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गुस्सा होना अच्छा है

सहीराम

Updated Tue, 25 Dec 2012 09:07 PM IST
good to be angry
जी, यह नुस्खा किसी डॉक्टर ने नहीं बताया। फिर भी लगता है कि अच्छी सेहत के लिए कभी-कभी गुस्सा कर लेना अच्छा होता है। जैसे पिछले दिनों दिल्ली में हुई बलात्कार की बर्बर घटना के खिलाफ खुद दिल्ली कर रही है। दिल्ली में लोग रोड रेज में तो खूब गुस्सा करते हैं। उसके लिए वे बेसबाल के बल्ले, लोहे की रॉड, हॉकी स्टिक वगैरह के साथ पूरी तरह तैयार रहते हैं। बल्कि कट्टा, पिस्तौल और बंदूक तक रखते हैं। लेकिन बलात्कार पर वे गुस्सा नहीं करते।
दिल्ली में लोग अपने पड़ोसी से तो खूब गुस्सा करते हैं- कचरा डालने से लेकर गाड़ी खड़ी करने को लेकर तक। वे अपने कुत्ते के लिए लड़ पड़ते हैं। मारपीट और मुकदमेबाजी तक कर लेते हैं। पर लड़कियों के साथ होनेवाली छेड़छाड़ पर गुस्सा नहीं करते। दिल्ली में लोग किसी भी बात पर आग-बबूला हो सकते हैं- पनवाड़ी सिगरेट न पिलाए तो गुस्सा, ढाबेवाला खाना देने में देरी कर दे, तो गुस्सा, यहां तक कि कोई उधार न दे, तो भी गुस्सा हो जाते हैं। पर महिलाओं के साथ होनेवाली बदतमीजी पर गुस्सा नहीं होते। बल्कि बसों और मेट्रो में वे महिलाओं को अपना ऐसा प्रतिद्वंद्वी समझते हैं, जो उनकी सीट पर कब्जा करके बैठ सकती हैं। इसलिए वे सीटों की तरफ इतनी तेजी से दौड़ते हैं कि ओलंपिक में दौड़ें, तो मेडल ले आएं।

अच्छी बात यही रही कि बलात्कार की इस घटना पर वे गुस्सा हुए। उन्होंने जंतर-मंतर पर, पुलिस मुख्यालय पर, मुख्यमंत्री के आवास पर, इंडिया गेट पर, मेट्रो स्टेशनों पर और पूरी दिल्ली में रोषपूर्ण प्रदर्शन किए, रास्ते रोके और धरने दिए। उन्होंने पुलिस अक्षमता पर सवाल किए, सरकार की नाकामी पर उंगली उठाई, नारे बुलंद किए, मोमबत्तियां जलाईं, मौन साधा और पुलिस तथा नेताओं को शर्मसार किया।

वे हर रोज किसी न किसी मासूम बच्ची के अपरहण पर या उसके साथ होनेवाली बेहयाई या बलात्कार पर तो गुस्सा नहीं होते, पर इस घटना पर वे खूब गुस्सा हुए। पता नहीं, वे उन करीबी रिश्तेदारों, पड़ोसियों के साथ कैसा व्यवहार करते होंगे, जो इन मासूमों के गुनहगार होते हैं, पर वे इन दरिंदों पर खूब गुस्सा हुए। वे पूर्वोत्तर की लड़कियों के साथ होनेवाली अमानवीयता पर तो गुस्सा नहीं होते, पर इस अमानवीयता पर खूब गुस्सा हुए। अच्छा है। पर कभी-कभी वे इन छोटी-छोटी बातों पर भी गुस्सा हो लें, जिन पर वे कभी गुस्सा नहीं होते, तो शहर की सेहत के लिए बहुत अच्छा ही रहे
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