आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

जीन-नक्शों से रोगों की जड़ों की तलाश

मुकुल व्यास

Updated Sat, 03 Nov 2012 11:59 PM IST
diseases search from jean maps
वैज्ञानिकों को दुनिया के विभिन्न महाद्वीपों में रहने वाले 1,000 से अधिक लोगों के जीन-समूहों को ‘पढ़ने’ में सफलता मिल गई है। मनुष्यों में पाई जाने वाली आनुवांशिक भिन्नताओं का यह अब तक का सबसे बड़ा और विस्तृत विश्लेषण है। इस विराट संसाधन से मेडिकल रिसर्चरों को दुनिया की विभिन्न आबादियों में फैली बीमारियों की अनुवांशिक जड़ों को पहचानने में मदद मिलेगी।
हाल ही में अमेरिका में वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन और अन्य संस्थानों के करीब 200 वैज्ञानिकों ने ‘1000 जीनोम्स प्रोजेक्ट’ के अंतर्गत एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में रहने वाले 14 जातीय समूहों की डीएनए भिन्नता का विस्तृत ब्यौरा तैयार किया है। उनकी योजना 26 आबादियों से संबद्ध 2,500 लोगों के जीन समूहों के विश्लेषण की है।

वैज्ञानिकों का ख्याल है कि प्रत्येक व्यक्ति के डीएनए में सैकड़ों दुर्लभ भिन्नताएं होती हैं, जिनका संबंध रोगों से हो सकता है। अब नया विश्लेषण उपलब्ध होने के बाद वैज्ञानिक यह पता लगा सकते हैं कि विभिन्न जातीय समूहों में डीएनए की कौन-सी भिन्नता रोग का कारण बनती है। अनुवंाशिक स्तर पर दो व्यक्तियों में 99 प्रतिशत से ज्यादा समानता होती है, लेकिन आबादियों में दुर्लभ किस्म की डीएनए भिन्नताएं भी होती हैं। प्रत्येक 100 व्यक्तियों में से एक व्यक्ति में यह भिन्नता होती है। यह माना जाता है कि इन भिन्नताओं की वजह से ही दुर्लभ किस्म के असाध्य रोग तथा हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर जैसे रोग उत्पन्न होते हैं।

इन दुर्लभ भिन्नताओं से इस बात पर भी रोशनी डाली जा सकती है कि कुछ लोगों के मामले में दवाएं क्यों नहीं असर करतीं और कुछ लोगों के मामले में मिचली, उल्टी ,अनिद्रा और हृदय रोग जैसे साइडइफेक्ट क्यों होते हैं। विभिन्न आबादियों में दुर्लभ भिन्नताओं की पहचान करना जीनोम प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य है। प्रारंभिक चरण में रिसर्चरों ने पता लगाया कि बहुत ही दुर्लभ किस्म की भिन्नताएं हर आबादी में अलग-अलग हैं।

मनुष्य के विकास क्रम के इतिहास को देखें, तो ये भिन्नताएं बहुत पुरानी नहीं हैं। आबादी के एक ही ग्रुप से यूरोप, अफ्रीका, एशिया और अमेरिका में आबादियों के विस्तार के बाद ही ये भिन्नताएं प्रकट हुई हैं। इस प्रोजेक्ट से जुड़े प्रमुख वैज्ञानिक और वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के जीनोम इंस्टीट्यूट के निदेशक रिचर्ड विल्सन का कहना है कि इस अध्ययन से व्यक्तिगत जीनोम समूहों को परिभाषित करने के हमारे तरीके में सुधार होगा। मसलन यदि हम मैक्सिकन-अमेरिकी और जापानी-अमेरिकी लोगों में कैंसर का अध्ययन करना चाहते हैं, तो ऐसा हम उनके विविध भौगोलिक इतिहास और पूर्वज इतिहास पर आधारित अनुवांशिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में कर सकते हैं।

मानव डीएनए की संपूर्ण विविधता का नक्शा तैयार करने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस पांच-वर्षीय प्रोजेक्ट पर करीब 12 करोड़ डॉलर खर्च हुए हैं। इस अंतरराष्ट्रीय प्रयास में वैज्ञानिकों के अलावा कंपनियां भी हिस्सा ले रही हैं। इस प्रोजेक्ट के पहले नतीजे 2010 में जारी किए गए थे। तब 179 लोगों के जीन-समूहों का ब्यौरा प्रकाशित किया गया था। इससे एक बात यह भी साबित हुई कि जीनों के विश्लेषण के लिए अपनाई गई टेक्नोलॉजी पिछली विधियों से ज्यादा कारगर है।

पहला मानव जीन नक्शा 2003 में प्रकाशित किया गया था। इस नक्शे को तैयार करने में करीब दस साल लग गए थे। लेकिन नए जीनोम प्रोजेक्ट ने जीनों को सिलसिलेवार करने का काम एक वर्ष के अंदर ही पूरा कर लिया। जीनो को सिलसिलेवार करने वाली मशीनों की रफ्तार बढ़ रही है और उनकी लागत भी घट रही है। आजकल कुछ दिनों के अंदर ही एक जीन-समूह का विश्लेषण हो जाता है। इस जीनोम प्रोजेक्ट द्वारा उत्पन्न विशाल डेटा को रिकॉर्ड करने में हार्ड ड्राइव पर 180  टेराबाइट्स की जगह खर्च करनी पड़ी। इससे करीब 40,000 डीवीडी भरी जा सकती हैं।

जीनोम प्रोजेक्ट के अगले चरण में 1,500 लोगों के जीनों को सिलसिलेवार किया जाएगा। अभी प्रोजेक्ट द्वारा एकत्र डेटा में बहुत सी खामियां है। जैसे, इसमें भारतीय उपमहाद्वीप का कोई आंकड़ा नहीं है। वैज्ञानिकों को अफ्रीका से भी ज्यादा नमूने एकत्र करने पड़ेंगे। उम्मीद है कि अगले चरण में नई जगहों से अधिक से अधिक नमूने एकत्र किए जाएंगे। जो भी हो, मानव जीन समूह की भौगोलिक विविधता को समझने के लिए किए जा रहे इस गहन प्रयास का लाभ वैज्ञानिकों के अलावा दुनिया भर के मरीजों को भी मिलेगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

यहां हो रहा है बकरियों का स्वंयवर, कारण जान कर सोच में पड़ जाएंगे!

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

फर्टिलिटी को लेकर क्या क्या सोच लेते हैं लोग, जानिए सच्चाई

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

इस एक्टर ने पहन ली ऐसी ड्रेस, लोगों ने कहा- 'ये तो कंडोम है'

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

क्या ये गाने आपको पुराने दौर में ले जाते हैं, सुनकर कीजिए तय

  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

उपन्यासकार वेद प्रकाश शर्मा की ये कहानी आपके दिल को छू जाएगी

  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

Most Read

नोटबंदी के जिक्र से परहेज क्यों

Why avoiding mention of Notbandi
  • शुक्रवार, 17 फरवरी 2017
  • +

वंशवादी राजनीति और शशिकला

Dynastic politics and Shashikala
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +

मणिपुर का भविष्य तय करेंगे नगा

Naga will decide Manipur future
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

पड़ोस में आईएस, भारत को खतरा

IS in neighbor, India threat
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

भारत-बांग्लादेश रिश्ते की चुनौतियां

India-Bangladesh Relationship Challenges
  • बुधवार, 15 फरवरी 2017
  • +

नारों के बीच, नीति के बगैर

Amidst slogan cries, without policy
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top