आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

कैश सब्सिडी को मनरेगा न समझें

विजय विद्रोही

Updated Wed, 26 Dec 2012 11:07 PM IST
cash subsidies will no longer manrega
जब से राहुल गांधी ने आपका पैसा, आपके हाथ योजना को कांग्रेस की संभावित जीत का आधार बताया है, तभी से कांग्रेस के मुख्यमंत्रियों में इस योजना को लागू करने की होड़ लग गई है। दिल्ली में मुख्यमंत्री ने अन्नश्री नाम से गरीबों के खाते में 600 रुपये हर महीने डालने की योजना लागू की है। जबकि प्रधानमंत्री कह चुके हैं कि खाद्य और खाद सब्सिडी सीधे पैसे के रूप में नहीं दी जाएगी। राजस्थान सरकार ने भी स्कॉलरशिप, पेंशन और मनरेगा की मजदूरी जरूरतमंदों के खाते में डालने की योजना शुरू की है।
दरअसल बहुत से जिलों में तैयारियां आधी-अधूरी हैं। वित्त मंत्री कह चुके हैं कि जहां तैयारियां नहीं है, यानी जहां 80 फीसदी से कम आधार कार्ड बने हैं, जहां बैंक खाते पूरे नहीं खुल पाए हैं और जहां मोबाइल एटीएम चलाने वालों की नियुक्त्ति नहीं हुई हैं, वहां एक जनवरी से यह योजना लागू नहीं करनी चाहिए। लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। राहुल गांधी को आगामी लोकसभा चुनाव दिख रहा है, तो शीला दीक्षित और अशोक गहलोत विधानसभा चुनाव में इस योजना का सियासी लाभ उठाने की कोशिश में हैं।

कांग्रेस के मुताबिक, गरीबों के बैंक खाते में सीधे पैसा डालने से चुनावी फायदा होने के अलावा वित्तीय गड़बड़ियों पर रोक लगेगी और सब्सिडी का भार कम हो सकेगा। लेकिन तब भी योजनाकारों को शालीनता का परिचय तो देना ही चाहिए। शीला दीक्षित ने 600 रुपये की सब्सिडी देने का ऐलान करते हुए कह डाला कि इतने पैसों से पांच सदस्यों का एक परिवार महीने भर के भोजन का जुगाड़ कर सकता है। स्वयंसेवी संगठनों का कहना है कि फिर तो नकद पैसा देने के बजाय राशन की दुकानों का सस्ता अनाज ही देना चाहिए था।

इस योजना की एक बड़ी खामी यह है कि महंगाई दर से इस सब्सिडी को जोड़ा नहीं गया है। जिस दर से महंगाई बढ़ रही है, उसमें आने वाले समय में 600 रुपये में उतना अनाज नहीं मिल सकेगा, जितना इस समय मिल रहा है। दिल्ली शहरी इलाका है। वहां बैंक बहुतायत में हैं और अधिकांश लोगों के पास बैंक खाते भी हैं। यही बात आधार कार्ड के लिए भी कही जा सकती  है। पर देश के दूसरे इलाकों में तमाम खामियों की बातें सामने आ रही हैं।

योजना को सफलतापूर्वक चलाने के लिए जरूरी है कि इन जिलों की कम से कम 80 फीसदी जनता के पास आधार कार्ड हो, सभी जरूरतमंदों के बैंक खाते हों और खातों को आधार कार्ड के साथ जोड़ा गया हो। सबसे जरूरी बात यह है कि जरूरतमंदों को पैसा तभी मिलेगा, जब उनकी उंगलियों की छाप उनके यूआईडीएआई के डाटाबेस से मेल खाती हो।

अब जरा जमीनी हकीकत पर नजर डाली जाए। अलवर जिले की कोटकासिम तहसील की असलियत सामने आ ही चुकी है। झारखंड के भी चार जिलों- रांची, रामगढ़, हजारीबाग और सरायकेला-खरसावां में, पिछले दिसंबर से पायलट परियोजना शुरू की गई थी। रामगढ़ में मनरेगा के मजदूरों को आधार कार्ड के आधार पर मजदूरी दी जानी थी। वहां एक लाख 74 हजार मनरेगा मजदूर हैं, लेकिन एक साल बाद भी सिर्फ पांच हजार मजदूरों को ही आधार से जोड़ने में सफलता मिली है।

यही हाल अन्य जिलों का है। इसके बावजूद अगर केंद्र सरकार कैश सब्सिडी योजना लाने में जल्दबाजी कर रही है, तो इसका मतलब है कि वह चुनावी लाभ उठाना चाहती है। उसे लगता है कि अगर 2009 में मनरेगा के बल पर सत्ता में दोबारा पाया जा सकता है, तो 2014 में सीधे पैसा जमा करवाने की योजना यूपीए की तिगड़ी क्यों नहीं बनवा सकती। उत्साहित राहुल गांधी तो कांग्रेस अध्यक्षों के दिल्ली में बुलाए सम्मेलन में यह कह बैठे कि 2019 में भी इस योजना के आधार पर सत्ता में लौटा जा सकता है।

कांग्रेस इसकी व्यूह रचना में भी लगी है कि भाजपा शासित राज्य इसका फायदा न उठा पाएं। दरअसल मनरेगा योजना के दौरान भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने मनरेगा के पोस्टरों में अपनी तस्वीरें लगा ली थीं। इसी तरह केंद्र की सर्व शिक्षा योजना के तहत मुफ्त में मिली पुस्तकें भी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी तरफ से दिए बस्ते में डालकर बंटवा दी थीं। कांग्रेस चाहे कुछ भी करे, जल्दबाजी में कैश सब्सिडी योजना का बंटाधार ही होगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

गूगल लाया नया फीचर, अब फोन में डाउनलोड ही नहीं होंगे वायरस वाले ऐप

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

क्या आपकी उड़ गई है रातों की नींद, ये तरीका ढूंढ़कर लाएगा उसे वापस

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

दुनिया पर राज करने वाले मुकेश अंबानी आज तक अपने इस डर को नहीं जीत पाए

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

एक्टर बनने से पहले स्पोर्ट्समैन थे 'सीआईडी' के दया, कमाई जान रह जाएंगे हैरान

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

अपने हाथों से ये राशि वाले इस सप्ताह बर्बाद करेंगे अपना प्रेमी जीवन

  • शुक्रवार, 21 जुलाई 2017
  • +

Most Read

मिट्टी के घर से रायसीना हिल तक का सफर

Travel from mud house to Raisina Hill
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +

नीतीश के लिए परीक्षा की घड़ी

Test time for Nitish
  • सोमवार, 17 जुलाई 2017
  • +

विपक्ष पर भारी पड़ते चेहरे

Faced with overwhelming faces on the opposition
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

अंग्रेजी माध्यम आत्मघाती होगा

English medium will be suicidal
  • मंगलवार, 18 जुलाई 2017
  • +

बच्चों को चाहिए ढेर सारी किताबें

Children should have a lot of books
  • बुधवार, 19 जुलाई 2017
  • +

कामवालियों के श्रम का सम्मान

Respect for labor of women
  • गुरुवार, 20 जुलाई 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!