आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

आज टाइम किसके पास है

श्याम विमल

Updated Mon, 24 Dec 2012 12:22 PM IST
nobody has time
आज किसी के पास टाइम यानी समय नहीं है। समय के अभाव में हर दृश्य वस्तु या निराकार भाव संक्षिप्त या मितकथन होते जा रहे हैं। उचित कथन बल्कि यह होगा कि आदमी को संक्षिप्तीकरण की आदत पड़ गई है। यह संक्षिप्तीकरण केवल लोगों के हाव-भाव या बातचीत में नहीं दिखता। यह प्रवृत्ति नाम और शब्दों तक में फैल गई है।
अब नाम को ही लीजिए। नाम चाहे व्यक्ति के हों, कंपनी के हों, संस्था के हों, अस्पतालों के हों, पार्टी के हों या प्रदेशों के, वे मूल रूप में कहीं नहीं दिखते। जहां तक भाषा और लिपि का सवाल है, अनेक लोग तो अंग्रेजी की वर्णमाला से ही काम चला रहे हैं। मराठी-गुजराती जन नागरी लिपि को प्रयोग में ले आए हैं- मो क गांधी, पुल देशपांडे, गो ना कालेलकर। अंग्रेजी वर्णों से तो अनगिनत नाम प्रयोग में हैं-जेपी, के एम मुंशी, जेएनयू, एएमयू, डीयू आदि।

पीएमओ, सीएमओ, एनजीओ, आरटीआई, मनरेगा, डीएलएफ, यूपीए, एनडीए, एपील, बीपील, आईपीएल, आईसीसी, जेपीसी, यूएन, सार्क जैसे शब्द इतने चल चुके हैं कि इनका फुल फॉर्म बताने वाले कम ही लोग मिलेंगे। हिंदी के घनघोर पक्षधर लोहिया के नाम पर आर एम एल अस्पताल, तो लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नाम का संक्षिप्त रूप देकर एलएनजेपी अस्पताल लोगों की जुबान पर हैं। ऑल इंडिया मेडिकल साइंसेज को छोटा करके एम्स न जाने कब से बोला जा रहा है। उड़नपरी पीटी उषा का पूरा नाम अगर आप सुनें, तो हो सकता है, गश खाकर गिर पड़ें।

कुछ उत्साही फिल्मी गीतकारों ने तो आई लव यू तक को छोटा करके ईलू कर दिया है। यह संक्षिप्तीकरण कई लोगों के लिए मजाक का विषय रहा है। अज्ञेय जी जेएनयू को मजाक में जनेयू बोला ही करते थे। संक्षिप्तीकरण का चाहे जो मजाक उड़ाएं, लेकिन इसका अपना मजा है। बोलते हुए समय कम लगता है, तो लिखते हुए जगह की बचत हो जाती है। यानी ज्यादा जगह घेरने का टंटा ही खत्म।

संस्कृत के हमारे दिग्गज व्याकरणाचार्य पाणिनि तो सूत्रों में संक्षिप्तीकरण के इस कदर कायल थे कि एक मात्रा भी कम हो जाती थी, तो इसे पुत्रोत्पत्ति के जैसा हर्षोल्लास का अवसर मानते थे। इसलिए संक्षिप्तीकरण की आलोचना करने का मतलब नहीं है। हम जिस दौर में रह रहे हैं, उसी दौर के अनुसार तो चलेंगे। इसलिए मुझे संदेह है कि समय न होने की शिकायत करने वाले पाठक मेरा व्यंग्य पढ़ेंगे भी या नहीं।
  • कैसा लगा
Comments

Browse By Tags

time nobody

स्पॉटलाइट

आखिर क्यों करीना को साइन करना पड़ा था 'No Kissing Clause', अब ऐश्वर्या ने भी लिया ये फैसला

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

व्रत में सेंधा नमक क्यों खाते हैं? आप भी जान लें

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

PHOTOS: ऐश्वर्या राय ने पहनी अब तक की सबसे अजीब ड्रेस, शाहरुख की भी छूट गई हंसी

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

पत्नी को छोड़ इस राजकुमारी के साथ 'लिव इन' में रहते थे फिरोज खान, फिर सामने आया था ‌इतना बड़ा सच

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

नवरात्रि 2017ः इस पंडाल में मां दुर्गा ने पहनी 20 किलो सोने की साड़ी, जानें खासियत

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

निर्यात बन सकता है विकास का इंजन

Export can become engine of development
  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

बच्चों को खुला आकाश दीजिए

Give children open sky
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

फेरबदल का सियासी संदेश

political message of Reshuffle
  • सोमवार, 4 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!