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इंसाफ की जीत, आत्मा का आनंद और मनी प्लांट

Varun Kumar

Varun Kumar

Updated Thu, 16 Aug 2012 01:27 PM IST
CBI Money Plant Polity
अगर सीबीआई न होती तो देश का क्या होता? कुछ लोग मानते हैं कि सीबीआई नहीं, तो कोई और आई होती। कुछ लोगों का मानना है कि सीबीआई को देश ने अपने लिए चुना है। कुछ कहते हैं, सीबीआई ने आगे बढ़कर देश को चुना है। चूंकि चुनाव और उसके परिणामों पर आधारित राजव्यवस्‍था है, इसलिए सबने सबको चुना है।
'मैं चाहता हूं कि अपने घर के मनी प्लांट मुरझाने का मामला लेकर सीबीआई जांच की मांग करूं,' उन्होंने कहा। 'मनी प्लांट आपने ही गलत जगह रखा होगा। वक्त पर पानी नहीं दिया होगा। कीड़ा लग गया होगा। या फिर वह माहौल ही उसे ठीक नहीं लगा होगा, जो आपके घर में है। सीबीआई इसमें क्या कर सकती है?' मैंने सवाल किया।

'आप नहीं जानते। मनी प्लांट की हरियाली का संबंध मेरी समृद्धि से जुड़ा है। एक पत्ता भी मुरझाता है, तो मुझे लगता है, कहीं कोई साजिश हो रही है। जो मनी प्लांट पिछली की पिछली सरकार के वक्त फल-फूल रहा था, पिछली सरकार में कुम्हलाने लगा, मौजूदा सरकार में वह सूखने की हालत में है। क्या आपको नहीं लगता कि इसके पीछे राजनीतिक साजिश है? सीबीआई को इसकी जांच क्यों नहीं करनी चाहिए?'

'सीबीआई के पास कई काम हैं। कहीं क्लोजर रिपोर्ट लगानी है। कहीं आय से अधिक संपत्ति का निपटारा करना है। कहीं पूर्व मुख्यमंत्री और भावी मुख्यमंत्री का घर खंगालना है। आपके मनी प्लांट के लिए उसके पास वक्त कहां है?' 'मैं हमेशा चाहता रहा हूं कि साजिशें रूकें, भ्रष्टाचार पर लगाम लगे, हत्यारों पर मुकदमे चलें, रसूखदारों की परेड हो। मैं भी साजिश का शिकार हूं। सीबीआई के साथ ऐसा क्यों है कि वह सोचती कुछ और है, करती कुछ और है, होता कुछ और है? उसे सही प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए, मेरे मनी प्लांट मुरझाने का मामला हाथ में लेना चाहिए।'

'आपके मनी प्लांट के पत्तों का आकार कैसा है?' 'क्यों? क्या पत्तों के आकार के आधार पर सीबीआई केस हाथ में लेगी?' 'नहीं, आकार देखकर पता लगेगा कि उसके खाद-पानी के लिए किस स्रोत से धन आ रहा है? रोशनी का रास्ता क्या है?' 'मूल चीज है पत्तों का मुरझाना! आखिर समान स्रोत, समान रोशनी के बावजूद पिछली से पिछली सरकार में यह हरा क्यों था? पिछली के वक्त कुम्हलाया कैसे? मौजूदा सरकार के वक्त सूखने क्यों लगा?'

'पिछली से पिछली सरकार और मौजूदा सरकार में तीन सरकारों का फासला है। तब जिन लोगों ने मिलकर सरकार बनाई थी, उसके आधे पिछली सरकार में भी शामिल थे। मौजूदा सरकार में पिछली दो सरकारों के आधे-आधे हैं। क्या यह बताने के लिए काफी नहीं है कि सीबीआई को इसका विश्लेषण करने में कितनी दिक्कत आएगी?'

'मुझे लगता है, आप मुझे सीबीआई तक जाने से पहले बहका रहे हैं। जगन रेड्डी ने पिछले सात महीनों में तो सब कमाया नहीं था। वह दस सालों की मेहनत होगी। उन दस सालों में उनके पिताजी की पूजा होती थी। तब सीबीआई को पता नहीं चला, अब पता चला है, जब वह मौजूदा सरकार की नाक में दम किए हुए हैं। सीबीआई को इतने अंधेरे में न रहना पड़े, इसलिए मैं अपने मनी प्लांट का मामला खुद तत्काल उसके सामने ले जाना चाहता हूं।'

'आप ले जाइए। मुझे खुशी होगी यदि सीबीआई आपका मामला हाथ में ले ले। लेकिन, जैसा कि आप जानते हैं, कई मुकदमे ऐसे होते हैं, जिनमें गवाह पलट जाते हैं, सुबूत नष्ट हो जाते हैं, क्लोजर रिपोर्ट पर फटकार खानी पड़ती है। आप मनी प्लांट उठाकर सीबीआई तक ले गए और रास्ते में सूखे हुए पत्ते झर गए, तो क्या करेंगे?'
'शेष बची टहनी भी कोई कम आधार नहीं है।'

'टहनी उसी मनी प्लांट की है, जो किसी साजिश की वजह से सूखी, यह कैसे साबित करेंगे?' 'मनी प्लांट मेरा है। टहनी मेरी है। केस मैं खुद लेकर जा रहा हूं, तो शक की गुंजाइश क्या है? सीबीआई मान ही लेगी।' 'आपको सीबीआई पर इतना भरोसा क्यों हैं?' 'क्योंकि सीबीआई की हार में भी इंसाफ की जीत है। इस जीत में आत्मा का आनंद है। यह आनंद मैं कैसे छोड़ सकता हूं?'

वे सूखता मनी प्लांट लेकर मुकदमे की मांग के साथ निकल पड़े हैं। उन्हें पता है कि सीबीआई तक पहुंचने से पहले रास्ते में कितनी पार्टियों के दफ्तर पड़ते हैं। मैं जानता हूं, जरूरी हुआ, तो वे कहीं का मनी प्लांट तोड़कर इससे बदल देंगे और सीबीआई में जाने से पहले लौट आएंगे। आखिर वे भी इंसाफ की जीत और आत्मा के आनंद में मनी प्लांट की हैसियत खूब समझते हैं। उन्हें सीबीआई नहीं, मनी प्लांट चाहिए।
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