आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

साहित्य में शोर

रवींद्र त्रिपाठी

Updated Thu, 25 Oct 2012 11:12 AM IST
noise in literature
साहित्य के हर दौर में ऐसे लोग भी मौजूद रहे हैं, जिनका लिखने से ज्यादा जोर इस बात पर रहता है कि कुछ न कुछ हंगामा होता रहे। यानी कोई किसी पर आरोप लगाता रहे, कोई लेखक किसी दूसरे के खिलाफ मोर्चा खोले रहे। अगर ऐसा नहीं होता है, तो ऐसे लोगों को लगता है कि मामला कुछ जम नहीं रहा है। बीती सदी के सातवें और आठवें दशक में ‘सन्नाटा-साहित्य में या शहर में’ जैसे विषयों पर पत्रिकाओं में परिचर्चाएं होती थीं। ये वो दौर था जब हर शहर में परिचर्चाकार पैदा होने लगे थे।
कुछ तो परिचर्चा करके ही साहित्य में अपनी जगह बनाने निकल पड़े थे। ये दीगर बात है कि आज वे सारे परिचर्चाकार हिंदी भाषी समाज के साहित्यिक चित्त से विस्मृत हो गए हैं। साहित्य सन्नाटे या शोर के बावजूद चलता रहा। अच्छा लिखा जाता रहा। साथ में खराब भी लिखा जाता रहा है। ऐसा हर दौर में होता है और आगे भी होता रहेगा। साहित्य में कुछ लोग लिखते हैं और कुछ लोग मीनमेख निकालने में लगे रहते हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि जब तक दूसरे के लिखे में कोई नुक्स न निकाला जाए तो खाना नहीं पचेगा। जी हां, कुछ लोग अपना हाजमा दुरुस्त करने के लिए साहित्य में वक्त बिताते हैं।

पर इसी का दूसरा पहलू भी है। इस तरह के मीनमेख निकालनेवालों की साहित्य में जरूरत रहती है। अच्छे लेखक हमेशा कम होते हैं और अच्छी रचनाएं भी हमेशा कम ही लिखी जाती हैं। छायावाद का दौर अठारह-बीस साल का रहा और इस दौर में हिंदी में आठ-दस ही अच्छे कवि हुए। इनमें चार तो छायावादी कवि- पंत, प्रसाद, निराला और महादेवी- हुए। यानी बीस साल के दौर में दस कवि। पर यहां यह भी उल्लेखनीय है कि उस दौरान हजारों लोग साहित्य में सक्रिय थे। कई तो छायावादी कवियों की रचनाओं में मीननेख निकालने में लगे रहते थे। ऐसे लोग साहित्य की दुनिया में अब याद नहीं किए जाते पर अपने समय में इन लोगों ने भी माहौल बनाने का काम किया था।

दरअसल साहित्य एक जज्बे का नाम है। इस जज्बे के अलग अलग रूप होते हैं। कुछ लोग गंभीर साहित्यिक कर्म में लग जाते हैं और बाकी (वस्तुतः ज्यादातर) साहित्य पर चर्चा या परिचर्चा करने में। उठा पटक करने में। कई बार छोटे-मोटे विवाद या फुसफुसाहटें या अभियान भी साहित्यिक वातावरण के लिए जरूरी हो जाते हैं।

कुछ लेखक ऐसे होते हैं, जो साहित्य को परम पवित्र मानते हैं। ऐसे लोगों को इसका हक भी है। लेकिन इसका ये भी मतलब नहीं है कि जो साहित्य को परम पवित्र नहीं मानता वह महत्वपूर्ण साहित्यकार या साहित्यप्रेमी नहीं है। दरअसल पवित्रता की अवधारणा साहित्यिक नहीं है। वह धार्मिक है। जब आप साहित्य को परम पवित्र मानने का आग्रह करते हैं तो उसमें धर्म का आरोपण करते हैं।

जो साहित्य को परम पवित्र मानते हैं उनको लगता है कि ये अशिष्ट या गंवारू लोग- जो न व्याकरण पर अधिकार रखते हैं न दुनिया की अलग-अलग भाषाओं में लिखे गए क्लासिक के बारे में जानते हैं, वो साहित्य का धर्म भ्रष्ट कर रहे हैं। इन पवित्रता पसंदों की यह मांग भी रहती है कि साहित्य में सिर्फ गुरु गंभीर लोग ही लिखे-पढ़ें। यह अलग से कहने की जरूरत नहीं कि इस तरह के नजरिए से साहित्य का नुकसान ही होता है। लेकिन दूसरी तरह वे लोग भी हैं, जो कई गंभीर विषयों या मुद्दों को हल्का बना देते हैं। बिना ये जाने- समझे (या जानबूझकर) कि किसी लेखक का वास्तविक मंतव्य क्या है, उसे अवमूल्यित करने की योजनाबद्ध कोशिश भी होती है। इस तरह की साजिश में कई बार बड़े लेखक भी शामिल हो जाते हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

noise-in-literature

स्पॉटलाइट

सोशल मीडिया: JIO के बाद अंबानी शुरू करेंगे PIO, 3 महीने सब फ्री

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

राजकुमार हो गए अपने ही घर में 'ट्रैप्ड', फिल्म का टीजर हुआ रिलीज

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

आखिर क्यों काट दिए गए 'रंगून' से 40 मिनट के सीन ? ये रही असली वजह

  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

'लाली की शादी में लड्डू दीवाना' का पोस्टर रिलीज, दिखा अक्षरा का नया अंदाज

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

बुधवार के दिन करें यह पांच काम, सुख-समृद्धि से भर जाएगी जिंदगी

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

Most Read

पड़ोस में आईएस, भारत को खतरा

IS in neighbor, India threat
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

नोटबंदी के जिक्र से परहेज क्यों

Why avoiding mention of Notbandi
  • शुक्रवार, 17 फरवरी 2017
  • +

वंशवादी राजनीति और शशिकला

Dynastic politics and Shashikala
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

भारत-बांग्लादेश रिश्ते की चुनौतियां

India-Bangladesh Relationship Challenges
  • बुधवार, 15 फरवरी 2017
  • +

मणिपुर का भविष्य तय करेंगे नगा

Naga will decide Manipur future
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

कांग्रेस के हाथ से निकलता वक्त

Time out from the hands of Congress
  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top