आपका शहर Close

चाहे कोई गालियां हजार दे

कंचन भट्टाचार्य

Updated Mon, 20 Jan 2014 03:04 AM IST
Encourage your daughter
जब हम पढ़ाई कर रहे थे, उस समय का समाज आज के मुकाबले कम जागरूक था। तब अमूमन लड़कियां अपने पैरों पर खड़े होने के लिए नहीं, बल्कि शादी की तैयारी के लिए पढ़ती थीं। घर वालों की भी लड़कियों के बारे में ऐसी ही सोच थी। लेकिन हमारे घर में ऐसी सोच नहीं थी। मेरी मां में गजब का साहस था, वह पढ़ाई के मामले में किसी की नहीं सुनती थीं। उन्होंने खुद ग्रेजुएट तक की पढ़ाई की थी। उनके पास ऐसे-ऐसे तर्क होते थे कि सामने वाला चुप हो जाता था। मैं खुद स्कूल और कॉलेज में डिबेट में हिस्सा लेती थी। मां भी कभी-कभी मुझे सुनने आ जाया करती थीं।
ऐसी ही एक स्पर्धा में वह मुझे सुनने आई थीं। वहां उन्होंने किसी प्रतियोगी को यह कहते हुए सुना कि, हाथ की रेखाएं बदलने के लिए हाथों को घिसना पड़ता है। मां ने उसे अपनी जिंदगी का सार बना लिया। हम दो बहन और एक भाई हैं। मां ने हम तीनों की बराबरी के माहौल में परवरिश की। ऐसा साहस हरेक माता-पिता में होना चाहिए, तभी स्थिति बदलेगी। व्यक्तिगत अनुभव से कह सकती हूं कि अगर माता-पिता बिना किसी भेदभाव के बच्चों की परवरिश करते हैं, तो बच्चे चुनौतीपूर्ण स्थितियों में भी कभी नहीं घबराते और हमेशा बेहतर करते हैं। मेरी मां हर वक्त मेरी प्रेरणा रही हैं।

एक बार जमीन पर कब्जा करने के इरादे से मेरे पिता पर कुछ लोगों ने कचहरी में खुरपी जैसे हथियार से हमला कर दिया था। उन्हें काफी दिन तक अस्पताल में भरती रहना पड़ा। तब मैं स्कूल में पढ़ रही थी। आरोपियों के खिलाफ मुकदमा कायम करने के लिए मुझे दर-दर जाना पड़ा और मां अमृतसर के अस्पताल में पिता की देखभाल करती रहीं। इस हमले के बाद हम काफी मुश्किल में पड़ गए। वह किल्लत का दौर था। हमारी जमीन चली गई थी।

ऐसे हालात में बाद में मैं कॉलेज की पढ़ाई के लिए दिल्ली आ गई। कई बार मां ने अपने गहने बेचकर पढ़ाई का खर्च उठाने की कोशिश की। एक बार मुझे जब इसके बारे में पता चला, तो मैंने मना किया। पर मां ने कहा, सोना तो बाद में भी आ जाएगा, पहले पढ़ाई जरूरी है। उन्हीं दिनों मैंने अपने पिता को न्याय दिलाने के लिए प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलने की कोशिश की। तब श्रीमती इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। उनके घर पर जनता से मिलने के लिए दरबार लगता था। वहां जाकर मैंने श्रीमती गांधी को अर्जी दी। बाद में प्रधानमंत्री की तरफ से पंजाब सरकार को एक चिट्ठी भेजी गई। कुछ दिन बाद चंडीगढ़ के चीफ सेक्रेटरी ने मुझे मिलने के लिए बुलवाया। मैंने वहां उस वक्त के गवर्नर से भी मुलाकात की। तब जाकर मामला कायम हो सका और मेरे पिता पर हमला करने वाले भाड़े के हमलावरों को गिरफ्तार किया गया। लेकिन वे लोग नहीं पकड़े जा सके, जिन्होंने उन पर हमला करवाया था। इसी दौरान मुझे पुलिस को करीब से देखने का मौका मिला।

असल में हमारे हालात हमेशा ऐसे नहीं थे। मेरे दादा ने दूसरी शादी कर ली थी और हमें घर से बाहर निकाल दिया था। हम अपने अस्तित्व के जूझ रहे थे, हम पर मुश्किलें आई थीं। बाहर के माहौल से हमारा बहुत ताल्लुक नहीं था। तब हम काफी छोटे थे। हमें शादी वगरैह में जाने में एक तरह की हिचक होती थी, क्योंकि हमारे पास एकाध ही अच्छी फ्रॉक होती थी।

हम अपनी समस्याओं से जूझ रहे थे और मां हमारा संबल बनी रहीं। वह गुजरावालां से एक अच्छे घर से आई थीं। लेकिन हालात बदलने पर उन्होंने कभी शिकायत नहीं की। वह बहुत मेहनती थीं। घर का सारा काम करती थीं। ठंड में सुबह वह जुराबें पहनकर कोयला तोड़ती थीं, ताकि अंगीठी जलाई जा सके। उन्हीं दिनों मां एक गीत गाती थीं, चाहे कोई गालियां हजार दे, मस्त राम बन के जिंदगी के दिन गुजार दे...। हम सब उनका साथ देते थे। पिता जी भाई को कंधे पर बिठा लेते थे और हम दोनों बहनें पीछे-पीछे कदमताल करती उनके साथ गाने लगती थीं।

दिल्ली में पढ़ाई पूरी करने के बाद जब मेरा चयन सिविल सर्विसेज में हो गया, तो मुझे पुलिस में जाने का विकल्प मिला। तब मुझे लगा कि मैं दूसरों को न्याय दिला पाऊंगी। आज मैं देखती हूं, तो महसूस होता है कि महिलाओं की स्थिति काफी बदली है। बैंकों और आईटी सेक्टर से लेकर संसद तक महिलाओं की कामयाबी की कहानियां दिखाई देती हैं। मगर यह सब व्यक्तिगत स्तर पर मिली कामयाबी की कहानियां हैं।

महिलाएं तरक्की जरूर कर रही हैं, मगर उन्हें कंज्यूमेरिज्म से भी जोड़ दिया गया है। महिलाओं को ऑबजेक्ट की तरह देखा जाता है। जब तक महिलाओं को बराबरी का दर्जा नहीं मिलेगा, यह सब होता रहेगा। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध इसी गैरबराबरी का नतीजा हैं। इसे बदलने में महिलाओं की, खासतौर से मां की, बड़ी भूमिका हो सकती है। हर मां को खुद में और अपनी बेटी में इस हालात को बदलने का जज्बा पैदा करना चाहिए। बेटियों को सही माहौल मिले, तो वे साबित कर सकती हैं कि वे भी किसी से पीछे नहीं हैं।
Comments

स्पॉटलाइट

Special: पहले से तय है बिग बॉस की स्क्रिप्ट, सामने आए 3 फाइनिस्ट के नाम लेकिन जीतेगा कोई चौथा

  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

एक रिकॉर्ड तोड़ने जा रही है 'रेस 3', सलमान बिग बॉस में करवाएंगे बॉबी देओल की एंट्री

  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

मिलिये अध्ययन सुमन की नई गर्लफ्रेंड से, बताया कंगना रनौत से रिश्ते का सच

  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

मां ने बेटी को प्रेग्नेंसी टेस्ट करते पकड़ा, उसके बाद जो हुआ वो इस वीडियो में देखें

  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

Bigg Boss के घर में हिना खान ने खोला ऐसा राज, जानकर रह जाएंगे सन्न

  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

Most Read

पाकिस्तान का पांचवां मौसम

Pakistan's fifth season
  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

मोदी तय करेंगे गुजरात की दिशा

Modi will decide Gujarat's direction
  • बुधवार, 22 नवंबर 2017
  • +

स्त्री-विरोधी सोच और पद्मावती

Anti-feminine thinking and Padmavati
  • गुरुवार, 23 नवंबर 2017
  • +

सामाजिक पूंजी के हिस्सेदार

Shareholders of social capital
  • शुक्रवार, 24 नवंबर 2017
  • +

तकनीक से पस्त होती दुनिया

How Evil Is Tech?
  • गुरुवार, 23 नवंबर 2017
  • +

सेना को मिले ज्यादा स्वतंत्रता

More independence for army
  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!