आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

जन और जमीन से गहरे प्रेम की कविताएं

महेश चंद्र पुनेठा

Updated Sun, 04 Nov 2012 01:21 PM IST
book review  by mahesh chand poonetha
`आसान नहीं विदा कहना’ केशव तिवारी का दूसरा कविता संग्रह है। केशव तिवारी को विरासत में त्रिलोचन जैसी सरलता केदार बाबू जैसी कलात्मकता और नागार्जुन जैसी प्रखरता मिली है। वे अपनी देशज जमीन पर खड़े मनुष्यता की खोज में संलग्न रहते हैं। ये कविताएं यथार्थ का चित्रण ही नहीं करतीं, बल्कि उसको बदलने के लिए रास्ता भी सुझाती हैं। लोकधर्मी कविता की अपील कितनी व्यापक होती है, इन कविताओं में देखा जा सकता है।
उनके लिए `नामालूम और छोटे’ की अहमियत किसी ज्ञात और बड़े से कम नहीं। इनके हिस्से में किसी तरह की कोई कटौती उन्हें स्वीकार नहीं है। `अपने कोने के एक हिस्से में बहुत उजला और बाकी के हिस्सों में बहुत धुंधला’ उन्हें मान्य नहीं।’ `कुछ हो ना हो’, सभी के लिए `एक घर तो होना ही चाहिए।’

उन्हें एक अफगानी, एक कश्मीरी, एक पहाड़ी या राजस्थानी का दुःख भी उतना ही सालता है, जितना किसी बांदावासी का। वह इस धरती की सुंदरता अपने समय को ललकारते लोगों में देखते हैं। उनका अपनी जमीन से `आशिक और माशूक का रिश्ता’ है। इसी के चलते, तो उनके लिए `आसान नहीं विदा कहना।’

यह कवि `दलिद्र’ को भी जानता है और दरिद्र होने के कारणों को भी। और यह भी जानता है कि जिस दिन श्रम करने वाले लोग भी उन कारणों को जान जाएंगे, उस दिन उनके `जीने की सूरत भी बदल जाएगी।’ वे भली-भांति जानते हैं कि `दुःखों की नदी स्मृतियों की नाव के सहारे पार’ नहीं की जा सकती है।

केशव अतीत के अजायबघर को वर्तमान की छत पर खड़े होकर देखने वाले कवि हैं। अतीत के मोह में खो जाने वाले नहीं। नई सुबह के आगमन के  प्रति वे आश्वस्त हैं। उनको गहरा अहसास है कि `आज नहीं, तो कल कटेंगी ही दुःख भरी रातें, हटाए ही जाएंगे पहाड़।’

केशव तिवारी बाजार का दबाव  अपनी गर्दन और जेब दोनों पर महसूस करते हैं।  प्रेम का वस्तु में तब्दील होते जाना, उनको बहुत कचोटता है। इस बाजारवादी समय में प्रेम दिल के नहीं जेब के हवाले हो गया है। जो खरीदा-बेचा जा रहा है। केशव प्रेम को व्यापार बनाए जाने के विरोध में हैं। वे बाजार का नहीं बाजारवाद का विरोध करते हैं।

वे कहते हैं `तब भी था बाजार’ पर ऐसा नहीं, जो मनुष्य को लूटने के लिए हो। जिसमें बाजार में खड़ा हर आदमी हानि-लाभ का हिसाब लगाने में ही जुटा रहता हो। मनुष्य अपनी जरूरत के लिए बाजार में जाता था, न कि बाजार जरूरत पैदा कर आदमी के घर में घुसता था। बाजारवादी समय में लोक के व्यवहार में आ रहे बदलाव पर भी उनकी पैनी नजर रहती है।

केशव तिवारी की इन कविताओं में अपने नीड़ से बहुत दूर चले आने की पीड़ा भी है। उनके भीतर सच सुनने का साहस  है। इस संग्रह की कविताओं को पढ़ते हुए लगता है कि कवि अपने पुरखों, अपनी जमीन, अपने जन  के प्रति कृतज्ञता से भरा है।

आसान नहीं विदा कहना
(कविता संग्रह)
केशव तिवारी
प्रकाशन : रॉयल पब्लिकेशन, जोधपुर
मूल्य : 125 रुपये
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

गुटखे की आदत से परेशान है तो अपनाएं सौंफ का ये नुस्खा, चंद दिनों में होगा असर

  • मंगलवार, 30 मई 2017
  • +

शाहिद कपूर की धमकी के बाद श्रीदेवी की बेटी के साथ घूम-फिर रहे हैं ईशान

  • मंगलवार, 30 मई 2017
  • +

साड़ी में रवीना को देख रणवीर ने की थी ऐसी हरकत, अक्षय भी दंग रह गए

  • मंगलवार, 30 मई 2017
  • +

80 साल की औरत के साथ हीरो ने दिया ऐसा सीन, देने पड़े 18 रीटेक

  • मंगलवार, 30 मई 2017
  • +

रात को सोने से पहले पार्टनर के साथ भूलकर भी न करें ये 5 बातें

  • मंगलवार, 30 मई 2017
  • +

Most Read

सामरिक आत्मनिर्भरता की ओर

Toward strategic self-reliance
  • शनिवार, 27 मई 2017
  • +

पत्थरबाज और मेजर गोगोई

Stone-pelter and Mejor Gogoi
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

दूसरी पारी में चुनौती अमेरिका से भी

Challenge in second term from US too
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +

विपक्षी एकता की परीक्षा

Test of Unity of Oppositions
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

आरती और विलाप के बीच

Between aarti and moan
  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

नक्सलवाद: पचास साल और आगे?

Naxalism: 50 years and henceforth?
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top