आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

इतिहास भूल जाने का विषय तो नहीं

रहीस सिंह

Updated Wed, 12 Dec 2012 12:25 AM IST
not to forget history subject
रहीस सिंहचीन हमारा ऐसा पड़ोसी है, जिसने हमारे साथ संबंधों के विकास में उदात्तता का परिचय नहीं दिया। दोनों देशों के बीच स्वाभाविक मित्रता का अक्स बाजार को छोड़कर अन्यत्र नहीं दिखता। चीन के इस ‘घृणा-प्रेम’ वाले दृष्टिकोण और भारत के ‘सॉफ्ट स्टेट’ वाले चरित्र ने भारतीय जनमानस के समक्ष अकसर एक तरह के भ्रम का निर्माण किया। चीन भारत से इतिहास के उस अध्याय को भूलने की बात करता है, जो हमारे इतिहास का एक कड़वा सच है।
मगर क्या इतिहास भुलाने का विषय है? क्या नए संबंधों का निर्माण इतिहास को भुलाने की कीमत पर होना चाहिए? यह संभव हो सकता है, लेकिन तब, जब वास्तव में भारतीय कूटनीति ने इतिहास के पन्नों को सही तरीके से पढ़ लिया हो और उसके मूल्यों को सुरक्षित रखने का संकल्प ले लिया हो। हमारा नेतृत्व इसका दावा कर सकता है, लेकिन क्या वास्तव में इस पर विश्वास किया जाना चाहिए?

बेहतर संबंधों का विकास स्वस्थ वातावरण में ही हो सकता है, इसलिए चीन के राज्य पार्षद दाई बिंगुओ की इस बात को स्वीकार किया जा सकता है कि दोनों देशों को 1962 के युद्ध के साये से निकलकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने यह भी दावा किया कि भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों का मानना है कि दोनों पड़ोसी देशों को आगे बढ़ने की भावना के साथ अतीत के साये से बाहर निकलना चाहिए। उनका कहना है कि भारत-चीन सीमा विवाद के बावजूद दोनों देशों के रिश्ते सुधरे हैं और ‘कुछ पक्षों’ के ‘शोर-शराबे’ से इसे प्रभावित नहीं होना चाहिए।

कुछ पक्षों से चीन का तात्पर्य सीधे अमेरिका और प्रशांत महासागर में बन रहे अमेरिकी गठजोड़ से है। एक चीनी समाचार पत्र में इन ‘कुछ पक्षों’ में अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया को शामिल किया गया है। अखबार ने भारत के दक्षिण चीन सागर में और चीन के हिंद महासागर में दखल को गलत बताते हुए यह संदेश देने की कोशिश की है कि दोनों देशों को अपनी इस समुद्री रणनीति में बदलाव करने का प्रयास करना चाहिए।

इसमें कोई संशय नहीं कि अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक रणनीतिक भागीदार बनाने की कोशिश में हैं। इसका कारण यह है कि अमेरिका-जापान-ऑस्ट्रेलिया त्रिकोण में भारत के शामिल होते ही भू-राजनीतिक समीकरण बदल जाएंगे। दाई बिंगुओ की इस बात से कोई ऐतराज नहीं होना चाहिए, क्योंकि भारत और चीन के मध्य संबंधों में सुधार आज की सबसे बड़ी जरूरत है। लेकिन क्या चीन भारत के प्रति एक स्वाभाविक मित्र का आचरण रखता है?

अगर ऐसा है, तो फिर ‘कुछ पक्षों’ की तरफ से किए जा रहे ‘शोर-शराबे’ को अनसुना कर देना चाहिए। परंतु चीन की हरकतें ऐसा प्रदर्शित नहीं करतीं। इसी वर्ष मार्च में दो चीनी हेलिकॉप्टरों का लेपचा से उड़ान भरकर हिमाचल प्रदेश में अनाधिकृत प्रवेश क्या साबित करता है? इसी वर्ष अक्तूबर में चीन का भारत को दक्षिण चीन सागर में तेल एवं गैस दोहन गतिविधियां न चलाने की चेतावनी देना, अरुणाचल के खिलाड़ियों को नत्थी वीजा देना, अगस्त, 2010 में नार्दन आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस जसपाल को वीजा से मना करना, जनवरी-जून, 2010 सिक्किम से लगते फिंगर एरिया में चीनी सेना द्वारा 65 बार वास्तविक नियंत्रण रेखा को पार कर भारतीय क्षेत्र में आने का प्रयास करना और अरुणाचल व अक्साइ चिन को चीन के भूभाग का हिस्सा बताना, आदि मैत्रीपूर्ण आचरण तो नहीं लगते।

फिर भी यदि उदारता का प्रदर्शन कर सीमा विवाद सुलझाया जा सकता है, तो उसका स्वागत होना चाहिए, पर यह आसान नहीं है। हालांकि अपने दौरे के समापन पर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन ने दोनों देशों में जटिल सीमा वार्ता की प्रगति पर आम समझ बनने का संदेश दिया, जिसके अनुसार निष्पक्ष, तार्किक और दोनों देशों को मंजूर सीमा तय करने की रूपरेखा सुनिश्चित करनेे में मदद मिलेगी। बहरहाल, भारत मानता है कि सीमा विवाद 4,000 किलोमीटर के दायरे में फैला हुआ है, जबकि चीन विवाद को सिर्फ 2,000 किलोमीटर तक सीमित मानता है। अब देखना है कि भारत पुनः सॉफ्ट स्टेट होने का परिचय देता है या फिर चीन एक स्वाभाविक मित्र होने का प्रमाण।


  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

मॉडल की दुनिया की इन परियों को देखकर आप भी कहेंगे...'स्टाइल में रहने का'

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

रेखा और अमिताभ के ये लव सींस देख रो पड़ीं थीं जया

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

ये होती है शादी करने की सही उम्र, जान लें फायदे

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

गर्म-गर्म चाय पीने के हैं शौकीन, जा सकती है जान

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

सनी लियोन बनीं मां, लातूर की बेटी को किया अडॉप्ट

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

Most Read

मिट्टी के घर से रायसीना हिल तक का सफर

Travel from mud house to Raisina Hill
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

नीतीश के लिए परीक्षा की घड़ी

Test time for Nitish
  • सोमवार, 17 जुलाई 2017
  • +

विपक्ष पर भारी पड़ते चेहरे

Faced with overwhelming faces on the opposition
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

अंग्रेजी माध्यम आत्मघाती होगा

English medium will be suicidal
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017
  • +

कामवालियों के श्रम का सम्मान

Respect for labor of women
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

बच्चों को चाहिए ढेर सारी किताबें

Children should have a lot of books
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!