आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजनीतिक दलों की जमीन

अरुण नेहरू

Updated Fri, 12 Oct 2012 09:32 PM IST
Ground of political parties
भारतीय राजनीति की समस्या यह है कि अंडों के फूटने से पहले ही हम मुरगियों का बंटवारा करने लगते हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बारे में मेरा बुनियादी आकलन है कि कांग्रेस 150 सीटों पर जीतेगी और भाजपा भी इतनी ही सीटों पर सिमटी रहेगी। तीसरी ताकत या तीसरे मोरचे या फेडरल मोरचे को 240 सीटें मिलेंगी। इन 240 सीटों में से करीब सौ सीटें विभिन्न क्षेत्रीय ताकतों के हिस्से में जाएंगी, जिनका राजनीतिक हित इसी में है कि वे किसी भी गठबंधन से अलग रहें और सत्ताधारी दल को मुद्दों के आधार पर समर्थन करें। यह देखना दिलचस्प होगा कि राजनीतिक घटनाक्रम इन आंकड़ों में कितना फेरबदल करते हैं।
पिछले दो हफ्तों से हम सरकार पर कई राजनीतिक हमले होते हुए देख रहे हैं, पर राजनीतिक दलों की निष्क्रियता से सरकार पर कोई आंच नहीं आई है। वास्तव में यह तनाव जिद्दी लोगों की भीड़ द्वारा पैदा किया गया है, जो कुछ खास चीजों से परे कुछ भी नहीं सोच सकते। राजनीति में कई बातें कही जाती हैं, पर राजनीतिक मर्यादा का खयाल भी रखा जाता है। सुखद है कि राजनीतिक दलों ने अपनी खोई हुई जमीन हासिल कर ली है और लगता नहीं कि वे भविष्य में इसे फिर गंवाएंगे। पिछले दिनों हमने अन्ना हजारे को अलग-थलग पड़ते, टीम अन्ना को कई गुटों में विभाजित होते और अनिश्चित भविष्य का सामना करते देखा है।

कांग्रेस में शीर्ष स्तर पर कोई विवाद नहीं है। सोनिया गांधी की पकड़ मजबूत है और पार्टी एवं सरकार में मध्यावधि का फेरबदल होने वाला है। राज्यों में कांग्रेस विवादों से जूझ रही है। उसे राजस्थान में महत्वपूर्ण फैसले लेने हैं, जहां भाजपा फायदा उठाती दिख रही है। आंध्र प्रदेश में भी कांग्रेस को एक बड़ा फैसला लेना है। छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा में पार्टी पुराने तेवर में लौटती दिख रही है। और जैसे ही उत्तर प्रदेश में सपा एवं बसपा के बीच लड़ाई तेज होगी, पार्टी वहां अच्छी तरह से यथास्थिति बनाए रख सकती है।

केंद्र में कांग्रेस ने आर्थिक सुधार की प्रक्रिया शुरू की, जिससे सहयोगी दलों में मतभेद हैं। पर चीजें नकारात्मकता से थोड़ी सकारात्मकता की ओर बढ़ी हैं, क्योंकि केंद्र की निर्णय लेने की क्षमता लौट आई है। पी चिदंबरम द्वारा वित्त मंत्री का पदभार संभालना और आर्थिक सलाहकारों की टीम का अपने काम में सक्रिय होना अच्छा संकेत है। जाहिर है, सरकार के प्रति लोगों का नजरिया ज्यादा दिनों तक नकारात्मक नहीं रहेगा।

भाजपा ने बिहार और कर्नाटक, दोनों राज्यों में गंभीर विवादों को जन्म दिया है, जो न केवल लोकसभा चुनाव में उसके प्रदर्शन पर असर डाल सकता है, बल्कि इससे उसका बड़ा सहयोगी जद(यू) भी प्रभावित होगा। गुजरात के मुख्यमंत्री तीसरे कार्यकाल के लिए चुनाव प्रचार में जुटे हैं। वह केवल गुजरात का चुनाव जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि 2014 के चुनाव के लिए भाजपा में प्रधानमंत्री पद की दावेदारी के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। राजनीतिक हमले तो ठीक हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमले से परहेज करना ही बेहतर है, क्योंकि इसका नकारात्मक असर हो सकता है।

नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष की विदेश यात्रा और चिकित्सा पर 1,888 करोड़ खर्च करने का आरोप लगाकर यही किया है। तथ्य बताते हैं कि मोदी ने गलतबयानी की। ताजा आकलन के अनुसार नरेंद्र मोदी गुजरात चुनाव जीत जाएंगे, लेकिन इस बार सीटों की संख्या घट सकती है, क्योंकि जनजातीय इलाकों में कुछ लोग उनके खिलाफ हैं और कुछ लोगों को भाजपा के भीतर ही उनकी स्वीकार्यता पर संदेह है। लेकिन मौजूदा और भावी सहयोगियों पर इसका विनाशकारी असर हो सकता है, क्योंकि वोट बैंक की राजनीति में धर्मनिरपेक्षता और गैर धर्मनिरपेक्षता का मुद्दा प्रासंगिक है।

बिहार में नीतीश कुमार के साथ उनका विवाद जगजाहिर है। उधर तीसरा मोरचा भविष्य के लिए योजनाएं बना रहे लोगों को एक सुरक्षित मंच प्रदान करता है। पर जैसा कि मैंने पहले लिखा था, अनिश्चितता की स्थिति में अभी भला क्यों कोई किसी तरफ जाएगा। इसके अलावा, कर्नाटक में भाजपा संकट में है। बीएस येदियुरप्पा इस वर्ष के अंत तक कोई फैसला कर सकते हैं।  

मतदाताओं के रुझान में बदलाव को जानने के लिए हिमाचल और गुजरात के चुनाव परिणामों को देखना होगा। हमें याद रखना चाहिए कि 2004 के बाद सत्ताविरोधी रुझान उन लोगों पर लागू नहीं हुआ, जिन्होंने राज्य में व्यावहारिक प्रशासन का प्रदर्शन किया। जहां तक हिमाचल की बात है, तो वहां लोगों में थोड़ी-सी नकारात्मक प्रतिक्रिया है, जिससे कांटे की टक्कर होगी। वैसे दोनों राज्यों के चुनाव में एक-एक सीट के लिए कड़ी टक्कर होगी, जो कांग्रेस एवं भाजपा, दोनों के लिए बेहतर है।

अरविंद केजरीवाल ने एक नई पार्टी की घोषणा की है और बिजली एवं पानी के बिलों को जलाने के अलावा उन्होंने मार्च, 2011 में इकोनोमिक टाइम्स में प्रकाशित आलेख के आधार पर रॉबर्ट वाड्रा के लिए खिलाफ सुविचारित हमला किया है। यह मामला ज्यादा नहीं बढ़ेगा, क्योंकि उसमें कुछ भी कानून से बाहर नहीं था। हैरानी की बात है कि शांति भूषण और प्रशांत भूषण, जो जनहित याचिकाओं के विशेषज्ञ हैं, कानूनी विकल्प क्यों नहीं अपनाते। लगता है, उनकी मंशा मीडिया ट्रायल के जरिये अपनी पार्टी को स्थापित करना है।
  • कैसा लगा
Comments

Browse By Tags

artivele arun nehru

स्पॉटलाइट

लव लाइफ होगी और भी मजेदार, रोज खाएं ये चीज

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

जूते, पर्स या जूलरी ही नहीं, फोन के कवर भी बन गए हैं फैशन एक्सेसरीज

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

BSF में पायलट और इंजीनियर समेत 47 पदों पर वैकेंसी, 67 हजार तक सैलरी

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

इन तीन चीजों से 5 मिनट में चमकने लगेगा चेहरा

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

नवरात्रि 2017: इस बार वार्डरोब में नारंगी रंग को करें शामिल, दीपिका से लें इंसपिरेशन

  • रविवार, 24 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

निर्यात बन सकता है विकास का इंजन

Export can become engine of development
  • शनिवार, 23 सितंबर 2017
  • +

द. एशिया में भारत की नई भागीदारी

India's new partnership in South Asia
  • सोमवार, 18 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

बढ़ती बेरोजगारी है बड़ी चुनौती

Growing Unemployment Is Big Challenge
  • सोमवार, 18 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!