आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

कथा / लघुकथाः किताबों के सहारे कट गए पंद्रह साल

Varun Kumar

Varun Kumar

Updated Tue, 14 Aug 2012 05:20 PM IST
Cut through the fifteen years of books
एंटन चेखोव
मशहूर लेखक चेखोव की शर्त नामक कहानी में एक युवा वकील को साहूकार से लगी शर्त के मुताबिक पंद्रह साल कारावास में बिताने थे। युवा ने किताबों के सहारे ही वे पंद्रह वर्ष काट दिए। आखिर कैसे, जानने के लिए पढ़िए उसी कहानी का एक अंशः-

साहूकार ने मेज से कागज उठाया और पढ़ाः `कल बारह बजे मुझे दूसरे लोगों से मिलने-जुलने की आजादी और हक मिल जाएगा। लेकिन यह कमरा छोड़ने और सूरज की रोशनी देखने से पहले मैं आपसे कुछ कहना जरूरी समझता हूं।'
`विशुद्ध अंतःकरण से जैसे भगवान के सामने जो मुझे देखता है, आपसे कहता हूं कि मैं आजादी, जिंदगी और तंदुरुस्ती को तिलांजलि देता हूं और यह सब कुछ आपकी किताबों के मुताबिक संसार की अच्छी चीजों में गिनी जाती हैं।

पंद्रह साल मैंने सांसारिक जिंदगी का बड़ा गहन अध्ययन किया। यह सही है कि मैंने न तो इस दुनिया को और न ही लोगों को देखा, पर आपकी किताबों में मैंने सुगंधित वाइन पी, गाना गाया, जंगल में हिरन और जंगली सुअरों का शिकार किया और औरतों से प्यार किया...। आपके प्रतिभाशाली कवियों के जादू द्वारा चित्रित बादलों जैसी पारलौकिक सुंदरता रात में मुझसे मिलने आई और मेरे कानों में अद्भुत कहानियां फुसफुसा गई, जिसने मेरे दिलोदिमाग को झंझोड़ कर रख दिया।

आपकी किताबों में मैं इलबर्ज और मौंट ब्लांक की चोटियों पर चढ़ा और वहां से मैंने सूर्योदय देखा और शाम ढलते-ढलते देखा उसके सुनहरे किरमिजी रंग को आकाश, सागर और पहाड़ों की चोटियों पर बिखरते। मैंने वहां से सिर के ऊपर चमकते देखा गरजते बादलों को चीरती बिजली, मैंने देखा हरे-भरे जंगल, खेत, नदियां, झीलें और शहर।

सायरन की आवाज सुनी और सुनी चरवाहे की बंसी की तान। मैंने मनोहर अपदूतों के पंखों को छुआ, जो उड़कर मेरे पास आए ईश्वर के बारे में बात करने...। आपकी किताबों में मैंने नरक में छलांग लगाई, चमत्कार किया, हत्याएं की, शहरों को आग लगाई, नए धर्मों का प्रचार किया और सारी दुनिया जीत ली...। आपकी किताबों ने मुझे विवेक दिया। वह सबकुछ जिसे मनुष्य ने अपनी अथक सोच से सदियों से सृजित किया था। मेरे दिमाग की इस छोटी परिधि में समा गया है। मुझे मालूम है कि मैं आप सभी लोगों से ज्यादा बुद्धिमान हूं।’
प्रस्तुति : पंकज मालवीय
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

आशा पारेख की बायोग्राफी लॉन्च करेंगे सलमान खान

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

सुभाष घई की 'हीरोइन' ने किया 38 साल बड़े हीरो के साथ लवमेकिंग सीन, तस्वीर वायरल

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

फिल्म 'स्पाइडर मैन होमकमिंग' का टीजर रिलीज

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

कभी होटल में रिसेप्‍शनिस्ट की जॉब करती थी ये एक्ट्रेस, अब लोगों को सिखाती हैं योग

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

आने वाले वक्त में कपिल शर्मा की बैंड बजा देगा ये कॉमेडियन, अक्षय कुमार तक हैं इसके फैन

  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

Most Read

मिल-बैठकर सुलझाएं यह विवाद

Settle this dispute by dialough
  • मंगलवार, 28 मार्च 2017
  • +

ईवीएम पर संदेह करने वाले

Skeptics on EVMs
  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

कुदरती खेती में ही सबकी भलाई

Natural agriculture is beneficial to all
  • रविवार, 26 मार्च 2017
  • +

उत्तर प्रदेश को सर्वोत्तम बनाने का क्षण

The moment to make Uttar Pradesh the best
  • बुधवार, 22 मार्च 2017
  • +

हिंदुओं के करीब जाते शरीफ

Sharif gets closer to Hindus
  • गुरुवार, 23 मार्च 2017
  • +

भारतीय विदेश नीति में नेपाल

Nepal in India's foreign Policy
  • रविवार, 26 मार्च 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top