आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

भ्रष्टाचार का घातक गठजोड़

विनीत नारायण

Updated Fri, 14 Sep 2012 04:53 PM IST
lethal nexus of corruption
अन्ना हजारे और उनकी 'टीम अन्ना' हो, या बाबा रामदेव, सब राजनेताओं को ही भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं। इसलिए राजनेताओं को गाली देना, उनका मजाक उड़ाना, यहां तक कि उन्हें थप्पड़ मारना, यह सब सामान्य बात हो गई है। यह बात दूसरी है कि राजनेताओं के खिलाफ शोर मचाने वाले चाहे जितना उछल लें, चुनावों में जनता वोट उन्हीं राजनेताओं को देती है, जिनके खिलाफ आंदोलन चलाए जाते हैं। जनता समझती है कि राजनेता ढीठ हो गए हैं। उन्हें अपनी निंदा से कोई परेशानी नहीं होती, बशर्ते कि उनकी कमाई ठीक चलती रहे। इसलिए राजनेता लगातार जनता की निगाहों में गिरते जा रहे हैं। राजनेताओं की इस दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार है?
मैं समझता हूं कि राजनेता ही इसके लिए जिम्मेदार हैं। इसके दो कारण हैं। एक तो उनके मन में एक डर बैठा है, जिसकी वजह से वे चुनौतीपूर्ण स्थिति का सामना करने से बचना चाहते हैं। दूसरा वे समाज को आईना नहीं दिखाते। पिछले दिनों मुंबई के कुछ अति धनी उद्योगपतियों के साथ देश के भ्रष्टाचार को लेकर चर्चा हुई, जो इस सवाल पर काफी उद्वेलित थे। मैंने उनसे पूछा कि क्या वे हवाला कारोबार, काले धन और 1,000 रुपये के बड़े नोटों के चलन को रोकने की पैरोकारी करेंगे। यह सुनकर सभी मुंह बिचकाने लगे। बात साफ है कि भ्रष्टाचार के लिए हम नेताओं को तो गाली देते हैं, पर अपने उद्योग, व्यापार, खनन तथा भवन निर्माण जैसे क्षेत्रों में जम कर काले धन का आदान-प्रदान करते हैं।

देश और विदेश में अचल संपत्ति में निवेश हो या विलासितापूर्ण जीवन सब में काले धन का जमकर प्रयोग होता है। सरकारी जमीन का आंवटन कराना हो, ठेके कोटे या लाइसेंस लेने हों या रक्षा मंत्रालय जैसे विभागों को माल की भारी आपूर्ति करनी हो, तो कोई भी सीधे रास्ते नहीं जाना चाहता। सबकी यही मंशा होती है कि ‘खर्चा चाहे जो हो जाए, काम हमें ही मिलना चाहिए।’ फिर चाहे हमारी योग्यता हो या न हो। साफ जाहिर है कि भ्रष्टाचार को लेकर अपने ड्राइंगरूमों में राजनेताओं को गाली देने वाले ये व्यवसायी इन्हीं ड्राइंगरूमों में बिठाकर नेताओं और अफसरों की आवभगत करते हैं। चुनाव के पहले बिना मांगे भी इन नेताओं के घर रुपया भेजते हैं। इस उम्मीद में कि अगर वह जीत गया, तो आगे 10 गुना लाभ लेंगे।

जब से टेलीविजन चैनलों की बाढ़ आई है, तबसे टीआरपी बढ़ाने के लिए टीवी चैनल वाले खोजी पत्रकारिता के नाम पर सनसनीखेज खबरें लाते हैं और उन्हें मिर्च-मसाला लगाकर इस तरह दिखाते हैं, जैसे चोर रंगे हाथों पकड़ लिया हो। वे अपने चेहरे पर क्रांतिकारी भाव ले आते हैं और जनता को उत्तेजित करने के लिए भड़काऊ भाषा का प्रयोग करने से भी गुरेज नहीं करते हैं। राजनेताओं के खिलाफ माहौल बनाने में इन टीवी चैनलों की सबसे बड़ी भूमिका रही है। मजे की बात यह है कि इन चैनलों के मालिकों में कुछ संदिग्ध लोग भी शामिल हैं, जिनकी गतिविधयों को लेकर सवाल उठते हैं। टीवी चैनल उनके लिए कोई राष्ट्र निर्माण का माध्यम नहीं, बल्कि ब्लैकमेलिंग या अपना दबदबा कायम करने या अपने अपराध छिपाने का माध्यम है। यह बात भी दूसरी है कि आज अनेक राजनेताओं के अपने टीवी चैनल चल रहे हैं।

न्यायपालिका के सदस्यों को मान-सम्मान, वेतन, सुरक्षा और मनोरंजन सबकी बेहतर सुविधाएं मिली हुई हैं। किसी वादी या प्रतिवादी की हिम्मत नहीं कि उनके घर या चैंबर में घुस जाए। पर न्यायपालिका के भ्रष्टाचार पर अब किसी को कोई संदेह नहीं बचा है। निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्च अदालत तक के न्यायाधीशों का आचरण सामने आ चुका है। राजनेताओं को तो चुनाव लड़ना होता है। जनता की खैर खबर रखनी होती है। हार जाएं, तो अगले पांच साल राजनीति में जिंदा रहने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है। भविष्य की कोई गारंटी नहीं। मगर न्यायपालिका से जुडे़ लोगों के सामने ऐसी असुरक्षा नहीं होती, तो फिर उसके भीतर घुस आए भ्रष्टाचार की वजह क्या है? देश की अदालतों में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लंबित मुकदमे न्यायपालिका की कार्यप्रणाली और कार्यक्षमता को ही दर्शाते हैं।

इस देश की सबसे ज्यादा मिट्टी खराब नौकरशाही ने की है। अंगरेज अपनी हुकूमत चलाने के लिए अखिल भारतीय सेवाओं का ढांचा बना गए। जिसमें घुसने के लिए एक बार मेहनत करनी होती है। इम्तहान पास होने के बाद सारी जिंदगी देश को मूर्ख बनाने, लूटने और रौब गांठने का लाइसेंस मिल जाता है। इस ‘स्टील फ्रेमवर्क’ के सदस्यों को जीवन में कोई असुरक्षा नहीं है, फिर ये क्यों भ्रष्टाचार करते हैं? इनकी सेवाओं के ही ईमानदार अफसर बताते हैं कि अगर ये लोग सहयोग न करें, तो राजनेता एक पैसे का भ्रष्टाचार नहीं कर सकते। पर इनका लालच और हवस नेताओं को भयमुक्त कर देता है। फिर दोनों की सांठगांठ से जनता लुटती है, देश बरबाद होता है।

जरूरत भ्रष्टाचार के कारणों को गहराई से समझने की है। सिर्फ राजनेताओं को कठघरे में खड़ा कर इस समस्या से निजात नहीं पाई जा सकती। साझे प्रयास से यथा संभव इस बुराई को दूर करने का संकल्प लेना होगा। पूर्णतः भ्रष्टाचार मुक्त कोई समाज कभी नहीं रहा। चाणक्य पंडित ने कहा था कि शहद के गोदाम की रखवाली करने वाले के होठों पर शहद लगा होता है। पर इसका मतलब यह नहीं कि हम भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करें।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

nexus corruption

स्पॉटलाइट

लगने वाली है इन 5 राश‌ियों को शन‌ि की नजर, इन उपयों से बचें

  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

'जमाई राजा' की सास ने 19 साल पहले कराया था बोल्ड फोटोशूट, वायरल हुईं तस्वीरें

  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

फिल्मफेयर मैग्जीन पर दिखा दीपिका का 'कातिलाना' अंदाज, दिल थाम लीजिए जनाब!

  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

'ट्यूबलाइट' के सेट पर कौन है ये बच्चा, गले लगाकर रो पड़े सलमान खान

  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

कपिल शर्मा के शो में कुछ ऐसे करतब दिखाएंगे सुपरस्टार जैकी चैन

  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

Most Read

न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं

Want justice, not compensation
  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

एक खेल का बवाल में बदल जाना

A traditional sport turn into turmoil
  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

अर्द्धसैनिक बल और सेना में फर्क

difference in Paramilitary forces and the army
  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

बजट में दिखेंगे नोटबंदी के फायदे

Advantage of Demonitisation will show in Budget
  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

सरकारी खर्च पर टिकी उम्मीदें

Hopes on government spending
  • मंगलवार, 24 जनवरी 2017
  • +

चीन की बराबरी के लिए सुधार जरूरी

Reforms is must for china equipollence
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top