड़वाएंगे शाहरुख, सलमान हो जाएंगे हैरान

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

इन प्राकृतिक तरीकों से घर पर बनाएं ब्लीच, त्वचा को नहीं होगा नुकसान

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

सोई हुई लड़कियों को गंदे तरीके से उठाते हैं लड़के, देखिए जापान का अजीब गेम शो

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

सिक्योरिटी गार्ड के बेटे ने हासिल किया ऐसा मुकाम, पहली ही कोशिश में बना सीए

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

पीरियड्स के दौरान नहीं करने चाहिए ये काम, पड़ सकते हैं भारी

  • शनिवार, 21 जनवरी 2017
  • +

Most Read

न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं

Want justice, not compensation
  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

इस पृथ्वी पर मेरा कोई घर नहीं

I have no home on this earth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

कैसे रुकेगी हथियारों की होड़

How to stop the arms race
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

चुनाव सुधार के रास्ते के रोड़े

Hurdel of Election reforms
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में चीन की ताकत

China's strength in Pakistan
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

सच क्यों नहीं बोलते राहुल

Why Rahul does not speak the truth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top