आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

हम ओलंपिक नहीं, कुछ और खेलते हैं

मुरली मनोहर श्रीवास्तव

Updated Mon, 10 Dec 2012 11:20 AM IST
we are not play olympics
लो, अब ओलंपिक से भी हमारा पत्ता कट गया। इस साल देश को सबसे ज्यादा पदक मिले और इसी साल यह हाल हो गया। भला यह भी कोई बात हुई? पर क्या करें, इसमें हमारा तो कोई दोष नहीं। दरअसल ओलंपिक वाले ही नासमझ हैं। उन्हें क्या पता कि हमारे देश में कौन-कौन से खेल खेले जाते हैं। वैसे भी जिस देश का क्रिकेट कप्तान मैच से पहले टर्निंग ट्रैक की मांग करता है, उस देश के खेल को दुनिया समझ भी कैसे सकती है! पर दुख यह है कि ओलंपिक वाले असली खेल समझना ही नहीं चाहते। वे तो यह भी नहीं जानते कि खेल में सबसे महत्वपूर्ण चीज क्या होती है। जो लोग मेडल को ही खेल की उपलब्धि मान लेते हैं, वे असल में बड़े ही नादान किस्म के लोग हैं।
दरअसल खेल शुरू होता है चुनाव, बयान, लॉबिंग और पार्टी से। खेल का असली मकसद तो कमाई और टूरिज्म है। भला वह भी कोई खेल है, जिसमें लाखों-करोड़ों के वारे-न्यारे न हों? खेल में खेल भावना का क्या काम! जिस खेल में अपनी मरजी के खिलाड़ी न चुने जा सकें, जिस खेल में मनमाफिक पिच न हो, वह भी कोई खेल है। भाई साहब, खिलाड़ी तो वही है, जो जिला स्तर से जुगाड़ एक्सपर्ट हो। हमारा राष्ट्रीय खेल तू-तू-मैं-मैं ओलंपिक में है ही नहीं। न ही ओलंपिक में बयान-बयान खेला जाता है। वहां फिक्सिंग-फिक्सिंग भी नहीं चलता। खाली रेस्लिंग, हॉकी, वेट लिफ्टिंग या ट्रैक ऐंड फील्ड प्रतियोगिताओं से क्या होगा?

जरा यह तो देखिए कि इस देश में हैं ही कितने, जो खेलना- कूदना पसंद करते हैं। हां, मां-बाप के लाख मना कराने के बाद भी कुछ नालायक बच्चे खिलाड़ी बन ही जाते हैं, और न चाहते हुए भी मेडल ले आते हैं। वे जब सीधे सिखाने से नहीं मानते, तब उन्हें सही राह दिखाने के लिए ही ऐसे कदम सोच-समझ कर उठाए जाते हैं। अब मां- बाप को बड़ा आराम हो गया है। वे अब मजे से बच्चों को पढ़ने के लिए यह कहकर डांट सकते हैं, कि क्या करेगा खेल-कूदकर, कौन-सा ओलंपिक में जाना है! खेलना है, तो जा पॉलिटिक्स-पॉलिटिक्स खेल, जिसमें कुछ भला है। जा फिक्सिंग सीखकर आ, जिससे आईपीएल खेल सके। जा बेटा, थोड़ा फेंकना सीख, जिससे दो रोटी कमाने का जुगाड़ बन सके।

मेरे दोस्त, इस देश के असली खेल कुछ और हैं, जो बड़े लोग खेलते हैं। ओलंपिक-वोलंपिक इस देश के लायक नहीं है। हाथ आजमाना है, तो असली खेल में आजमाओ। 
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

olympics cricket

स्पॉटलाइट

नए कलेवर में लॉन्च हुए नोकिया के मोबाइल फोन, खास हैं खूबियां

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

जानिए दुनिया के सबसे सम्मानित पुरस्कार 'ऑस्कर' से जुड़ी 10 रोचक बातें 

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

ICC रैंकिंग: स्टीव ओ'कीफ की ऊंची छलांग, अश्विन-जडेजा और विराट को हुआ नुकसान

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

अब यह लोकप्रिय कार भी नहीं मिलेगी बाजार में

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

सेक्स में चरम सुख की कुंजी क्या है? शोध में हुआ खुलासा

  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

Most Read

कांग्रेस के हाथ से निकलता वक्त

Time out from the hands of Congress
  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

पाकिस्तान पर कैसे भरोसा करें

How Trust on Pakistan
  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

नेताओं की नई फसल

The new crop of leaders
  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

भद्र देश की अभद्र राजनीति

Vulgar politics of the Gentle country
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

तारिक फतह की जगह

Place of Tariq fatah
  • रविवार, 26 फरवरी 2017
  • +

पड़ोस में आईएस, भारत को खतरा

IS in neighbor, India threat
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top