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जी, सरकार है तो गिरेगी ही

सहीराम

Updated Fri, 14 Sep 2012 03:01 PM IST
government will fall
जी, चिंता की कोई बात नहीं। हमारे यहां कोई नहीं गिरा रहा सरकार। अलबत्ता पिछले दिनों अपने पड़ोस यानी पाकिस्तान में एक और प्रधानमंत्री की बलि जरूर ले ली गई। पाकिस्तान में इस तरह का काम होता है, तो शक सबसे पहले वहां की फौज पर ही जाता है कि जरूर उसी ने गिराई होगी। फौज न हुई जी, कच्छा-बनियान गिरोह हो गया कि डाका पड़ा है, तो जरूर उसी का काम होगा। सचमुच पाकिस्तान में फौज ही बदनाम है, सरकार गिराने के लिए। सब जानते हैं कि उसके रहते किसी और की कहां हिम्मत होगी। किसी और को मिलेगा भी क्या सरकार गिराकर! सरकार खड़ी रहे, तो कुछ उम्मीद भी रहती है मिलने की। पर जी, वहां खड़ी सरकार भी कांपती ही रहती है। पता नहीं, फौज कब गिरा दे!
मौका चाहे हो न हो, अलबत्ता दस्तूर जरूर है कि पाकिस्तान में फौज ही गिराएगी सरकार। अभी-अभी मुशर्रफ साहब ने फिर चेतावनी दे दी है कि तख्तापलट हो सकता है। खुद बाहर बैठे हैं। पाकिस्तान आ भी नहीं सकते, पर तख्तापलट की चेतावनी जरूर दे रहे हैं। अभी बहुत वक्त नहीं बीता, जब लग रहा था कि कयानी साहब गिलानी साहब का तख्ता पलट देंगे। कयानी साहब को भी लग रहा होगा कि यार, तख्ता ही नहीं पलटा, तो फिर पाकिस्तान का जनरल बनकर क्या किया। पाकिस्तानी जनरल के कुल मिलाकर दो-तीन ही तो काम होते हैं-या तो भारत से युद्ध लड़े, युद्ध न लड़े, तो आईएसआई के साथ मिलकर आतंकवादी और घुसपैठिये तैयार करे और उन्हें भारत भेजे या फिर तख्ता पलटे।

पर जी, इस बार कमाल यह हुआ है कि फौज ने प्रधानमंत्री को नहीं हटाया। जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी, उसी ने हटाया। वहां के सुप्रीम कोर्ट ने गिलानी साहब को चलता कर दिया। अदालत की अवमानना की यही सजा थी। फिर जिन राष्ट्रपति महोदय के खिलाफ कार्रवाई न करने की सजा गिलानी को दी गई, उन्हीं को अदालत ने यह काम सौंपा कि वह गिलानी का जाना और नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति सुनिश्चित करें। जरदारी साहब ने मख्दूम शहाबुद्दीन को प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश की, तो अदालत ने उन्हें प्रधानमंत्री बनने से पहले ही सजा सुना दी। सो राजा परवेज अशरफ प्रधानमंत्री बने। लेकिन अब उन पर भी अदालत की तलवार लटक रही है। पाकिस्तान की क्या किस्मत है! पहले एक फौज ही थी डराने के लिए, अब अदालत भी है। कहीं फौज को यह तो नहीं लग रहा कि मौका चूक गए।
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