आपका शहर Close

इस जीत से जो साबित हुआ है

Ashok Kumar

Ashok Kumar

Updated Mon, 24 Dec 2012 12:09 PM IST
meaning of narendra modi victory
गुजरात में तीसरी बार मुख्यमंत्री बनने से पहले की अपनी विजय-सभा में नरेंद्र मोदी अपना भाषण कर चुके हैं। जीत के माहौल में दिखावटी विनयशीलता, छलकता अहंकार और आधे-अधूरे निष्कर्षों का एक अनोखा ही मिश्रण होता है। नरेंद्र मोदी के विजय-व्याख्यान में यह सब कुछ था। सेवक होने की विनयशीलता थी, सेवक के संहारक बन सकने की याद दिलाने वाला तेवर था, अर्धसत्य पर खड़ा अपना महिमामंडन था, गुजरात की अस्मिता का गुणगान था और इस औदार्य का बखान भी कि देश से जो भी गरीब-गुरबा, अशिक्षित बेरोजगार गुजरात आएगा, हम उसे पालेंगे, क्योंकि यह भी भारत माता की सेवा है।
उनके सामने वित्त मंत्री चिदंबरम थे, जो यह कहकर कांग्रेस की किरकिरी करवा रहे थे कि गुजरात में जीत तो कांग्रेस की हुई है, क्योंकि मोदी जैसी जीत का दावा कर रहे थे, वैसी उन्हें हासिल नहीं हुई। और फिर उनके सामने भाजपा के अधिकांश नेतागण थे, जो सावधानी के साथ खुशी व्यक्त कर रहे थे, ताकि मोदी दिल्ली तक न आ पहुंचे! मोदी ने अपने भाषण में यह संकेत किया कि अब दिल्ली में उनकी पालकी ढोने की तैयारी की जाए! राजनीति की आंतरिक दुनिया में कैसा रेगिस्तान पसरा हुआ है और राजनीतिक दलों के भीतर व्यक्तित्वों की रस्साकशी किस हद तक है, इनका संकेत देकर गुजरात का चुनाव पूरा हुआ है।

निश्चय ही गुजरात की यह जीत मोदी के प्रशासनिक कौशल और राजनीतिक पकड़ की जीत है। उनसे इसका श्रेय छीनने की या इस श्रेय में बंदरबांट करने की कोई भी कोशिश राजनीतिक बेईमानी होगी। यह स्वीकार करने में भी झिझक नहीं होनी चाहिए कि संघ परिवार मार्का राजनीति करने में आज भाजपा में मोदी का सानी नहीं है। देश में जैसी सरकारें चल रही हैं, और दिल्ली में भी मनमोहन सिंह-सोनिया गांधी जिस तरह सरकार चला रहे हैं, नरेंद्र मोदी गुजरात में उससे कोई बुरी सरकार नहीं चला रहे हैं। यह भी कुबूल करने में दिक्कत नहीं है कि जिस विकास-मॉडल को सारे राजनीतिक दल व सरकारें एकमात्र अलादीनी चिराग मानकर पूज रही हैं, नरेंद्र मोदी उसका एक बेहतर संस्करण ही गुजरात में उभार पाए हैं। वह चुस्त मुख्यमंत्री हैं-सावधान और सक्रिय मुख्यमंत्री हैं। यह मानने में भी गुरेज नहीं कि नरेंद्र मोदी देश के उन मुख्यमंत्रियों में नहीं हैं, जिनके आसपास भ्रष्टाचार का जहरीला, घना धुंआ उठता रहता है।

लेकिन सवाल यह है कि इस तरह की राजनीति से देश कैसा बन रहा है। बहुत लोग कहते हैं कि गुजरात में हुए 2002 के दंगों को आप कब तक ढोते रहेंगे! लेकिन क्या हम अपने देश के विभाजन को कब्र में दफना सके हैं? ऐसा ही गुजरात के साथ भी है। वह अभागा दौर काफी पहले घटा था, लेकिन वह कहीं पीछे छूट गया है, ऐसा मानना ईमानदारी नहीं है। गुजरात में जो हुआ, वह कहीं गहरे सड़ और रिस रहा है। इसलिए उसकी राजनीतिक-सामाजिक मरहम-पट्टी करनी ही पड़ेगी। यह काम किसी हद तक नरेंद्र मोदी भी कर सकते थे, लेकिन उन्होंने तो गुजरात को अपनी मुट्ठी में करने का फॉर्मूला ऐसा ही बनाया; और कभी यह कहने की जरूरत महसूस नहीं की कि उन्हें अपनी और सरकार की इस चूक का पछतावा है। इस बात का बहुत शोर किया जा रहा है कि इस बार मुसलमानों ने भी मोदी को वोट दिया है। दिया हो, तो इससे वे साबित क्या करना चाहते हैं? हर कहीं, जहां राज्य अल्पसंख्यकों को अपनी कृपा पर रहने को मजबूर करता है, वहां ऐसा ही देखने को मिलता है। पाकिस्तान में जो हिंदू बचे हुए हैं, वे भी ऐसी ही मानसिकता में जीते हैं।

भारतीय राजनीति के इस दौर में मोदी एक ऐसी प्रवृत्ति के प्रतिनिधि हैं, जो समाज को भीड़ में बदलकर अपनी मनमानी करती है। चुनावी जीत से अगर सारी बातें तय हुआ करतीं, तो इंदिरा गांधी को जैसी जीत मिली, 1977 में जनता पार्टी को जैसी जीत मिली, फिर राजीव गांधी को जैसी जीत मिली, क्या उन सारी जीतों का हश्र वैसा करुण व लज्जास्पद होता? मोदी एक दिन के लिए दिल्ली आएं या सदा के लिए, यह उनके और उनकी पार्टी के बीच का मामला है। हमारा मामला एक है कि भारतीय राजनीति का पतन रोकना है, तो ऐसे सारे तत्वों को रोकने की जरूरत है, जो भारतीय समाज के ताने-बाने को बिखेरना चाहते हैं।
Comments

स्पॉटलाइट

दिवाली 2017: इस त्योहार घर को सजाएं रंगोली के इन बेस्ट 5 डिजाइन के साथ

  • मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
  • +

पुरुषों में शारीरिक कमजोरी दूर करती है ये सब्जी,जानें इसके दूसरे फायदे

  • मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
  • +

वायरल हो रहा है वाणी कपूर का ये हॉट डांस वीडियो, कटरीना कैफ को होगी जलन

  • मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
  • +

KBC 9: हॉटसीट पर फैंस को एक खबर देते हुए इतने भावुक हुए अमिताभ, निकले आंसू

  • मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
  • +

बढ़ती उम्र के साथ रोमांस क्यों कम कर देती हैं महिलाएं, रिसर्च में खुलासा

  • मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
  • +

Most Read

रूढ़ियों को तोड़ने वाला फैसला

supreme court new decision
  • रविवार, 15 अक्टूबर 2017
  • +

पारंपरिक बाजार पर दोहरी मार

Dual hit on traditional market
  • बुधवार, 11 अक्टूबर 2017
  • +

सरकारी संवेदनहीनता की गाथा

Saga of government anesthesia
  • मंगलवार, 17 अक्टूबर 2017
  • +

ग्रामीण विकास से मिटेगी भूख

Wiped hunger by Rural Development
  • सोमवार, 16 अक्टूबर 2017
  • +

भारत में समाजवाद

Socialism in india
  • गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017
  • +

उत्तर प्रदेश में क्या बदला?

What changed in Uttar Pradesh?
  • गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!