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सही वक्त, सही फैसला

भरत वर्मा

Updated Wed, 21 Nov 2012 11:30 PM IST
right time right decision
आतंकवाद के खिलाफ यह एक टर्निंग पॉइंट है। कसाब को फांसी पर लटकाकर भारत पहली बार यह दिखाने में सक्षम हुआ है कि वह आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं करेगा। कायदे से हमने पहली बार अपनी छवि बदली है। लेकिन इससे खुश या आत्ममुग्ध होने की जरूरत नहीं है। आगे बड़ी चुनौतियां हैं। हम कसाब को फांसी देकर ही रुक नहीं सकते। यह नहीं मान लेना चाहिए कि कसाब को फांसी दे देने से आतंकवाद का खतरा खत्म हो गया है।
हमें यहां से आगे चलना होगा। यह देखना होगा कि हमारी सरकार में अगला कदम उठाने की कितनी ताकत है। आम भारतीय सरकार से यही उम्मीद करेगा कि वह आतंकवाद को कुचलने में हमेशा दृढ़ रहे। आतंकवाद के खिलाफ पूरा देश एक दिखे। कई बार सुरक्षा मामले में वोट बैंक की राजनीति के आड़े आने के आरोप लगते हैं। इसलिए यह कामना करनी चाहिए कि राजनीतिक पार्टियों के अंतर्विरोध आतंकवाद के खिलाफ इस मुहिम को कमजोर न होने दे।

सच तो यह है कि कसाब को मृत्युदंड देने के बाद देश को पहले से अधिक चौकन्ना और तैयार रहना होगा। ध्यान रहे कि पाकिस्तान से जो जहर आता है, वह अब और तेजी से फैल सकता है। पाकिस्तान में पलते आतंकवादी संगठन और सिर उठा सकते हैं। अपने खड़े किए आतंकियों को पाक सत्ता प्रतिष्ठान फिर से सक्रिय कर सकता है। उसकी बौखलाहट किसी भी रूप में दिख सकती है, खासकर तब जब 26 नवंबर करीब है। लिहाजा हमें अपनी सुरक्षा तैयारियों को पुख्ता रखना होगा। यही काफी नहीं है, खुफिया संस्थाओं को प्रभावशाली बनाने के साथ उनके बीच तालमेल बनाए रखना भी जरूरी है।

हमारी सरकार ने कसाब को फांसी देने के लिए बिलकुल सही समय चुना। पिछले काफी समय से सरकार की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे थे। महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर जवाब देना उसके लिए मुश्किल हो रहा था। कई दूसरे राजनीतिक मुद्दे उसकी कड़ी परीक्षा ले रहे थे। ऐसे में कसाब को मृत्युदंड देकर उसने बताने की कोशिश की है कि वह फैसला ले सकती है। हमारा देश अब तक नरम देश के तौर पर ही जाना जाता था। इस लिहाज से यह पहला बड़ा कदम है। लेकिन आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जितनी बड़ी है, उसमें कसाब का मामला बहुत छोटा है। अभी हमें दूर तक जाना है। देखना है कि आगे हमारी सरकार क्या करती है।

जब अमेरिका और चीन जैसे दो बड़े देशों में नेतृत्व परिवर्तन हुआ है, तब भारत से इस तरह का संदेश अपनी अहमियत रखता है। भारत ने दुनिया को बार-बार ध्यान दिलाया कि वह लंबे समय से आतंकवाद से जूझ रहा है। तब यह सवाल भी उठता था कि भारत खुद क्या पहल करता है। ऐसे भी आरोप लगे कि आतंकवादी हमले पर भारत दूसरे देशों का मुंह देखता है। ऐसे में पहली बार कोई ऐसा सख्त कदम उठाया गया है, जिससे देशवासी कुछ आश्वस्त हो सकते हैं। भारत को इससे भी कठोर कदम उठाने में नहीं झिझकना चाहिए। इसके बिना उद्देश्य भी पूरे नहीं हो सकते। जिस तरह का आतंकवाद पसर रहा है, उसका जवाब लुंज-पुंज होकर नहीं दिया जा सकता। अब उम्मीद जग रही है कि अफजल गुरु के मामले में भी जल्द कोई फैसला आएगा।
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