आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

नई तकनीक से ही समाधान

विजय गुप्ता

Updated Fri, 26 Oct 2012 09:40 PM IST
new technology will increase crop production says deepak paintal
बढ़ती आबादी की खाद्य जरूरतों को पूरा करने के लिए जहां तकनीकी आधारित फसलों को उपजाने की वकालत हो रही है, तो वहीं इसके विरोधी भी कम नहीं हैं। देश में इन दिनों जेनेटिकली मोडीफाइड, यानी जीएम फसलों को लेकर बहस छिड़ी है। इसी संदर्भ में जीएम तकनीक मामलों के विशेषज्ञ और दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति दीपक पेंटल से बातचीत...
आखिर खाद्य जरूरतों के लिए तकनीकी आधारित फसलों की वकालत क्यों की जा रही है, जबकि इसको लेकर कई तरह के सवाल उठाए जाते रहे हैं?
जिस तेजी से आबादी बढ़ रही है और उपजाऊ जमीन लगातार औद्योगिकीकरण की बलि चढ़ रही है, उसमें सभी के लिए खाद्य जरूरतें पूरी करने के लिए खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल ही एकमात्र विकल्प है। घरेलू संसाधनों से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के वैज्ञानिक जितना शोध और अनुसंधान कर सकते हैं, उससे कहीं ज्यादा कर रहे हैं। इसे उत्पादन में हुई बढ़ोतरी के बेहतर परिणाम के रूप में देखा जा सकता है। लेकिन भविष्य की जरूरतें पूरी करने के लिए वैज्ञानिकों की यह मेहनत भी कम पड़ जाएगी। लिहाजा नई तकनीक को अपनाना ही समझदारी होगी।

नई तकनीक का मतलब सिर्फ जीएम फसलों से है या फिर कुछ और?
जी हां, नई तकनीक का मतलब जीएम फसलों से है। विकसित देशों में इसका इस्तेमाल पिछले डेढ़ दशक से हो रहा है। अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी अमेरिकी देशों के किसान जीएम मक्का, जीएम सोया और जीएम लाही (रेपसीड) आदि की खेती कर रहे हैं। इनके उत्पाद दुनिया भर में पसंद किए जा रहे हैं। भारत में भी आयातित सोया और कनौला ऑयल जीएम तिलहन का उत्पाद है, जिसकी बड़ी मात्रा में खपत हो रही है। इन देशों में जीएम फसलों का दायरा लगभग 1,600 लाख हेक्टेयर क्षेत्र तक फैल चुका है।

भारत में पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए जीएम फसलें पूरी तरह से सुरक्षित हैं, इसकी गारंटी अभी तक वैज्ञानिकों की ओर से क्यों नहीं दी जा रही है?

दरअसल सच सभी को मालूम है। इसके बावजूद लोग स्वास्थ्य और पर्यावरण के नाम पर दूसरों को डरा रहे हैं। डर जीएम फसलों से नहीं है, बल्कि इन लोगों की समस्या उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों से है, जिनके पास जीएम फसलों की तकनीक है। मामले को राजनीतिक बना दिया गया है। स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए यदि यह नुकसानदेह है, तो दूसरे देशों में यह कैसे सफल है? रही बात सुरक्षा की गारंटी की, तो अपने देश में जीएम सोया खली को जानवर खा रहे हैं। साथ ही, आयातित खाद्य तेल भी इस्तेमाल हो रहा है।

फिर बात आगे कैसे बढ़ेगी?

पहल लगातार हो रही है। घरेलू वैज्ञानिकों ने दस वर्ष पहले इसी तकनीक से हाइब्रिड सरसों को विकसित किया था। उसके सभी तरह के परीक्षण भी हो चुके हैं। इसके बावजूद मामला ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। बीटी बैंगन और बीटी मक्का के भी कई परीक्षण पूरे हो चुके हैं। अब एक ही रास्ता है कि सरकार जल्द से जल्द बायोटेक्नोलॉजी रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया का गठन करे ताकि इसके जरिये इससे जुड़े सभी मामलों का निपटारा हो सके।

पड़ोसी देश चीन भी जीएम पर लगातार शोध और अनुसंधान कर रहा है। भारत के मुकाबले वहां दस गुना अधिक रिसर्च हो रही है। चूंकि वहां इस तरह का माहौल नहीं है, इसलिए उसने कई जीएम फसलों का शोध कार्य पूरा कर लिया है। उसे जीएम तकनीक आयात की जरूरत नहीं होगी, जबकि भारत में नई तकनीक आयात के बगैर बात नहीं बनेगी।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

काबिल ऋतिक की 8 नाकाबिल फिल्में, हो गई थी फ्लॉप

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

ट्रंप की 'चहेती बेटी' हैं काफी फैशनेबल, देखना चाहेंगे इनका बोल्ड अवतार?

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

सेक्स दवाखानों के दरवाजे हो रहे हैं बंद, कारण जान लीजिए

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

मनचले की शरारत, फेसबुक पर वायरल दीपिका का फेक गाउन

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

VIDEO: केकड़े का चुंबन करना चाहा, हो गया ये हाल

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

Most Read

न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं

Want justice, not compensation
  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

कैसे रुकेगी हथियारों की होड़

How to stop the arms race
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

चीन की बराबरी के लिए सुधार जरूरी

Reforms is must for china equipollence
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +

चुनाव सुधार के रास्ते के रोड़े

Hurdel of Election reforms
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में चीन की ताकत

China's strength in Pakistan
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

यह कैसी आचार संहिता है

What type of this Code of Conduct
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top