आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

भारत भी खोलना चाहता है ब्रह्मांड की परत

मुकुल व्यास

Updated Sun, 02 Dec 2012 01:01 AM IST
india wants to open the lining of universe
भारत ने ब्रह्मांड के एक मूलभूत कण न्यूट्रिनो के अध्ययन के लिए एक बड़ी परियोजना तैयार की है, जिसके तहत केरल सीमा के निकट तमिलनाडु के थेनी जिले के बोडी वेस्ट हिल्स क्षेत्र में एक चट्टानी पहाड़ी के नीचे एक भूमिगत प्रयोगशाला बनाई जाएगी। ब्रह्मांड में फोटोन (प्रकाश कण) की तरह न्यूट्रिनो कण भी बहुतायत में उपलब्ध हैं। ये कण विद्युतीय दृष्टि से तटस्थ होते हैं।
इन कणों की प्रकृति बड़ी विचित्र है। ये दूसरे कणों के साथ बहुत ही कमजोरी के साथ प्रतिक्रिया करते हैं। इसी वजह से पृथ्वी सहित पदार्थ के विभिन्न रूप इन कणों के लिए करीब-करीब पारदर्शी होते हैं। सूर्य और अन्य ब्रह्मांडीय स्रोतों से आने वाले खरबों न्यूट्रिनो कण हर सेकेंड हमारे शरीर के आर-पार गुजरते हैं। इनसे हमें कोई नुकसान नहीं होता।

इन कणों को आसानी से नहीं ढूंढा जा सकता। इसी वजह से अभी तक इनका ठीक से अध्ययन नहीं हो पाया है। ब्रह्मांडीय किरणों में मौजूद दूसरे कणों की वजह से भी इन्हें खोजना मुश्किल होता है। अतः न्यूट्रिनो डिटेक्टरों को जमीन के एक किमी नीचे या उससे भी ज्यादा गहराई पर स्थापित करना पड़ता है। डिटेक्टरों पर मिट्टी या चट्टान की मोटी परत से दूसरे कणों के वहां तक पहुंचने की संभावना दस लाख गुना कम हो जाती है। ज्यादातर न्यूट्रिनो कण पदार्थों के आर-पार हो जाते हैं, पर कुछ कण डिटेक्टरों की गिरफ्त में आ जाते हैं। न्यूट्रिनो कणों का पता लगाने के लिए दुनिया के विभिन्न कोनों में कई तरह के प्रयोग चल रहे हैं।

न्यूट्रिनो भौतिकी में वैज्ञानिकों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए कुछ और डिटेक्टर लगाने की तैयारी चल रही है।
भारत की प्रस्तावित न्यूट्रिनो प्रयोगशाला पर दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय की निगाहें हैं। न्यूट्रिनो कण को शुरू में द्रव्यमान रहित माना जाता था। अब पता चला है कि इनका द्रव्यमान होता है, जो बहुत ही सूक्ष्म होता है। अभी यह ज्ञात नहीं है कि इसके तीन किस्मों में से कौन-सा कण सबसे भारी है। ये  विचित्र कण किसी पदार्थ, लोगों या पृथ्वी के आर-पार गुजरते वक्त दूसरी किस्म में बदलने की क्षमता भी रखते हैं। अपने यहां की न्यूट्रिनो प्रयोगशाला में इन चीजों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा।

भारत में इस तरह की प्रयोगशाला बनाने का विचार सबसे पहले 2000 में चेन्नई में एक अंतरराष्ट्रीय समेलन में रखा गया था। 2001 में इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया। उसी बैठक में न्यूट्रिनो रिसर्च में सहयोग के लिए देश के विभिन्न वैज्ञानिक संस्थानों का एक संगठन बनाया गया। वर्ष 2002 में न्यूट्रिनो प्रयोगशाला का औपचारिक प्रस्ताव परमाणु ऊर्जा विभाग को सौंपा गया। न्यूट्रिनो परियोजना को 12 वीं पंचवर्षीय योजना की प्रमुख वैज्ञानिक परियोजनाओं में शामिल किया गया है। परमाणु ऊर्जा विभाग और विज्ञान व प्रौद्योगिकी विभाग  इस पर 1,350 करोड़ रुपये खर्च करेंगे। इस वक्त 26 भारतीय संस्थान और करीब 100 वैज्ञानिक इस परियोजना में शामिल हैं।

न्यूट्रिनो कणों  के अध्ययन के लिए प्रस्तावित न्यूट्रिनो प्रयोगशाला को विवादों में घसीटने की भी कोशिश की गई  है। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन और पर्यावरणविद वीटी पद्मनाभन का आरोप है कि न्यूट्रिनो प्रयोगशाला अमेरिका की फर्मी लैब की परियोजना है, जिसकी शुरुआत विवादास्पद भारत-अमेरिकी परमाणु करार के साथ हुई थी। यह आरोप बेतुका इसलिए हैस क्योंकि यह विशुद्ध रूप से भारतीय परियोजना है।

भारतीय वैज्ञानिकों ने 2005 में भारत-अमेरिकी परमाणु वार्ता शुरू होने से काफी पहले इसकी परिकल्पना कर ली थी। तब अमेरिका की फर्मी लैब किसी भी रूप में इसमें शामिल नहीं हुई थी। यह सिर्फ मूलभूत विज्ञान का प्रयोग है, जिसका परमाणुधर्मिता या किसी और खतरनाक आणविक गतिविधि से कोई लेना-देना नहीं है, न ही इससे हमारे सामरिक हित प्रभावित होते हैं।

मुख्य न्यूट्रिनो प्रयोगशाला एक पर्वत के शिखर से 1.3 किलोमीटर नीचे एक गुफा में स्थापित की जाएगी। वहां  करीब 50 किलो टन वजन का पूर्ण रूप से एक स्वदेशी डिटेक्टर लगाया जाएगा, जो प्राकृतिक और मानव निर्मित न्यूट्रिनो कणों का पता लगाएगा। गुफा को एक 1.9 किलोमीटर लंबी सुरंग के जरिये बाहरी दुनिया के साथ जोड़ा जाएगा। पहले चरण में इस प्रयोगशाला में सिर्फ ब्रह्मांडीय किरणों द्वारा उत्पन्न न्यूट्रिनो कणों का अध्ययन किया जाएगा। दूसरे चरण में यह डिटेक्टर अमेरिका, यूरोप और जापान की न्यूट्रिनो प्रयोगशालाओं से छोड़ी जाने वाली तरंगों का भी इस्तेमाल कर सकता है। भारतीय न्यूट्रिनो प्रयोगशाला के 2017 में चालू होने की संभावना है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

universe india

स्पॉटलाइट

फॉक्सवैगन पोलो जीटी का लिमिटेड स्पोर्ट वर्जन हुआ लॉन्च

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

सलमान की इस हीरोइन ने शेयर की ऐसी फोटो, पार हुईं सारी हदें

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

इस बी-ग्रेड फिल्म के चक्कर में दिवालिया हो गए थे जैकी श्रॉफ, घर तक रखना पड़ा था गिरवी

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

विराट की दाढ़ी पर ये क्या बोल गईं अनुष्का

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

बादाम भीगा हुआ या फिर सूखा, जानें सेहत के लिए कौन-सा है फायदेमंद?

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

बेकसूर नहीं हैं शरीफ

Sharif is not innocent
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

छुट्टियों से निकम्मा बनता समाज

Society become lazy by holidays
  • गुरुवार, 20 अप्रैल 2017
  • +

तीन तलाक को खत्म करने की चुनौती

Challenge to eliminate three divorce
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की परीक्षा

Examination of opposition in presidential election
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

अन्नाद्रमुक का सियासी ड्रामा

AIADMK's political drama
  • बुधवार, 19 अप्रैल 2017
  • +

अमेरिका से भारतीयों का मोहभंग !

Indians disillusioned with the US!
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top