आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

हू जिंताओ का दूसरा चेहरा

विजय क्रांति

Updated Tue, 06 Nov 2012 09:54 PM IST
hu jintao second face
चीन में कम्युनिस्ट पार्टी और सरकार का नेतृत्व बदलने की इस ऐतिहासिक बेला में वहां के दोनों सर्वोच्च नेता अलग-अलग अंदाज में विदा ले रहे हैं। सत्ता परिवर्तन से सिर्फ कुछ दिन पहले द न्यूयॉर्क टाइम्स ने चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ का कच्चा चिठ्ठा खोलते हुए बताया कि उनके परिवार के सदस्यों ने उनके पद का दुरुपयोग करके 2.27 अरब डॉलर (14,450 करोड़ रु) की दौलत इकट्ठा की।
बेचारे वेन बस इतना ही दावा कर पाए हैं कि ‘मैं इतिहास का सामना करने का साहस रखते हुए अपना पद छोड़ रहा हूं।’ पर भ्रष्टाचार में नाक तक डूबे चीन और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी में गुटबाजी की परंपराओं को देखते हुए कहना मुश्किल है कि सत्ता से उतरने के बाद चीन का इतिहास वेन को कितना या कब तक माफ करेगा। वैसे भी इतिहास बताता है कि पार्टी के भीतर के रिश्तों और गुटों के दांव-पेच के जंजाल में कुसूरवार और बेकुसूर का अंतर मायने नहीं रखता। असली बात ताकत की है। और ताकत के मामले में वेन के मुकाबले उनके वरिष्ठ नेता हू जिंताओ कहीं ज्यादा रसूखदार हैं।

पूरी पार्टी में खराब से खराब हालात को अपने हित में मोड़ लेने के मामले में हू का कोई सानी नहीं है। हू इस समय कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव का सबसे ऊंचा ओहदा रखने के साथ-साथ देश के राष्ट्रपति और सेंट्रल मिलिटरी कमीशन के प्रधान, यानी सेनाध्यक्ष भी हैं। सेनाध्यक्ष की कुरसी बहुत मायने रखती है, क्योंकि पार्टी और सरकार में सेना को चुनौती देने की ताकत किसी में नहीं। खबरों से लगता है कि हू जिंताओ सेनाध्यक्ष का पद अभी अपने ही पास रखने वाले हैं।

हू जिंताओ की दो छवियां हैं, जो एक दूसरे से एकदम उलटी हैं। देश के भीतर उन्हें कठोर अनुशासन और ऐसे फैसलों के लिए ‘देशभक्त’ माना जाता है, जिनके बूते वह तिब्बत, शिंजियांग (मूल नाम पूर्वी तुर्किस्तान) और भीतरी मंगोलिया जैसे तीन मुख्य चीनी उपनिवेशों पर अपने शासनकाल में चीनी कब्जे को और मजबूत करने में कामयाब रहे हैं। यह अलग बात है कि इसके लिए चीन को मानवाधिकारों के हनन के सवाल पर विश्वमंच पर भारी विरोध सहना पड़ा है।

स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय ने कुछ साल पहले हू और उनके कुछ सहयोगियों के खिलाफ तिब्बत में किए गए अत्याचारों के लिए युद्ध अपराध और नरसंहार का मुकदमा भी शुरू कर दिया था। स्पेनी संविधान के अनुसार, इस मुकदमे के सिलसिले में इन चीनी नेताओं को चीन से बाहर गिरफ्तार भी किया जा सकता था। इसे हू का ही कमाल कहेंगे कि चीनी अर्थव्यवस्था की ताकत का इस्तेमाल करके उन्होंने स्पेन सरकार को अपना संविधान बदलने पर मजबूर कर दिया।

हू के राजनीतिक करियर का असली मोड़ 1989 में आया, जब वह तिब्बत में कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव नियुक्त हुए। तिब्बत में इस ओहदे का महत्व वही था, जो ब्रिटिश राज में भारत के गवर्नर जनरल का हुआ करता था। चीनी शासन प्रणाली में इसका दरजा बहुत गौण है। इसकी असली जिम्मेदारी तिब्बत पर चीनी कब्जा सुनिश्चित रखना और बीजिंग को लगातार यह खबर देते रहना होता है कि वहां ‘सब कुछ ठीक-ठाक है।’

मार्च, 1989 में तिब्बत की राजधानी ल्हासा में वहां के युवाओं ने चीनी औपनिवेशिक कब्जे के खिलाफ अभूतपूर्व आंदोलन छेड़ दिया, लेकिन हू जिंताओ ने इस संकट को अपने लिए एक नए अवसर में बदल दिया। उन्होंने सेना की बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों की मदद से आंदोलन को कुचल दिया, जिसमें 140 से ज्यादा तिब्बती मारे गए। तबसे हू जिंताओ को तिब्बती और उनके समर्थक ‘बूचर ऑफ ल्हासा’ (ल्हासा का कसाई) नाम से जानते हैं। तिब्बती धर्मनेता पंचेन लामा की रहस्यमय मौत के लिए तिब्बत समर्थकों ने हू को भी दोषी ठहराया था।

ल्हासा की घटनाओं के दो महीने बाद ही बीजिंग के थ्येन मन चौक में चीनी युवाओं की लोकतांत्रिक क्रांति को कुचलने के लिए देंग और उनके साथियों ने हू के ‘ल्हासा मॉडल’ का उपयोग किया और चीनी कम्युनिस्ट शासन के इतिहास के सबसे बड़े संकट को बख्तरबंद गाड़ियों और टैंकों के नीचे कुचल डाला। इनाम के तौर पर 1992 की अगली पार्टी कांग्रेस में देंग ने हू को तिब्बत से उठाकर पार्टी की सर्वशक्तिमान स्टैंडिंग कमेटी में बिठा दिया और जियांग जेमिन के उत्तराधिकारी के रूप में तैयार करना शुरू कर दिया।

वर्ष 2002 में सत्ता में आने के बाद हू ने तीनों मुख्य चीनी उपनिवेशों में बड़े पैमाने पर हान चीनियों को बसाकर स्थानीय लोगों को अपने ही इलाके में अर्थहीन अल्पसंख्यक बनाने का अभियान शुरू किया, जिसके फल अब दिखने लगे हैं। जून, 2009 में चीन के उइघुर मुसलिम उपनिवेश शिंजियांग की जनता ने चीन के गुआंगदोंग में 18 उइघुर युवा मजदूरों की हत्या के जवाब में लगभग 200 चीनी नागरिकों और पुलिसवालों की हत्या कर दी। तब हू की चीनी सेना ने वहां लाकर बसाए गए नए हान चीनी नागरिकों के साथ मिलकर उरुम्ची, काशगर और काशी में लगभग 800 उइघुरों को मारकर इस विद्रोह को बुरी तरह कुचल दिया। इसी तरह, 2009 के बाद हू जिंताओ की जनसंख्या नीति के विरोध में अब तक 63 तिब्बती युवा आत्मदाह कर चुके हैं। मगर विश्व जनमत और नैतिक दबावों को महत्व देना उनकी शैली में है ही नहीं।

पेशे से हॉइड्रोलिक इंजीनियर हू जिंताओ को तिब्बत की नदियों के विशाल जल भंडार को रोककर उत्तर चीन के खुश्क इलाकों की तरफ मोड़ने की योजना पर बहुत वाहवाही मिल रही है। उनके इस अभियान का भले ही लगभग एक दर्जन देशों के एक अरब लोगों पर बुरा असर पड़ने वाला है, पर दुनिया की बातें सुनने के बजाय हू ने चीन के हितों का ध्यान रखने की नीति अपनाई है। अब देखना यह है कि क्या चीन और हू दुनिया के इतिहास का सामना कर पाएंगे? लेकिन फिलहाल तो हू एक नायक के रूप में पद छोड़ रहे हैं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

कन्या राश‌ि में गुरु और चन्‍द्रमा का संयोग, आज आपके ल‌िए क‌ितना भाग्यशाली रहेगा

  • मंगलवार, 17 जनवरी 2017
  • +

इस एक्ट्रेस ने शेयर की बोल्ड तस्वीरें और अपनी बॉडी को लेकर बोल दी ये बात

  • मंगलवार, 17 जनवरी 2017
  • +

17 साल की लड़की के इश्क में पड़े थे जावेद अख्तर, शादी के समय रहने को घर तक नहीं था

  • मंगलवार, 17 जनवरी 2017
  • +

वर्ल्ड चैंपियन ने कहा, 35 सालों में पहली बार हुआ पति होने का एहसास

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में चमके आमिर और 'दंगल', झटके 4 अवॉर्ड

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

Most Read

इस पृथ्वी पर मेरा कोई घर नहीं

I have no home on this earth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

संक्रमण के दौर में तमिल राजनीति

Tamil politics in transition stage
  • शुक्रवार, 13 जनवरी 2017
  • +

कैसे रुकेगी हथियारों की होड़

How to stop the arms race
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

सुस्त होती रफ्तार और बेजार बाजार

Down market and sluggish pace
  • बुधवार, 11 जनवरी 2017
  • +

सच क्यों नहीं बोलते राहुल

Why Rahul does not speak the truth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में आवाजों पर पहरा

In Pakistan voices are guarded
  • गुरुवार, 12 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top