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पाकिस्तान में बदल रही है सियासत

कुलदीप तलवार

Updated Thu, 08 Nov 2012 09:22 PM IST
politics is changing in pakistan
आगामी 18 मार्च को पाकिस्तान सरकार पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा करेगी। मौजूदा हालात देखते हुए लगता है कि अगला चुनाव जनवरी या फरवरी में कराए जा सकते हैं। वहां के महत्वपूर्ण अखबारों में से एक द न्यूज के मुताबिक, पाक संसद 16 या 17 जनवरी को भंग हो सकती है। इस समय वहां की 17 करोड़ आबादी में 8.4 करोड़ मतदाता हैं। इस बार कश्मीर या भारत से आपसी रिश्ते चुनावी मुद्दा शायद ही बनें।
इसके बजाय अमेरिका का विरोध, सीआईए द्वारा ड्रोन हमले, महंगाई इत्यादि चुनावी मुद्दे बनेंगे। चुनाव में एएनपी यानी अवामी नेशनल पार्टी सत्तारूढ़ पीपीपी के साथ चुनावी गठजोड़ से अलग रहेगी। पीपीपी से उसकी नाराजगी इस बात पर है कि वह एमक्यूएम की उन मांगों को स्वीकार कर रही है, जिससे उसके हित प्रभावित होते हैं। विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी मुसलिम लीग (नवाज) मुश्किल में नजर आ रही है, क्योंकि उसे सत्तारूढ़ पीपीपी के अलावा इमरान खान की पार्टी तहरीके-इनसाफ का चुनाव में सामना करना पड़ेगा।

तहरीके-इनसाफ बड़ी तेजी से लोकप्रिय हो रही है। अनेक लोग मानते हैं कि देश में बदलाव लाने में इमरान खान जैसा नेता ही सक्षम हो सकता है। यही एक ऐसी पार्टी है, जिसने युवा मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए कुछ खास प्रयास किए हैं। इमरान खान ने कैंसर से मरी अपनी मां की याद में लाहौर में एक कैंसर अस्पताल खोला है, जिसमें 75 फीसदी मरीज मुफ्त इलाज करा रहे हैं। उन्होंने अपने चुनावी क्षेत्र मियांवाली में एक तकनीकी कॉलेज भी खोला, जिसका फायदा वहां के युवाओं को मिल रहा है। वह कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री बनने की उनकी कोई इच्छा नहीं है, हां, भ्रष्ट राजनीतिक ढांचे को सुधारने के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। तालिबान और अमेरिका, दोनों से बातचीत करने में वह यकीन रखते है। उनका यह भी मानना है कि तनातनी के बावजूद कश्मीर मुद्दे को दोस्ताना माहौल में हल किया जा सकता है।

इमरान अपनी पार्टी के लिए फंड जमा करने के लिए आजकल काफी सक्रिय हैं। उनकी हालिया अमेरिका यात्रा को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। यह अलग बात है कि उनकी इस यात्रा के दौरान सीआईए के अधिकारियों ने उनसे ड्रोन हमलों के बारे में विचार जानने के लिए गहन पूछताछ की और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि ड्रोन हमलों पर उनके रवैये में कोई बदलाव नहीं आया है। कुछ दिन पहले ही इमरान खान ने अपनी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ दो दिन का शांति मार्च इसलामाबाद से कबाइली क्षेत्र दक्षिणी वजीरिस्तान जाने के लिए किया था, जिसमें ड्रोन हमलों का विरोध करने वाले कई अमेरिकी भी शामिल थे। दरअसल अमेरिका ड्रोन हमला बंद करने के लिए राजी नहीं। उसका मानना है कि दहशतगर्दी के खिलाफ ड्रोन हमले असरदार साबित हो रहे हैं। जबकि यह आतंकवाद का हल नहीं है, क्योंकि तालिबान को कुचलने की आड़ में सैकड़ों निर्दोष नागरिक भी मारे जा रहे हैं।

हालांकि पाकिस्तान में इमरान खान के आलोचक भी कम नहीं। बहुतेरे लोग मानते हैं कि राजनीति में उनको अनुभव नहीं है। इमरान खान की पार्टी ने अपनी आर्थिक योजना जारी की है, जिसमें विकास दर को बढ़ाकर दोगुना करने का वायदा किया गया है। लेकिन उनकी पार्टी के पास 12 हजार खरब रुपये के आंतरिक और बाहरी कर्ज से निपटने के लिए कोई योजना नहीं है। भारी-भरकम रक्षा खर्च पर भी तहरीके-इनसाफ खामोश है। इमरान के साथ एक समस्या यह है कि वह खुद को कट्टरपंथी नहीं दिखाना चाहते और क्रांति की बात भी करते हैं। इसके बावजूद उनसे लोगों को उम्मीद है। दरअसल पाकिस्तान की जनता भी तबदीली चाह रही है, क्योंकि मौजूदा सरकार की नीतियों ने उसका जीना दूभर कर दिया है। कमरतोड़ महंगाई के कारण जनता के लिए एक समय का चूल्हा जलाना भी मुश्किल हो गया है। लोग एक तरफ हिंसक हो रहे हैं और दूसरी तरफ उनकी संवेदना भी खत्म हो रही है। पिछले साढ़े चार साल में वर्तमान शासकों ने भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड कायम किए हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि अगला चुनाव क्या सचमुच उनकी मुसीबतों का अंत करेगा।
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