आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

ऐसे कम नहीं होगी महंगाई

सुभाष चंद्र कुशवाहा

Updated Mon, 05 Nov 2012 11:59 AM IST
inflation will not be reduced in this way
हमारे वित्त मंत्री ने रिजर्व बैंक के गवर्नर की इस नीति पर नाखुशी जताई है कि उन्होंने आर्थिक वृद्धि दर के लिए मौजूदा ब्याज दरों में कटौती नहीं की। ब्याज दरों की कटौती से जाहिर है, देश की गरीब जनता को तो कोई लाभ मिलने वाला नहीं था, सेंसेक्स के लुढ़कने से साफ है कि इसका लाभ औद्योगिक घरानों को होना था, जिसके लिए हमारे वित्त मंत्री चिंतित हैं।
अगर हम गौर करें, तो पाएंगे कि हमारे वित्त मंत्री कभी भी देश की बहुसंख्यक जनता के लिए चिंतित नहीं रहे। ऐसा लगता है कि उन्हें देश की मौजूदा गरीबी का भान तक नहीं है। मुश्किल यह है कि ऑक्सफोर्ड में भारत की गरीबी के बारे में पढ़ाया भी नहीं जाता। रिजर्व बैंक की चिंता में देश की महंगाई है, जिसकी सबसे ज्यादा मार गरीबों पर पड़ रही है। उसकी चिंता में औद्योगिक विकास भी है, तभी उसने नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) में 0.25 प्रतिशत की कमी की, लेकिन उसने प्रमुख नीतिगत दरों (रेपो रेट) को यथावत रखकर सब कुछ औद्योगिक घरानों को सौंप देने के बजाय, संतुलन बनाने का काम किया है।

हालांकि इससे गरीबों पर पड़ रही मार से कोई निजात नहीं मिलने वाली है फिर भी और मार से कुछ राहत तो मिलेगी ही। वित्तमंत्री की चिंता में महंगाई नहीं, आर्थिक वृद्धि है। वह विकास दर के लिए अकेले मुकाबला करने को तैयार है। नाराजगी यहां तक कि अगर रिजर्व बैंक उनके मुताबिक नहीं चल रहा, तो वह अकेले ऐसी नीति अपनाएंगे जिससे विकास दर बढ़े। यही चिंता 35 लाख रुपये का शौचालय बनाने वाले और 26 रुपये रोज कमाने वालों को गरीबी रेखा से ऊपर बताने वाले योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया की भी है। संयोग से वह भी ऑक्सफोर्ड प्रशिक्षित हैं।
 
आर्थिक वृद्धि से किसे लाभ या घाटा हो रहा है, इसे इस रूप में समझा जाना चाहिए कि रिजर्व बैंक के इस कदम को केवल वित्तमंत्री ने ही नहीं, देश के बड़े औद्योगिक घरानों ने भी अनुचित ठहराया है। उनकी ओर से जो बयान आए हैं, उनमें कहा गया है कि वित्त विभाग ने जो कदम उठाये हैं, उनसे चौथी तिमाही में महंगाई अपने आप कम हो जाएगी। यानी हमेशा की तरह अनुमान और दिलासे के सहारे गरीबों को भरमाने और अपनी झोली भरने की मांग, औद्योगिक घराने कर रहे हैं। सवाल उठता है कि वित्त मंत्रालय द्वारा महंगाई कम करने के उठाए गए कदम अगर वास्तव में कारगर होंगे, तो औद्योगिक घराने इंतजार क्यों नहीं करते?

महंगाई घट जाए, फिर रेपो दर कम करने की मांग करें, तो बात समझ में आएगी। बात साफ है कंपनी समूहों की चिंता में केवल अपना लाभ है न कि विकराल होती महंगाई। वित्त मंत्री की चिंता में भी वही है। फिर अरविंद केजरीवाल के इस आरोप में तो दम लगता है कि देश को बड़े औद्यौगिक घराने ही चला रहे हैं। वह अपने लाभ के लिए देश की नीतियां बदलवा लेते हैं।

अन्यथा कृषि मंत्री, वित्त मंत्री और यहां तक की प्रधानमंत्री द्वारा बार-बार आश्वासन दिए जाने के बावजूद विगत साढ़े तीन वर्षों में महंगाई टस से मस नहीं हुई है। रिजर्व बैंक के गवर्नर को यह कहना पड़ा है कि, ‘महंगाई बढ़ने की धारणा और उसे व्यवस्थित रखना मौद्रिक नीति की प्राथमिकता बनी हुई है।’  

बेशक यह सब कॉरपोरेट परस्त सरकार की प्राथमिकता में नहीं है। वह डीजल, रसोई गैस, दवा, शिक्षा, सबको गरीबों की पहुंच से दूर कर रही है। वह अमेरिकी दबाव में एफडीआई की अनुमति देते हुए, उसे किसान हितैषी बता, बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाभ पहुंचा रही है। वह अमेरिका को मंदी से उबारने के लिए परमाणु ऊर्जा करार करती है। महंगाई से गरीब जनता परेशान है।

रसोई गैस के लिए बनाई जा रही नीतियां, संयुक्त परिवारों के लिए परेशानी का सबब और गैस कंपनियों के लिए लाभप्रद साबित हो रही हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि सरकार के एजेंडे में गरीब या आम आदमी नहीं है। अन्यथा सीआईआई के यह कहने के बावजूद कि रिजर्व बैंक की चिंता में महंगाई का होना वाजिब है, क्योंकि महंगाई सीमा से बाहर हो चुकी है, हमारे वित्त मंत्री की चिंता में कंपनियों को लाभ पहुंचाना नहीं होता।
  • कैसा लगा
Comments

स्पॉटलाइट

आखिर क्यों करीना को साइन करना पड़ा था 'No Kissing Clause', अब ऐश्वर्या ने भी लिया ये फैसला

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

व्रत में सेंधा नमक क्यों खाते हैं? आप भी जान लें

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

PHOTOS: ऐश्वर्या राय ने पहनी अब तक की सबसे अजीब ड्रेस, शाहरुख की भी छूट गई हंसी

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

पत्नी को छोड़ इस राजकुमारी के साथ 'लिव इन' में रहते थे फिरोज खान, फिर सामने आया था ‌इतना बड़ा सच

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

नवरात्रि 2017ः इस पंडाल में मां दुर्गा ने पहनी 20 किलो सोने की साड़ी, जानें खासियत

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

निर्यात बन सकता है विकास का इंजन

Export can become engine of development
  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

बच्चों को खुला आकाश दीजिए

Give children open sky
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

फेरबदल का सियासी संदेश

political message of Reshuffle
  • सोमवार, 4 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!