आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

संसद से सड़क तक सिर्फ सवाल

तवलीन सिंह

Updated Fri, 07 Sep 2012 10:19 AM IST
question from parliament to streets
ऐसा हुआ कि पिछले सप्ताह जिस दिन संसद के दोनों सदन एक बार फिर स्थगित हुए, मेरी मुलाकात इत्तफाक से एक नौजवान कांग्रेस सांसद से हुई। मैं हवाई जहाज से मुंबई से दिल्ली आ रही थी और उनको सीट मिली मेरे बगल की। तो जैसा कि अकसर होता है, पत्रकार जब भी मिलते हैं राजनीतिकों से, बातचीत राजनीतिक मुद्दों को लेकर होने लगती है।
शुरुआत मैंने की उनसे यह पूछकर कि क्या संसद के चलने की उम्मीद है इस बार। सवाल सुनते ही उनके चेहरे पर एक अजीब-सी मुसकराहट आई और थोड़े से गुस्से में आते हुए उन्होंने कहा, 'कैसे चलेगी संसद, जब विपक्ष बहस कभी होने ही नहीं देता है।' उनके यह कहने पर जब मैंने पूछा कि क्या विपक्षी दल लोकसभा चुनाव 2014 से पहले करवाना चाहते हैं, इसलिए संसद चलने नहीं दे रहे हैं, तो उन्होंने हंसकर कहा, 'नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है, वे लोग सिर्फ बहस रोकने के मकसद से हल्ला-गुल्ला करना चाहते हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि अगर बहस होती है, तो यह कैग रिपोर्ट का सारा मामला ठंडा पड़ जाएगा।'

दिल्ली पहुंचने के बाद मैंने भाजपा के अपने कुछ दोस्तों से बात की और मालूम पड़ा कि वास्तव में चुनाव जल्दी कराने का इरादा नहीं है हंगामे के पीछे। बहस को केवल रोकना था सरकार को सताने के वास्ते। प्रधानमंत्री का त्यागपत्र मांगने का भी यही मकसद था। यह सुनकर मैं हैरान रह गई।

सोचिए जरा, कैसे लोगों के हाथों में दे रखी है हमने राजनीतिक जिम्मेदारी, जिनको इतनी भी परवाह नहीं है कि राजनीतिक और आर्थिक अस्थिरता के इस वातावरण में संसद में तमाशा करना निहायत ही गैर जिम्मेदाराना काम है। एक तरफ आम नागरिक अपने आपको इतना असुरक्षित महसूस कर रहा है कि कुछ अफवाह फैलने की देर थी कि असम के लोग हजारों की तादाद में भाग गए बंगलुरु और मुंबई जैसे बड़े शहरों से।

गलत किस्म के लोगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि मुंबई में, असम की हिंसा के बहाने, मुसलमानों की भीड़ इतनी बेकाबू हो गई 11 अगस्त को कि पुलिसवालों पर हमला करने से नहीं डरी। पुलिसवालों के हाथों से हथियार छीनना कोई छोटी बात नहीं है, लेकिन वरिष्ठ पुलिस अधिकारी बेबस नजर आए। इसके कुछ दिन बाद राज ठाकरे ने शक्ति प्रदर्शन किया। पुलिस की इजाजत नहीं मिली जुलूस निकालने की, फिर भी मनसे का विशाल जुलूस निकला और आजाद मैदान पहुंचने के बाद ऐसा तगड़ा भाषण दिया ठाकरे ने कि उसके कुछ ही दिन बाद पुलिस कमिश्नर अरूप पटनायक का तबादला कर दिया गया।

उधर देश की राजधानी में बाबा रामदेव ने अलग ढंग से किया रामलीला मैदान में शक्ति प्रदर्शन और फिर से विदेशी बैंकों से काला धन वापस लाने की मांग रखी। बाबा रामदेव शायद जानते होंगे कि देश का अधिकतर काला धन देश के अंदर ही है और शायद वह यह भी जानते होंगे कि जो थोड़ा-बहुत विदेशी बैंकों में है, वह कभी वापस नहीं लाया जाएगा, क्योंकि विदेशी बैंकों का उसूल है कि कोई निजी खाते तभी खुल सकते हैं, जब साबित हो जाता है कि उनमें आतंकवाद या चोरी का पैसा जमा है।

फिर भी बाबा रामदेव हल्ला मचाते रहते हैं, क्योंकि उनको रोकने वाला ही नहीं है कोई सरकार में। कहने का मतलब यह कि आखिरकार दिखने लग गए हैं परिणाम भारत सरकार में नेतृत्व के अभाव के। प्रधानमंत्री से नेतृत्व की उम्मीद कब की खत्म हो चुकी है उनके अनंत मौन व्रत के कारण। असम से चुनकर आते हैं राज्यसभा में, लेकिन जब उस प्रदेश में हिंसा फैली, प्रधानमंत्री जी ने अपना मौन व्रत तोड़ने की जरूरत नहीं महसूस की।

गनीमत मान सकते हैं हम कि उनकी जगह इस सरकार की कर्ताधर्ता सोनिया गांधी में तो कम से कम थोड़ी-सी हरारत दिखी इस बार। असम के दौरे पर निकलीं, लेकिन दौरे के बाद उन्होंने जो बयान दिया, वह इतना कमजोर था कि न देतीं, तो बेहतर होता। जब ऊंचे स्तर पर नेतृत्व का अभाव दिखता है किसी देश में, तो उस देश का आम आदमी क्यों नहीं अपने आपको असुरक्षित महसूस करे? दिन-ब-दिन बढ़ रही है अराजकता और अस्थिरता इतनी तेजी से कि दिल्ली के राजनीतिक गलियारों में लोगों ने पूछना शुरू कर दिया है कि 2014 तक क्या हाल होगा देश का।

ऐसी स्थिति में स्वाभाविक है विपक्षी दलों का फायदा उठाना, लेकिन जो राजनीतिक दल अपनी राष्ट्रीयता को चादर की तरह अपने पर ओढ़कर बैठे हैं, कम से कम उनको तो इस समय राष्ट्र की थोड़ी-सी परवाह करनी चाहिए। वामपंथी दलों की बात और है, लेकिन भारतीय जनता पार्टी को राष्ट्रीय संकट के इस समय इतनी जिम्मेदारी दिखानी चाहिए कि संसद को चलनें दें।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

क्या ये गाने आपको पुराने दौर में ले जाते हैं, सुनकर कीजिए तय

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा की ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

हर उभरती हीरोइन को कंगना से सीखनी चाहिए ये 6 बातें, सफलता चूमेगी कदम

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

WhatsApp लाया अब तक का सबसे शानदार फीचर, आपने आजमाया क्या ?

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

बेसमेंट के वास्तु दोष को ऐसे करें दूर

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

Most Read

नोटबंदी के जिक्र से परहेज क्यों

Why avoiding mention of Notbandi
  • शुक्रवार, 17 फरवरी 2017
  • +

वंशवादी राजनीति और शशिकला

Dynastic politics and Shashikala
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

मणिपुर का भविष्य तय करेंगे नगा

Naga will decide Manipur future
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

भारत-बांग्लादेश रिश्ते की चुनौतियां

India-Bangladesh Relationship Challenges
  • बुधवार, 15 फरवरी 2017
  • +

पड़ोस में आईएस, भारत को खतरा

IS in neighbor, India threat
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

नारों के बीच, नीति के बगैर

Amidst slogan cries, without policy
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top