आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

कब जागेगा अमरनाथ श्राइन बोर्ड

विनीत नारायण

Updated Thu, 06 Sep 2012 06:36 PM IST
when awake amarnath shrine board
अल्पसंख्यकों के लिए केंद्र और राज्य सरकारें हज राहत जैसी अनेक सुविधाएं वर्षों से देती आई हैं, पर हिंदुओं के तीर्थस्थलों की दुर्दशा की तरफ किसी का ध्यान नहीं है। ताजा मामला अमरनाथ यात्रा का है। इस साल अमरनाथ यात्रा के दौरान लगभग सौ तीर्थयात्री मारे गए हैं।
पिछले दिनों सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर के अमरनाथ श्राइन बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई। अदालत दरअसल बोर्ड की नाफरमानी और निकम्मेपन से नाराज है। इस बोर्ड का गठन अमरनाथ की पवित्र गुफा में दर्शनार्थ जाने वाले तीर्थयात्रियों की सुविधा और सुरक्षा का ध्यान रखना है। बोर्ड के अध्यक्ष जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल हैं, और सदस्य देश की जानी-मानी हस्तियां।

कहते हैं कि बोर्ड के पास लगभग 500 करोड़ रुपये का कोष है। इसके बावजूद अव्यवस्था का यह आलम है। इतनी बड़ी संख्या में लोगों ने जान गंवाई, पर बोर्ड ने न तो कोई संवेदना संदेश प्रसारित किया, न ही अपनी लापरवाही के लिए माफी मांगी। मजबूरन सर्वोच्च न्यायालय को नोटिस भेजकर बोर्ड को तलब करना पड़ा।

अदालत ने उसे उच्च स्तरीय समिति से मौके पर मुआयना कर अपनी कार्य योजना प्रस्तुत करने का आदेश दिया। लेकिन बोर्ड अदालत में यह रिपोर्ट पेश नहीं कर पाया। उसने छह महीने का समय और मांगा। माननीय न्यायाधीशों ने तीन हफ्ते का समय दिया और तल्ख लफ्जों में साफ कहा कि रिपोर्ट नहीं, कार्य योजना चाहिए। ऐसा न हो कि क्षेत्र में बर्फबारी शुरू हो जाए और कोई काम हो ही न पाए।

जब सर्वोच्च अदालत में यह सब कार्यवाही चल रही थी, तब मुंबई के पीरामल उद्योग समूह की ओर से एक शपथ पत्र दाखिल किया गया, जिसमें कंपनी ने अमरनाथ यात्रियों के लिए सड़क मार्ग व पैदल रास्ते पर सुरक्षित आने-जाने की व्यवस्था व अदालत के निर्देशानुसार अन्य सुविधाएं मुहैया कराने की अनुमति मांगी। उसने अपने शपथ पत्र में साफ कर दिया कि वह यह कार्य धमार्थ रूप से अपने आर्थिक संसाधनों और कारसेवकों की मदद से करेगी। इसके लिए वह सरकार और श्राइन बोर्ड से आर्थिक मदद की अपेक्षा नहीं रखेगी।

उल्लेखनीय है कि यह उद्योग समूह आंध्र प्रदेश में स्वास्थ्य सेवा का, गुजरात और राजस्थान में प्राथमिक शिक्षा व पेयजल का और ब्रज में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का कार्य कर रहा है। अदालत ने श्राइन बोर्ड की हास्यास्पद स्थिति पर टिप्पणी की कि जब एक निजी संस्था यह सेवा देने को तैयार है, तो बोर्ड को क्या तकलीफ है। आखिर दर्शनार्थियों की सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी तो उसी की बनती है।

यह बड़े दुःख और चिंता की बात है कि हिंदू धर्मस्थलों के प्रबंधन के लिए बने श्राइन बोर्ड भक्तों से अकूत धन प्राप्त करने के बावजूद तीर्थस्थलों में सुविधाओं के विस्तार की तरफ ध्यान नहीं देते। वहीं इन बोर्डो में अपनी पहुंच के कारण ऐसे लोग सदस्य नामित कर दिए जाते हैं, जिनकी इन तीर्थस्थलों के प्रति न तो श्रद्धा होती है, न समझ। नतीजतन ऐसे लोग सेवा विस्तार को लेकर न तो खुद कोई पहल कर पाते हैं, न ही किसी पहल को आगे बढ़ने देते हैं।

लिहाजा यह कहना अतिशयोक्ति नहीं कि हर धर्मस्थल के प्रबंधन की समिति का अध्यक्ष भले ही उस प्रांत का राज्यपाल या मुख्य सचिव हो, पर इसके सदस्य उस तीर्थ में आस्था रखने वाले ऐसे लोग होने चाहिए, जो तीर्थस्थल की बेहतरी के लिए समय और धन, दोनों लगा सकें। इनके अलावा इस तरह के कार्यों में रुचि रखने वाले प्रतिष्ठित समाजसेवियों को भी इन बोर्डों में सदस्य बनाया जाना चाहिए, ताकि संवेदनशीलता के साथ कार्य हो सके।

स्थानीय विवादों के चलते बहुत से धर्मस्थलों को कई अदालतों ने अपने नियंत्रण में ले रखा है। लेकिन यह भी सत्य है कि धर्मस्थल के प्रबंधन का काम न्यायाधीशों और प्रशासनिक अधिकारियों का नहीं है। सदियों से यह काम साधन संपन्न आस्थावान लोग करते आए हैं। लेकिन दुखद है कि चुनावी राजनीति ने यह संतुलन बिगाड़ दिया है। अब राजनेताओं के करीबी लोग प्रबंधन में घुसकर भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। हमारी सरकार को इस बारे में स्पष्ट नीति की घोषणा करनी चाहिए, जिससे हमारी विरासत की रक्षा हो।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

फिल्म 'अवतार' के 4 सीक्वल आएंगे, रिलीज डेट आई सामने

  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

बंदर के पोज में क्यों बैठे हैं 'गुंडे', ट्विटर पर डाली फोटो

  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

यूरिन इंफेक्शन से दूर रखेंगे ये सुपर फूड्स, ट्राई करके देखें

  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

महिला बॉडीगार्ड ज्यादा रखने की कहीं ये वजह तो नहीं?

  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

जानें कैसे 400 ग्राम दूध बचा सकता है आपको आने वाली दुर्घटनाओं से

  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

बेकसूर नहीं हैं शरीफ

Sharif is not innocent
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की परीक्षा

Examination of opposition in presidential election
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

छुट्टियों से निकम्मा बनता समाज

Society become lazy by holidays
  • गुरुवार, 20 अप्रैल 2017
  • +

लोकतंत्र और न्याय प्रणाली का रिश्ता

Relationship between democracy and justice system
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

अन्नाद्रमुक का सियासी ड्रामा

AIADMK's political drama
  • बुधवार, 19 अप्रैल 2017
  • +

कौन सुने देवदासियों की पीड़ा

Who listened to the suffering of devadasias
  • गुरुवार, 20 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top