आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

अब उन्हें सहन नहीं होता

पुष्पेश पंत

Updated Fri, 14 Sep 2012 12:49 PM IST
now they do not bear
भारतीय संसद ने अपनी 60वीं सालगिरह मनाने के ठीक अगले दिन जो तेवर दिखलाए, वे भारतीय जनतंत्र के लिए चिंताजनक हैं। हाल के दिनों में इस सिद्धांत का प्रतिपादन सांसदों द्वारा किया जाता रहा है कि देश की संसद सर्वोच्च है। यह बात शुरू में ही स्पष्ट करने की जरूरत है कि संसद देश के लिए कानून बनाने का एकाधिकार रखती है और जनता की संप्रभुता को मूर्तिमान करती है। पर यह सुझाना जनतंत्र के लिए घातक है कि संसद में बैठने वाले निर्वाचित सदस्य अपने आप में अकेले या सामूहिक रूप से सर्वोच्च संप्रभु और निरंकुश हैं, जिनकी आलोचना संसद के बाहर का व्यक्ति नहीं कर सकता।
याद रहे कि जो संविधान हमारी संसद को सर्वशक्तिमान बनाता है, वह नागरिकों को भी कुछ बुनियादी अधिकार देता है। यह संविधान अपनी व्याख्या का एकमात्र अधिकार सर्वोच्च न्यायालय को सौंपता है। शीर्ष अदालत यह फैसला सुना चुकी है कि बुनियादी अधिकारों वाले प्रावधान संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा हैं, जिनके साथ संसद सांविधानिक संशोधन के द्वारा भी छेड़छाड़ नहीं कर सकती।

वर्तमान सरकार और सांसद अपने विशेषाधिकारों के मामलों में ज्यादा ही संवेदनशील नजर आते हैं। सत्तारूढ़ पक्ष के साथ जुड़े काबिल मंत्री मनमाने ढंग से दूसरी सांविधानिक संस्थाओं का अवमूल्यन करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते। इन सब बातों की याद दिलाना इस घड़ी इसलिए जरूरी है, क्योंकि दरजा नौ की सरकारी पाठ्यपुस्तक में प्रकाशित एक कार्टून को लेकर पिछले दिनों संसद में बवंडर मच गया और दूसरे तमाम महत्वपूर्ण मुद्दों को हाशिये पर डाल, दलगत भेदभाव भुलाकर सभी सांसद एक सुर में यह नाजायज मांग करने लगे कि पाठ्यपुस्तक को न केवल वापस लिया जाए, बल्कि पाठ्यक्रम में इस तरह के कार्टूनों को शामिल करने वालों को दंडित किया जाए।

हमारे निर्वाचित प्रतिनिधियों के तेवर में अन्ना हजारे से ज्यादा फर्क नहीं, जो बिना सुनवाई के भ्रष्टाचारियों को फांसी पर लटका देना चाहते हैं और पियक्कड़ों को पेड़ से बांधकर उन पर कोड़े बरसाने की राय जाहिर करते हैं।
यह बात रेखांकित करने लायक है कि विवादास्पद कार्टून में डॉ. अंबेडकर को दर्शाया गया था। अब तक यह बात जाने कितनी बार दोहराई जा चुकी है कि इस कार्टून को प्रसिद्ध कार्टूनिस्ट शंकर ने साठ साल पहले बनाया था। यदि कार्टून का विषय बाबा साहब नहीं होते, तो क्या वोट बैंकों की चिंता करने वाले राजनीतिक दल ऐसा आचरण करने की छूट अपने सांसदों को देते? इससे भी विचित्र टिप्पणी प्रख्यात दलित चिंतक कांचा इलिया ने की। उनके अनुसार कुछ विषय ऐसे हैं, जिनके साथ हास परिहास की कोई गुंजाइश नहीं।

दलित समाज के लिए बाबा साहब देवतुल्य हैं, अतः उनका चित्रण हलकी तरह से कतई नहीं किया जा सकता। बाबा साहब सिर्फ दलितों के नेता नहीं, बल्कि हर समझदार भारतीय नागरिक के लिए आदर के पात्र हैं। पर यह कहना उचित नहीं कि उन्हें आलोचना और विश्लेषण से परे रखा जाए। यह नहीं भूलना चाहिए कि खुद डॉ. अंबेडकर ने आरक्षण को समय सीमाबद्ध रूप में प्रस्तावित किया था। विडंबना यह है कि खुद को अंबेडकर का भक्त कहने वाले सिवा उनके नाम की लाठीभांज अपने आलोचकों को ध्वस्त करने के अलावा और किसी कौशल में माहिर नहीं।
कड़वा सच यह है कि हमारे सार्वजनिक जीवन में सहनशीलता का नितांत अभाव है। अन्यथा कोई कारण नहीं कि कपिल सिब्बल जैसा स्वभाव से गुस्सैल व्यक्ति इतनी आसानी से घुटने टेक देता। संयम और विवेक का स्वर मुखर करने वाले एकमात्र व्यक्ति जसवंत सिंह रहे हैं, जिन्होंने कहा कि संसद का काम कानून बनाना है, किसी को कठघरे में खड़ा कर सजा देना नहीं।

ऐसा जान पड़ता है कि देश में आपातकाल पिछले दरवाजे से आ रहा है और हमारे प्रतिनिधि एक ऐसे सर्वज्ञ, सर्वशक्तिमान शासक वर्ग के रूप में खुद को प्रतिष्ठित करना चाहते हैं, जिनका नाता जनता से नहीं। उनकी ललकार यही होती है मुकाबला करना है, तो चुनकर यहां आओ। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता हो या विशेषाधिकार, सब कुछ इन्हीं के लिए है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

काजोल ने रानी को किया इग्नोर, क्या रिश्तों में आ गई दरार?

  • शनिवार, 25 मार्च 2017
  • +

टाटा का टॉप गियर, पिछड़ जाएंगी अन्य कंपनियां!

  • शनिवार, 25 मार्च 2017
  • +

जिंदा लोगों को यहां कर दिया जाता है दफन, धूमधाम से होता है जश्न

  • शनिवार, 25 मार्च 2017
  • +

करना चाहते हैं सरकारी नौकरी, तो HAL में करें अप्लाई

  • शनिवार, 25 मार्च 2017
  • +

एलोवेरा को इस तरह करेंगे यूज तो हफ्ते भर में गायब हो जाएंगी झुर्रियां

  • शनिवार, 25 मार्च 2017
  • +

Most Read

ईवीएम पर संदेह करने वाले

Skeptics on EVMs
  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

कुदरती खेती में ही सबकी भलाई

Natural agriculture is beneficial to all
  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम बनाने का क्षण

The moment to make Uttar Pradesh the best
  • बुधवार, 22 मार्च 2017
  • +

हार का ठीकरा ईवीएम पर

 Blame of defeat on EVMs
  • सोमवार, 20 मार्च 2017
  • +

हिंदुओं के करीब जाते शरीफ

Sharif gets closer to Hindus
  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

उत्तर प्रदेश से देश को दिशा

Directions to the country from Uttar Pradesh
  • मंगलवार, 21 मार्च 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top