आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

किसान हितों से समझौता नहीं

विजय गुप्ता

Updated Fri, 28 Dec 2012 09:50 PM IST
farmer interests are not compromised
लोकसभा में पिछले दिनों पेश हुए भूमि अधिग्रहण विधेयक के प्रावधानों में हुए डेढ़ सौ से ज्यादा बदलाव के बाद उद्योग जगत भले ही खुश हो, लेकिन किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं। उनकी चिंता यह है कि नया कानून बनने के बाद उनकी जमीन कितनी सुरक्षित रह पाएगी। इन मुद्दों पर ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से विजय गुप्ता ने बातचीत की -

- उद्योग जगत के दबाव में किए गए बदलाव के बाद यह आशंका बन गई है कि भूमि अधिग्रहण विधेयक, जिस उद्देश्य के लिए तैयार किया गया था, उससे दूर हो गया है।
नहीं, ऐसा नहीं है। इस विधेयक का मसौदा बिलकुल खरे सोने जैसा ही है। जिस तरह से कसौटी पर कसने के बाद ही सोने की शुद्धता का पता चलता है, उसी तरह से यह विधेयक भी इन दिनों विभिन्न मंत्रालयों, उद्योग, किसान, सामाजिक संगठनों के अलावा स्थायी समिति के सुझावों के बाद किए गए सुधार के बाद शुद्ध सोने की तरह हो गया है। खास बात यह है कि विधेयक में किसानों और उन पर आश्रितों के हितों से किसी तरह का समझौता नहीं किया गया है, बल्कि मुआवजे के प्रावधानों को और मजबूत किया गया है।

- पिछले वर्ष संसद में पेश किए गए भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना विधेयक, 2011 के मुकाबले संसद में पेश किए गए मौजूदा विधेयक में क्या फर्क है?
मूल विधेयक जिस उद्देश्य के लिए तैयार किया गया था, उसमें जरा भी परिवर्तन नहीं किया गया है। बल्कि विभिन्न संगठनों, मंत्रालयों, स्थायी समिति के सुझावों के अनुरूप उसके प्रावधानों में मामूली परिवर्तन करके कहीं थोड़ा सख्त, तो कहीं थोड़ा नरम किया गया है।

- पिछले विधेयक की तुलना में शीत सत्र के दौरान पेश किए गए भूमि अधिग्रहण विधेयक में कितने बदलाव किए गए हैं?
पिछले वर्ष लोकसभा में पेश किए गए विधेयक के मसौदे की तुलना में शीतसत्र में लोकसभा में पेश विधेयक में कुल 153 बदलाव किए गए हैं। इसमें 26 अति महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। इसमें 12 बदलाव संसद की स्थायी समिति के सुझावों के आधार पर किए गए हैं, जबकि शेष 14 बदलावों में मंत्री समूह की सिफारिशों को शामिल किया गया है। इसके अलावा सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं, राज्यों और किसानों के सुझावों और सिफारिशों के आधार पर 97 छोटे-छोटे संशोधन किए गए हैं।

- सभी के सुझावों और सिफारिशों को तरजीह देने के बावजूद सरकार इसे लोकसभा से पारित कराने में कामयाब क्यों नहीं हुई?
देश और भू-स्वामियों के लिए तैयार किए गए इतने महत्वपूर्ण कानून को सरकार जल्दबाजी में नहीं लाना चाहती। सरकार का कभी यह इरादा नहीं रहा कि इस विधेयक को आनन-फानन में लाया जाए। हालांकि पिछले वर्ष विधेयक तैयार करते समय सरकार का जरूर यह इरादा था कि इस कानून को जल्द से जल्द लागू किया जाए। लेकिन अब सरकार ऐसा नहीं सोचती। जबकि लोकसभा चाहती है कि 150 वर्ष पुराने कानून की जगह लाए जा रहे नए कानून का समग्रता में अध्ययन करने के लिए समय चाहिए। इसलिए इसे लोकसभा में पेश कर दिया गया है और आगामी बजट सत्र के दौरान इस पर चर्चा की जाएगी।

- क्या अगले वर्ष देश को नया भूमि अधिग्रहण कानून मिल पाएगा?

बिल्कुल। सौ फीसदी संभावना यही है कि बजट सत्र में भूमि अधिग्रहण विधेयक को व्यापक चर्चा के बाद मंजूरी मिल जाएगी। ऐसा इसलिए भी कहा जा सकता है, क्योंकि नए मसौदे में सभी की सिफारिशों को तरजीह दी गई है। यदि किसी नए सुझाव को शामिल करने की जरूरत पड़ी, तो उस पर भी अमल किया जाएगा, ताकि देश में अगले वर्ष नया भूमि अधिग्रहण कानून लागू हो सके।

  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

'बाहुबली' जैसा आदर्श पति बनने की है चाहत, तो अपनाएं ये 5 आदतें

  • सोमवार, 29 मई 2017
  • +

रमजान 2017: सेहरी में खाएंगे ये 5 चीजें तो दिनभर नहीं लगेगी भूख

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

हर दर्द का मर्ज है आसानी से मिलने वाला ये तेल, जानें इसके फायदे

  • सोमवार, 29 मई 2017
  • +

एक ही फिल्‍म कर गुमनाम हुई ये 'गांव की छोरी', अब विदेश में खड़ा किया अरबों का साम्राज्य

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

रमजान 2017ः पवित्र माह का पहला रोजा आज, जानें इससे जुड़े सख्त नियम

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

Most Read

सामरिक आत्मनिर्भरता की ओर

Toward strategic self-reliance
  • शनिवार, 27 मई 2017
  • +

पत्थरबाज और मेजर गोगोई

Stone-pelter and Mejor Gogoi
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

ये तय करेंगे लोकसभा चुनाव के नतीजे

Four Implications Leading Up to India’s 2019 General Election
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

दूसरी पारी में चुनौती अमेरिका से भी

Challenge in second term from US too
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +

विपक्षी एकता की परीक्षा

Test of Unity of Oppositions
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

नक्सलवाद: पचास साल और आगे?

Naxalism: 50 years and henceforth?
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top