आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

आसियान को भी हमारी जरूरत

Vikrant Chaturvedi

Vikrant Chaturvedi

Updated Tue, 27 Nov 2012 08:54 PM IST
ASEAN also needs india
घरेलू राजनीति से इतर हाल ही में कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह में हुए आसियान शिखर सम्मेलन में भारत के लिए नई उम्मीदें जगी हैं। दस आसियान देशों के साथ इस सम्मेलन में भारत, चीन, अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, जापान और दक्षिण कोरिया ने भी भाग लिया। वहां सदस्य देशों के साथ व्यापार समझौतों पर सफल बातचीत हुई। जैसा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी दोहराया, वर्ष 2009 में भारत का आसियान के साथ वस्तुओं के क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौता हो चुका है।
आसियान समूह के साथ सेवा तथा निवेश क्षेत्र में मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अगले महीने तक अंतिम रूप देने के प्रयास किए जा रहे हैं। मार्च, 2012 को खत्म हुए वित्तीय वर्ष में आसियान और भारत के बीच व्यापार लक्ष्य से अधिक लगभग 80 अरब डॉलर का रहा है और अब आसियान-भारत विजन 2020 के माध्यम से भारत-आसियान व्यापार को चमकीली ऊंचाइयां दी जा सकेंगी।

गौरतलब है कि दक्षिण पूर्वी एशिया को दुनिया के चमकदार व्यापारिक इलाके के रूप में देखा जा रहा है। आठ अगस्त, 1967 को बने एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशंस (आसियान) में इस समय इंडोनेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, मलयेशिया, ब्रुनेई, थाइलैंड, म्यांमार, लाओस, वियतनाम और कंबोडिया सदस्य देश हैं। आसियान संगठन के इन दस देशों की जनसंख्या 60 करोड़ से अधिक है। इन देशों की एक हजार अरब डॉलर से अधिक की वार्षिक क्षेत्रीय आय तथा 100 अरब डॉलर से अधिक का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) मुक्त व्यापार क्षेत्र के परिप्रेक्ष्य में महत्वपूर्ण है।

विश्व व्यापार में आसियान समूह के सबसे ज्यादा गतिशील होने के कारण इस समय भारत सहित दुनिया के देश दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों के साथ व्यापारिक संबंध बढ़ाने के लिए लालायित हैं। नई दिल्ली भी विदेश व्यापार के लिए पूर्व की ओर देखने की नीति पर आगे बढ़ते हुए आसियान देशों में व्यापार समृद्धि के चमकते हुए ढेर सारे द्वारों में प्रवेश करके अपने उद्योग-व्यवसाय को ऊंचाई देने के लिए प्रयासरत है।

आसियान देशों के साथ भारत के व्यापारिक रिश्तों की शुरुआत 1990 के दशक में हुई। आसियान देशों ने जनवरी 1992 में भारत को क्षेत्रीय संवाद सहयोगी और दिसंबर 1995 में पूर्ण वार्ताकार सहयोगी का दरजा प्रदान किया था। तब से आसियान देशों के साथ भारत का व्यापार लगातार छलांगें लगाकर बढ़ रहा है। भारत-आसियान का जो व्यापार 1990 में मात्र 2.4 अरब डॉलर का था, वहीं वह 2011-12 में 70 अरब डॉलर की निर्धारित लक्ष्य को पार कर गया है।

आसियान देश भी यह अनुभव कर रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में भारत ने आर्थिक मोरचे पर कामयाबी हासिल की है। न केवल सॉफ्टवेयर या सेवा क्षेत्र में, बल्कि कई अन्य आर्थिक क्षेत्रों में नई दिल्ली ने विश्व की एक उभरती हुई आर्थिक शक्ति के तौर पर पहचान बनाई है। भारत के पास कुशल पेशेवरों की फौज है।

आईटी, सॉफ्टवेयर, बीपीओ, फार्मास्युटिकल्स, केमिकल्स एवं धातु क्षेत्र में दुनिया की जानी-मानी कंपनियां हैं, आर्थिक व वित्तीय क्षेत्र की शानदार संस्थाएं हैं। भारत की कंपनियां दुनिया में अपना प्रभाव बढ़ाती जा रही हैं। चूंकि क्रूड ऑयल पर भारत की सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा खर्च हो रही है और कोयले के मामले में भी देश आए दिन मुश्किलों का सामना कर रहा है, लिहाजा आसियान समूह के साथ हाइड्रो कार्बन क्षेत्र में समझौता भारत के लिए लाभप्रद होगा।

आसियान देश समुद्री सीमाओं पर चीन के क्षेत्रीय और दबावपूर्ण मनसूबों से त्रस्त हैं, इसलिए वे लोकतांत्रिक भारत को अपना समुद्री मित्र मानते हुए नई दिल्ली से आर्थिक संबंधों में उपयोगिता देख रहे हैं। बढ़ते हुए मध्य वर्ग के कारण भारत को क्रय शक्ति वाले खरीदारों का बड़ा बाजार माना जा रहा है। आसियान देश विशेष तौर पर कुछ ऐसे क्षेत्रों में निवेश करने के लिए आगे आ सकते हैं, जिनमें भारत ने काफी उन्नति की है। ये क्षेत्र हैं- सूचना प्रौद्योगिकी, बायोटेक्नोलॉजी, फार्मास्युटिकल्स, पर्यटन और आधारभूत क्षेत्र। अगर आसियान का मैन्यूफैक्चरिंग और भारत का सॉफ्टवेयर उद्योग आपस में जुड़ जाएं, तो यह पूरा इलाका आर्थिक प्रगति के कीर्तिमान रच सकता है।
 
इसमें कोई दो मत नहीं है कि भारत ने 'लुक ईस्ट' की अहमियत को काफी देर से समझा है, लेकिन अब भारत को आसियान क्षेत्र में अपनी छाप छोड़ने के साथ-साथ आसियान देशों में चमकीली व्यापार संभावनाओं को साकार करने के लिए रणनीतिक प्रयास करने होंगे। भारत को चीन की तरह प्रतिस्पर्द्धी देश के रूप में आसियान बाजार में कदम बढ़ाने होंगे। यह ध्यान रखना होगा कि आसियान के आयात में चीन का हिस्सा भारत से सात गुना बड़ा है।

अमेरिका में बराक ओबामा के दोबारा राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उद्योगों के संरक्षण और यूरोप में कर्ज संकट के कारण खर्चों में कटौती की जो प्रक्रिया चल रही है, उससे भारतीय निर्यातकों को मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में भारत दोहरी मंदी की चुनौतियों के बीच आसियान देशों में निर्यात बढ़ाने की नई संभावनाएं खोज सकता है। लेकिन चूंकि एफटीए पेचीदा होते हैं, इसलिए सीमा शुल्क अधिकारियों और इसे लागू करने वाले दूसरे अधिकारियों को अच्छी तरह प्रशिक्षित करना होगा।

ध्यान रखना होगा कि एफटीए का दूसरे अंतरराष्ट्रीय समझौते से बेहतर समन्वय किया जाए। चूंकि भारत एफटीए क्षेत्र में नया है, इसलिए ध्यान रखना होगा कि एफटीए का लाभ तभी प्राप्त किया जा सकता है, जब देश में विशेषज्ञ अधिकारियों, उद्योगपतियों और पेशेवरों का एक ऐसा समर्पित संगठन खड़ा हो सके, जिससे किसी दोतरफा समझौते में भारत को घाटे का सौदा न करना पड़े।


  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

'दंगल' ने बदल दी इस एक्टर की किस्मत, हाथ लगीं इतनी फिल्में

  • सोमवार, 29 मई 2017
  • +

साप्ताहिक राशिफल: इस राशि के लोग रहेंगे चिड़चिड़े, जानिए अपनी राशि

  • सोमवार, 29 मई 2017
  • +

CBSE के रिजल्ट के बाद तेजी से बढ़ी DU में एडमिशन प्रक्रिया

  • सोमवार, 29 मई 2017
  • +

लड़कियों को करना चाहते हैं इंप्रेस तो अपनाएं 'बाहुबली' की ये 5 आदतें

  • सोमवार, 29 मई 2017
  • +

रमजान 2017: सेहरी में खाएंगे ये 5 चीजें तो दिनभर नहीं लगेगी भूख

  • रविवार, 28 मई 2017
  • +

Most Read

सामरिक आत्मनिर्भरता की ओर

Toward strategic self-reliance
  • शनिवार, 27 मई 2017
  • +

पत्थरबाज और मेजर गोगोई

Stone-pelter and Mejor Gogoi
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

ये तय करेंगे लोकसभा चुनाव के नतीजे

Four Implications Leading Up to India’s 2019 General Election
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

दूसरी पारी में चुनौती अमेरिका से भी

Challenge in second term from US too
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +

विपक्षी एकता की परीक्षा

Test of Unity of Oppositions
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

नक्सलवाद: पचास साल और आगे?

Naxalism: 50 years and henceforth?
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top