आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

क्यों पिछड़ रहे हैं हमारे महानगर

विशेष गुप्ता

Updated Thu, 01 Nov 2012 10:02 PM IST
article of vishesh gupta
संयुक्त राष्ट्र हेबिटेट की द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड सिटीज रिपोर्ट में भारत की राजधानी दिल्ली और आर्थिक नगरी मुंबई कई पैमानों पर काठमांडू और ढाका जैसे शहरों से भी पिछड़ती नजर आई हैं। रिपोर्ट में दिल्ली के पर्यावरण को सबसे बड़ा खतरा सार्वजनिक परिवहन की अपर्याप्तता का होना बताया गया है। यहां निजी वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे हवा की गुणवत्ता भी खराब होती जा रही है।
मुंबई के बेहतर होने की वजह उसका तुलनात्मक रूप से थोड़ा ठीक-ठाक सार्वजनिक परिवहन रहा है। इस रिपोर्ट में साफ संकेत है कि भारतीय महानगरों में लगभग 70-80 फीसदी रोजगार कम आमदनी व असुरक्षा वाले असंगठित क्षेत्रों में हैं। ऐसा नहीं है कि महानगरीय विकास के लिए धन खर्च नहीं किया जा रहा है, बल्कि उस धन का अधिकांश हिस्सा समृद्ध इलाकों में लगने के कारण गरीब इलाके बराबर पिछड़ते जा रहे हैं। हमारे नगरों का अनियोजित विकास होने के कारण गरीब लगातार हाशिये पर जा रहे हैं, जहां उनके लिए न तो सुरक्षित रोजगार है और न ही बिजली, पानी, परिवहन जैसी बुनियादी सुविधाएं मौजूद हैं।

भारतीय शहरों में ढांचागत सुविधाएं नाकाफी हैं, यह किसी से छिपा नहीं है। बड़े शहरों में सड़कों के लिए छोड़े गए स्थान का ही उदाहरण लें, तो कोलकाता में इसके लिए पूरे शहर के कुल स्थान का पांच फीसदी तथा मुंबई में मात्र 11 फीसदी स्थान ही रखा गया है। दूसरी ओर, अमेरिका जैसे विकसित देशों में कुल शहरी विकास का 25 से 30 फीसदी तक सड़कों के फैलाव के लिए रखा जाता है।

इस रिपोर्ट में शहरों के अनियोजित विकास, मसलन वहां की झुग्गी-झोपड़ियों और अवैध कॉलोनियों के फैलाव के लिए नगरों के प्राधिकरणों को जिम्मेदार ठहराया गया है। बात किसी हद तक सही भी है कि प्राधिकरणों ने इन शहरों में सस्ती जमीनें तो खरीद लीं, परंतु कमजोर व गरीब वर्गों को सस्ती दरों पर मकान मुहैया नहीं कराए।     
       
यूएन की इस रिपोर्ट को केंद्र में रखकर जब हम देश के बाकी नगरीय विकास का अध्ययन करते हैं, तो ज्ञात होता है कि देश के दूसरे शहरों की स्थिति भी कमोबेश ऐसी ही है। भारत भले ही गांवों का देश है, परंतु गांव के बलबूते ही आज भी शहरी विकास को तरजीह दी जा रही है। देश में आज जब हम नगरों की वास्तविक स्थिति से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालते हैं, तो पता लगता है कि भारत की कुल आबादी का 35 फीसदी हिस्सा शहरों में रहता है।

दुनिया के बीस में से सबसे अधिक आबादी वाले पांच शहर भारत में हैं। देश में शहरी आबादी जिस रफ्तार से बढ़ रही है, उससे 2030 तक इसके 70 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। इस संदर्भ में मैकिंजे कंपनी की हाल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस नगरीय ढांचे में परिवर्तन को संभालने के लिए भारत को भविष्य में पांच सौ से अधिक शहरों की आवश्यकता पड़ेगी। लिहाजा इस परिवर्तन से गांवों के सामने भी चुनौती रहेगी।

शहरों की चकाचौंध से प्रभावित होकर चार्ल्स डिकेंस ने अपनी पुस्तक ए टेल ऑफ टू सिटीज में लिखा है कि शहर अब रफ्ता-रफ्ता थकने लगे हैं। चार्ल्स ने नगरों की यह कहानी यूरोप में औद्योगिकीकरण के बाद टूटते-बिखरते शहरों के विषय में दोहराई थी। उन्होंने नगरों में उत्पन्न उस युग का दर्द, निराशा, छटपटाहट व उम्मीदों का फलसफा बयान किया था। आज दिल्ली व मुंबई जैसे महानगर अपनी जो कहानी बयां कर रहे हैं, उनके दर्द भी चार्ल्स डिकेंस के शहरी दर्द से कहीं न कहीं तालमेल रखते हैं। ये दोनों शहर ही क्यों, इलाहाबाद, पटना व लखनऊ भी जबरदस्त नागरिक सुविधाओं के संकट से जूझ रहे हैं।

नगरों में विकास की ऐसी दीर्घकालिक योजना बनाने की जरूरत है, ताकि वहां लोगों को उजाड़ने की जगह योजनाबद्ध तरीके से उन्हें बसाने के प्रयास हों। तभी दिल्ली व मुंबई जैसे महानगर अपने चहुंमुखी विकास के संदेश को पूरी दुनिया में पहुंचा सकते हैं। कुल मिलाकर संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने हमें एक मौका प्रदान किया है कि हम अपने नगरीय विकास की अवधारणा तथा उससे जुड़े तमाम ज्वलंत मुद्दों पर पुनः विचार करें।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

आपके पैर के तलवों में छुपा है एक राज, जानते हैं आप?

  • शुक्रवार, 26 मई 2017
  • +

6 साल बाद इस फिल्म से वापसी करेंगी सेलिना जेटली

  • शुक्रवार, 26 मई 2017
  • +

इस हीरोइन के साथ हुआ ऐसा करिश्मा, पिता ने भी छू लिए थे पैर

  • शुक्रवार, 26 मई 2017
  • +

फ्लॉप होकर भी बड़ा सुपरस्टार है ये एक्टर, सलमान से लेकर आमिर भी झुकाते हैं सिर

  • शुक्रवार, 26 मई 2017
  • +

PICS: अपनी बर्थडे पार्टी में जमकर नाचे करण जौहर, जाह्नवी के कपड़ाें ने उड़ाए सबके होश

  • शुक्रवार, 26 मई 2017
  • +

Most Read

पत्थरबाज और मेजर गोगोई

Stone-pelter and Mejor Gogoi
  • गुरुवार, 25 मई 2017
  • +

ये तय करेंगे लोकसभा चुनाव के नतीजे

Four Implications Leading Up to India’s 2019 General Election
  • सोमवार, 22 मई 2017
  • +

दूसरी पारी में चुनौती अमेरिका से भी

Challenge in second term from US too
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +

विपक्षी एकता की परीक्षा

Test of Unity of Oppositions
  • मंगलवार, 23 मई 2017
  • +

ऐसे में कैसे पढ़ेंगी बेटियां

How to read daughters in this situations
  • शनिवार, 20 मई 2017
  • +

नक्सलवाद: पचास साल और आगे?

Naxalism: 50 years and henceforth?
  • बुधवार, 24 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top