आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

तेलंगाना को राह दिखाता दार्जिलिंग

कृपाशंकर चौबे

Updated Thu, 13 Sep 2012 05:07 PM IST
Darjeeling showing path to telangana
गत चार अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तथा राज्यपाल एमके नारायणन की मौजूदगी में बहुप्रतीक्षित गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) का गठन हो जाने के बाद पहाड़ में उल्लास का माहौल है। लंबे समय से अलग गोरखालैंड राज्य की मांग कर रहे पहाड़वासी जीटीए, यानी स्वायत्तशासी प्रशासन से ही संतुष्ट हो गए हैं।
ममता बनर्जी यदि अधिक से अधिक स्वायत्तता देकर अलग गोरखालैंड राज्य की मांग को स्थगित करा सकती हैं, तो यही काम केंद्र तेलंगाना में या उन इलाकों में क्यों नहीं कर सकता, जहां अलग प्रदेश की मांग उठ रही है। विकास में असंतुलन और पिछड़ेपन के कारण ही अलग राज्य की मांग जोर पकड़ती है। उन आंदोलनों से निपटने के लिए बल प्रयोग करके सरकारें परिस्थिति और जटिल बना देती हैं, जबकि समझौते से शांति कायम होने की राह खुलती है। इस तरह के समझौते का एक उदाहरण राजीव-लोगोंवाल समझौता था।

दार्जिलिंग को अलग प्रशासनिक इकाई का दरजा देने की मांग एक शताब्दी से भी ज्यादा पुरानी है। हिलमैंस एसोसिएशन ने 1907 में मिंटो-मोर्ले कमीशन को ज्ञापन देकर दार्जिलिंग को स्वायत्त प्रशासनिक इकाई का दरजा देने की मांग की थी। आजादी के बाद ऑल इंडिया गोरखा लीग ने अलग गोरखालैंड राज्य की मांग जीवित रखी। गोरखा लीग के नेता देवप्रकाश राई दार्जिलिंग के सबसे ताकतवर नेता थे।

उनके निधन के बाद गोरखा लीग निष्प्रभावी हो गया और राई की खाली जगह गोरखा राष्ट्रीय मुक्ति मोरचे के अध्यक्ष सुभाष घीसिंग ने भरी। उन्होंने अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर जंगी आंदोलन चलाया, जिसकी परिणति 1988 में दार्जिलिंग पर्वतीय परिषद् के गठन के रूप में हुई। घीसिंग अलग गोरखालैंड राज्य की मांग से पीछे हटते हुए दो दशकों तक पर्वतीय परिषद् के मुखिया रहे, किंतु पहाड़ का कोई विकास करने में विफल रहे।

उसी दौरान गोरखा जनमुक्ति मोरचा अलग गोरखालैंड की मांग को लेकर अस्तित्व में आया और विमल गुरुंग उसके सबसे शक्तिशाली नेता के रूप में उभरे। उसी गुरुंग को ममता बनर्जी ने पहले जंगी आंदोलन से विरत रहने के लिए राजी कराया, फिर जीटीए का चुनाव लड़ने के लिए उन्हें प्रेरित किया। इस वर्ष जीटीए का दायरा बढ़ाने के लिए गोरखा जनमुक्ति मोरचा पहाड़ में अभियान छेड़े हुए था।

उसके लिए राज्य सरकार ने एक कमेटी बनाई, जिसने पांच नए मौजों को जीटीए में शामिल करने की सिफारिश की, मोरचे ने पिछले महीने उसे मानने से इनकार कर पहाड़ में बंद और हड़ताल की घोषणा की। उस आंदोलन से भी विरत रहने के लिए ममता ने मोरचा नेताओं को राजी कर लिया। अब सरकार उस कमेटी में दिए गए तथ्यों की सत्यता की जांच करा रही है, जिससे गोरखा जनमुक्ति मोरचा संतुष्ट है।

जीटीए का गठन हो जाने के बाद उम्मीद की जाती है कि पहाड़ में विकास का काम नए सिरे से शुरू होगा। विमल गुरुंग अब विकास नहीं हो पाने का बहाना नहीं कर पाएंगे, क्योंकि जीटीए को न सिर्फ भारी बजट दिया गया है, बल्कि विकास कार्यों में अपने हिसाब से खर्च करने की आजादी भी दी गई है। इससे पहाड़ का परिदृश्य बदलेगा और क्षेत्रीय असंतुलन को पाटने में मदद मिलेगी।

दार्जिलिंग का उदाहरण इसलिए भी सराहनीय है कि अलग राज्य की मांग न मानते हुए भी पहाड़ के विकास के लिए दूरगामी फैसला लिया गया है। तेलंगाना हो या विदर्भ, हरित प्रदेश हो या बुंदेलखंड या पूर्वांचल-हमने देखा है कि नए राज्य का गठन समस्या का समाधान नहीं है। आखिरी बार करीब एक दशक पहले जिन तीन नए राज्यों का गठन हुआ था, उनमें से किसी ने भी विकास की नई इबारत नहीं लिखी है।

उलटे वहां भ्रष्टाचार और लूट-खसोट के ही मामले सामने आए हैं। इसलिए नया राज्य बनाने के बजाय स्थानीय इलाकों को स्वायत्तता देकर विकास का काम तो किया ही जा सकता है। क्या उम्मीद करें कि दार्जिलिंग की मिसाल केंद्र सरकार को उन सभी इलाकों को अधिकाधिक स्वायत्तता देते हुए विकास के लिए प्रेरित करेगी, जहां से पिछले काफी समय से अलग राज्य की मांग उठ रही है!
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

लगातार माउस के इस्तेमाल से कलाई में होता है दर्द? ये टिप्स देंगे राहत

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

रोमांस के मामले में चंचल होती हैं इस राशि की लड़कियां, जानिए दूसरी राशियों के बारे में सब कुछ

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

अमृता के एलिमनी मांगने पर बोले सैफ, 'मैं कोई शाहरुख खान नहीं जो पैसे देता रहूं'

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

ऐसा क्या हुआ जो इस हीरोइन ने फिल्म के सेट पर ही दूसरी हीरोइन को जड़ दिया थप्पड़ ?

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

यकीन मानिए, लड़कियां खुद नही जानती अपने ये राज

  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

Most Read

ये तय करेंगे लोकसभा चुनाव के नतीजे

Four Implications Leading Up to India’s 2019 General Election
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

तीन तलाक, सामंजस्य और अदालत

Three divorces, reconciliation and court
  • बुधवार, 17 मई 2017
  • +

विपक्षी एकता की परीक्षा

Test of Unity of Oppositions
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

ऐसे में कैसे पढ़ेंगी बेटियां

How to read daughters in this situations
  • शनिवार, 20 मई 2017
  • +

सरकार की कमी पूरी करते एनजीओ

NGOs Doing government works in pakistan
  • शुक्रवार, 19 मई 2017
  • +

उत्तर प्रदेश का भविष्य

Future of Uttar Pradesh
  • रविवार, 21 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top