आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

छोटे व्यापारियों के हितों की रक्षा

जयंतीलाल भंडारी (आर्थिक विश्लेषक)

Updated Mon, 12 Nov 2012 10:21 PM IST
protect of small traders interests
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मल्टीब्रांड रिटेल में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की केंद्र की नीति में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। ऐसे में अब देश के छोटे कारोबारियों की निगाहें उपभोक्ता मामलों के मंत्री केवी थॉमस की अध्यक्षता में गठित समिति और छोटे एवं मझोले उद्यमियों की निगाहें सेबी के पूर्व चेयरमैन एम. दामोदरन की अध्यक्षता में गठित समिति की ओर लग गई हैं।
वस्ततुः विदेशी रिटेलर्स के तेजी से भारतीय बाजार में आने की आशंका से देश के चार करोड़ से अधिक छोटे व्यापारी और किराना व्यवसायी चिंतित हो गए हैं। रिटेल कारोबार की वैश्विक दिग्गज वॉलमार्ट, कार्फू और टेस्को पहले ही देश में आ चुकी हैं और अपने रिटेल उपक्रम के लिए भारतीय साझेदार चुनने के अंतिम चरण में हैं। अमेरिका और एशिया की अन्य रिटेल कंपनियां भी अवसर तलाश रही हैं।

जापानी शृंखला लॉसन यॉन्ग, सेवन ऐंड होल्डिंग्स और इतो योकादो के अलावा हांगकांग की एएस वॉटसन व ब्रिटेन की सैंसबरीज भी भारतीय बाजार के द्वार पर दस्तक दे रही है। मल्टीब्रांड रिटेल में एफडीआई का अनुमान एसोचैम और यस बैंक द्वारा अक्तूबर, 2012 में तैयार की गई संयुक्त रिपोर्ट से लगाया जा सकता है, जिसके मुताबिक, मल्टीब्रांड सेगमेंट में वर्ष 2016-17 तक 40,000 करोड़ रुपये का निवेश संभावित है।

ऐसे में देश के छोटे व्यापारियों और किराना दुकानों के हितों की सुरक्षा के लिए थॉमस समिति को उपयोगी नियमन व नियंत्रण पहल को आगे बढ़ाना होगा और एफडीआई के नकारात्मक असर को रोकने के कारगर उपाय खोजने होंगे। विदेशी निवेश के साथ आने वाली वैश्विक कंपनियों और भारत के परंपरागत खुदरा कारोबारियों को अस्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा से बचाने के लिए बाजार संबंधी नए नियमन और नियंत्रण जरूरी होंगे।

जिन शर्तों के आधार पर एफडीआई की स्वीकृति दी गई है, उन पर पूरा ध्यान दिया जाए। कारोबार की गुणवत्ता नियंत्रण संस्थाओं को मजबूत बनाकर हमें देश के लचर गुणवत्ता मानकों को सक्षम बनाना होगा। ऐसा करने पर ही देश के छोटे कारोबरियों के हितों की रक्षा की जा सकेगी। हम चीन के खुदरा बाजार से भी कुछ सीख ले सकते हैं। चीन में जहां एक ओर सरकार ने विदेशी रिटेलरों से एफडीआई से संबंधित शर्तों का कठोरता से पालन कराया, वहीं छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को व्यापार की नई तकनीक का लाभ उठाने व उत्पादकता बढ़ाने की डगर पर आगे बढ़ाया।

यह भी उल्लेखनीय है कि चीन के रिटेलर्स ने विदेशी रिटेल कंपनियों से बाजार प्रबंधन व नई तकनीक का लाभ उठाया। वस्तुतः चीन की सरकार के एफडीआई नियमन और छोटे कारोबारियों की सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण वहां के संगठित खुदरा कारोबार में विदेशी रिटेलर कब्जा नहीं कर पाए हैं।

चीन ही नहीं, कई देशों- सऊदी अरब, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात आदि में भी रिटेल क्षेत्र में एफडीआई की अनुमति है। लेकिन शर्तों के तहत गुणवत्ता, अनुबंध प्रक्रिया और कीमत से जुड़े मानक इतने कड़े हैं कि कई दिग्गज वैश्विक कंपनियों के बेहद सफल ब्रांड भी इन बाजारों में खरा उतरने में नाकाम रहे हैं।

एफडीआई की मंजूरी से छोटे उद्यमी भी चिंतित हैं। विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि छोटे एवं मझोले उद्योगों के लिए सहूलियत के मामले में भारत 185 देशों की सूची में बहुत पीछे 132वें क्रम पर है। 11 विभिन्न मानकों पर आधारित इस रिपोर्ट में मुख्य रूप से कर्ज और बिजली सुविधा, कर चुकाना, किसी निर्माण का परमिट, प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री जैसी चीजें शामिल हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में छोटे व मझोले उद्यमियों के लिए अच्छा माहौल नहीं है।

इसमें कोई दोमत नहीं है कि छोटे एवं मझोले उद्योग विकास दर, रोजगार सृजन तथा गरीबी कम करने के मामले में अहम भूमिका निभाते हैं। देश में तकरीबन 2.62 करोड़ छोटे और मझोले उद्योग हैं, जिनका औद्योगिक उत्पादन में 45 फीसदी एवं निर्यात में 40 फीसदी योगदान है।

इस क्षेत्र का वार्षिक कारोबार करीब पचास हजार करोड़ रुपये का है। स्थिति यह है कि इस समय 39 लाख छोटे व मझोले उद्योग बीमार हैं। छोटे उद्योगों की अधिकांश इकाइयां महंगे कर्ज, बिजली समस्या, मांग में कमी, खरीदारों से भुगतान रुकने और टैक्स संबंधी कठिनाइयों, बैंकिंग, वित्तीय एवं विपणन संबंधी परेशानियों का सामना कर रही हैं।

निश्चय ही वैश्वीकरण की चुनौतियों के बीच छोटे खुदरा कारोबारियों और छोटे व मझोले व्यापारियों की मुश्किलों के मुद्दे पर गठित उपरोक्त दोनों समितियों को अपनी जिम्मेदारियों को समझना होगा। दामोदरन समिति को छोटे उद्योगों से संबंधित नियम-कानूनों के सरलीकरण की राह पर बढ़ना होगा। इसके लिए जरूरी है कि इंस्पेक्टर राज से मुक्ति मिले। छोटे एवं मझोले उद्योगों को अदालतों के चक्कर न लगाने पड़ें और कम खर्च में उनके विवाद सुलझ जाएं, इसके लिए राज्य सरकारों की मदद से फैसिलिटेशन काउंसिल को सशक्त बनाना होगा।

इसके अलावा व्यवसाय से संबंधित विभिन्न तरह के फार्म भरने व भुगतान करने में इंटरनेट उपयोग संबंधी सुधारों से कामकाज को सरल बनाना होगा। छोटे एवं मझोले उद्योगों के लिए सरकार के द्वारा ऋण राहत, प्रौद्योगिकी उन्नयन, विपणन, आधारभूत संरचनाओं और निर्यात क्षेत्र में बढ़ावा देने के प्रयास करने होंगे।

देशभर में चिह्नित करीब 1,200 औद्योगिक क्लस्टरों की स्थापना के लिए त्वरित कदम भी सरकार द्वारा उठाना होगा एवं उन्नत तकनीक का प्रयोग करने संबंधी सहायता, परामर्श एवं प्रशिक्षण उपलब्ध कराना होगा। निश्चित रूप से देश के छोटे उद्योगों को मुसकराहट देने और छोटे व्यापारियों की डगमगाहट को रोकने के लिए ठोस एवं रणनीतिक प्रयास जरूरी होंगे।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

अगर बाइक पर पीछे बैठती हैं तो हो जाएं सावधान

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

सैफ ने किया खुलासा, आखिर क्यों रखा बेटे का नाम तैमूर...

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

Viral Video: स्वामी ओम का बड़ा दावा, कहा सलमान को है एड्स की बीमारी

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

बॉलीवुड से खुश हैं आमिर खान, कहा 'हॉलीवुड में जाने का कोई इरादा नहीं'

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

सैमसंग ने लॉन्च किया 6GB रैम वाला दमदार फोन, कैमरा भी है शानदार

  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

Most Read

कैसे रुकेगी हथियारों की होड़

How to stop the arms race
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

इस पृथ्वी पर मेरा कोई घर नहीं

I have no home on this earth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में चीन की ताकत

China's strength in Pakistan
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

संक्रमण के दौर में तमिल राजनीति

Tamil politics in transition stage
  • शुक्रवार, 13 जनवरी 2017
  • +

सच क्यों नहीं बोलते राहुल

Why Rahul does not speak the truth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में आवाजों पर पहरा

In Pakistan voices are guarded
  • गुरुवार, 12 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top