आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

बिना टोपी का आम आदमी

मूलचंद गौतम

Updated Wed, 26 Dec 2012 09:10 PM IST
common man without cap
गुप्ता जी की उम्र पचासी होने को आई। होश संभालने के बाद से वह गाली खाते आ रहे हैं। झूठ न बोलने की वजह से घर वाले उन्हें सत्य हरिश्चंद्र की औलाद कहकर किसी काम के काबिल नहीं समझते थे। गांधी जी के आंदोलन से जुड़ गए, तो मजबूरी के नाम से गाली खाने लगे। गांधी टोपी का मतलब जब हर दफ्तर में पांच सौ का नोट हो गया, तो लोग उन्हें देखकर ही मुंह बिचकाने लगे-जैसे हर काम में वही सबसे बड़ी बाधा हों। हाल ही में उन्होंने, मैं अन्ना हूं, की टोपी पहनी, तो गजब हो गया। अब उन्होंने अन्ना के नाम पर गाली खाई।
इन दिनों गुप्ता जी आत्मग्लानि से पीड़ित होकर आम आदमी हो गए हैं- बिना किसी टोपी के। अब वह बेखटके कोर्ट-कचहरियों में घूम-घूमकर देख रहे हैं कि कैसे हर पेशकार मुवक्किलों से तारीख देने के नाम पर बिना मांगे चुपचाप बीस रुपये जेब के हवाले कर रहा है, और पूछने पर बताता है कि साहब के घर का राशन-पानी इसी से चल रहा है। मुवक्किल भी चालाक है, जो खुले बीस रुपये लेकर चलता है। उसे मालूम है कि पचास का नोट देने पर वापस कुछ नहीं मिलेगा।

गुप्ता जी को समझ आ गया है कि लोकतंत्र इसी दस्तूर का नाम है। उन्हें अफसोस है कि खामखाह जिंदगी भर गाली खाते रहे। लोगों ने उन्हें क्या-क्या नहीं कहा, मेंटल, क्रैक और अब पगलेट! पगलेट गुप्ता जी हाल ही में थाने जाकर पछताए। उन्हें पता चला कि थर्ड डिग्री क्या होती है। थाने की दीवार की आड़ में उन्होंने लघुशंका का पोज लिया ही था कि एक कड़कदार आवाज से उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। पीछे से हवलदार ने बेंत मारा, तो उन्हें होश आया कि मामला गड़बड़ है। थानेदार के सामने पेश हुए, तो गिरफ्तारी की धमकी। घरवालों को बुलाया, तो जमानत की बात। ले-देकर पांच हजार देकर पीछा छूटा। पता चला, महीने की उगाही चल रही है।

घर पहुंचते ही गुप्ता जी को हिदायतें-पूरी जिंदगी पांच हजार कमाए नहीं, गंवाने पहुंच गए। अगली बार कहीं बाहर फंस गए, तो सीधे पागलखाने पहुंच जाओगे। तब से गुप्ता जी शब्दकोष लेकर बैठ गए हैं। दिन भर में जो भी थोड़ा-बहुत पढ़ा-लिखा नजर आता है, उनसे  यही पूछते हैं, भैया उगाही और वसूली में क्या फर्क है? लोग समझ जाते हैं कि गुप्ता जी धुरी से खिसक गए हैं। उनके घर-बाहर का पता-पगलेट हो गया है। पुरबिये उन्हें आदर से पगलेटवा कह सकते हैं।

  • कैसा लगा
Comments

Browse By Tags

common man without cap

स्पॉटलाइट

कहीं गलत तरह से शैम्पू करने से तो नहीं झड़ रहे आपके बाल, ये है सही तरीका

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

मसाज करवाकर हल्का महसूस कर रहा था शख्स, घर पहुंचते हो गया पैरालिसिस

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

यहां खुद कार चलाकर ऑपरेशन थियेटर में जाते हैं बच्चे

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

इस नवरात्रि इन व्यंजनों को जरूर करें TASTE, व्रत रखने वालों की होगी मौज

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

व्रत में सेहत और स्वाद दोनों का ख्याल रखेगा आलू केला पकौड़ा

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

एक फीसदी बनाम निन्यानबे फीसदी

One percent vs ninety nine percent
  • शनिवार, 16 सितंबर 2017
  • +

द. एशिया में भारत की नई भागीदारी

India's new partnership in South Asia
  • सोमवार, 18 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

स्कूलों का हाल इतना बुरा क्यों है?

Why school's situation is so bad?
  • रविवार, 17 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!