आपका शहर Close

तब पहरेदारी उलट देती है दिशा

उमेश चतुर्वेदी

Updated Mon, 29 Oct 2012 10:39 PM IST
article of umesh caturvedi
धरती पर दो तरह की धाराएं काफी समय से रही हैं। एक का मानना है कि चूंकि मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, लिहाजा उसे राष्ट्र, समाज और विचारों की सीमाओं में नहीं बांधा जाना चाहिए। दूसरी धारा मर्यादाओं की सीमा-रेखा की वकालत करती रही है। बहरहाल आजाद मीडिया की अवधारणा को दोनों ही चिंतन धाराएं पूरी संजीदगी से स्वीकार करती रही हैं।
 
इंटरनेट और उसके जरिये सोशल मीडिया का जैसे-जैसे विस्तार शुरू हुआ, दोनों ही चिंतन धाराओं ने इसे आजाद अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा साधन मानकर समर्थन किया। निश्चय ही सोशल मीडिया ने सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिशें भी की और उन करतूतों को उजागर भी किया, जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया शायद ही सामने ला पाता।

यह कथित मुख्यधारा का मीडिया राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव की वजह से कई बार असलियत को सामने लाने से कभी जानबूझकर, तो कभी अनजाने में चूकता रहा है। कभी उसकी राह में पूंजी भी बाधक बनती रही है। इन अर्थों में सोशल मीडिया कहीं ज्यादा आजाद था, लेकिन लगता नहीं कि अब यह मीडिया भी ज्यादा दिनों तक आजाद रह पाएगा।

सबसे पहले अमेरिका में इराक और अफगानिस्तान नीति पर मजबूती से सवाल उठाकर सोशल मीडिया शासक वर्ग की नजरों की किरकिरी बना। फिर रही-सही कसर विकीलिक्स के खुलासों ने पूरी कर दी। अभी अमेरिका-यूरोप इससे उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि मध्यपूर्व के देशों में उठी जनबयार ने वहां के शासक वर्ग को इस मीडिया के प्रति सशंक बना दिया। भारत में भी महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही।

इस पूरे अभियान में शासक तंत्र से संबंधित कुछ आपत्तिजनक सामग्री-फोटो और व्यंग्य चित्र भी इस मीडिया पर प्रकाशित हुए। इससे हमारे शासक तंत्र की भी भौंहें टेढ़ी हो गईं। लेकिन मानवतावादी लोकतांत्रिक विचारधारा के कथित दबाव में सरकार कुछ करने में हिचक रही थी, लेकिन असम में कथित हिंसा की अफवाहों ने उसे मौका दे दिया। निश्चित तौर पर इसमें आतंकी तत्वों का हाथ था, लेकिन इस बहाने सरकार ने सोशल मीडिया को बांधने और आपत्तिजनक सामग्रियां हटाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए उन्हीं कानूनों का सहारा लिया जाने वाला है, जो कथित मुख्यधारा की मीडिया पर लागू होते हैं।
 
सोशल मीडिया पर मौजूदा सरकारी तंत्र के गुस्से की मुख्य वजह है, भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान राजनीतिक शुचिता की अवधारणा का तार-तार होना। राजनीतिक वर्ग को मीडिया का यह रूप स्वीकार्य नहीं है। उसे मुख्यधारा का मीडिया एक हद तक इसलिए पसंद है, क्योंकि आर्थिक और दूसरी वजहों से उसे अलिखित तौर पर नियंत्रित भी कर लिया जाता है। पर सोशल मीडिया की राह में सरकारें बड़ी रोड़ा बन नहीं पातीं।

बेशक सोशल मीडिया में भी अतिवाद है, पर नहीं भूलना चाहिए कि जिस तकनीक के अति संवेदनशील और ताकतवर घोड़े पर सोशल मीडिया सवार है, उसे बांध पाना सरकारों के वश में नहीं है। कुछ राजनेता चीन की तर्ज पर सोशल मीडिया को बांधने का सुझाव देते रहे हैं, पर वे भूल जाते हैं कि प्रतिबंध के बावजूद वहां भी यह मीडिया दूसरे रूपों में प्रॉक्सी सर्वरों की मदद से अपना काम कर रहा है। वैसे भी जब हम चीन की तर्ज पर पहरेदारी की पैरोकारी करते हैं, तो हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा करने के बाद हम उदारवादी लोकतांत्रिक देश कहलाने का अधिकार खो सकते हैं।  

सोशल मीडिया के अतिवाद के खिलाफ प्रस्तावित पहरेदारी तभी कारगर हो पाएगी, जब कानूनों का दुरुपयोग न हो और उनकी भी कारगर निगरानी हो। अन्यथा अंतहीन तकनीक कोई-न-कोई राह निकालकर नए रूप में सोशल मीडिया को सामने ला खड़ा करेगी, जो और भी खतरनाक होगी। अतिवादी राह से आए विचार हमेशा उलटी दिशा में ले जाते हैं। चूंकि सोशल मीडिया विचारों की अभिव्यक्ति का ही जरिया है, लिहाजा इसका असर विचारों की दुनिया पर भी पड़ेगा। पहरेदारी से निकले विचार नुकसान ही ज्यादा पहुंचाते हैं। पहरेदारी की तैयारियों में इस तथ्य को भी गहराई से समझना होगा।
Comments

स्पॉटलाइट

19 की उम्र में 27 साल बड़े डायरेक्टर से की थी शादी, जानें क्या है सलमान और हेलन के रिश्ते की सच

  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

साप्ताहिक राशिफलः इन 5 राशि वालों के बिजनेस पर पड़ेगा असर

  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

ऐसे करेंगे भाईजान आपका 'स्वैग से स्वागत' तो धड़कनें बढ़ना तय है, देखें वीडियो

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान के शो 'Bigg Boss' का असली चेहरा आया सामने, घर में रहते हैं पर दिखते नहीं

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

आखिर क्यों पश्चिम दिशा की तरफ अदा की जाती है नमाज

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

Most Read

इतिहास तय करेगा इंदिरा की शख्सियत

 History will decide Indira's personality
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

सेना को मिले ज्यादा स्वतंत्रता

More independence for army
  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

जनप्रतिनिधियों का आचरण

Behavior of people's representatives
  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

मोदी तय करेंगे गुजरात की दिशा

Modi will decide Gujarat's direction
  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +

मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी

Modi-Trump's Jugalbandi
  • गुरुवार, 16 नवंबर 2017
  • +

खेतिहर समाज की त्रासदी

Tragedy of farming society
  • मंगलवार, 21 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!