आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

तब पहरेदारी उलट देती है दिशा

उमेश चतुर्वेदी

Updated Mon, 29 Oct 2012 10:39 PM IST
article of umesh caturvedi
धरती पर दो तरह की धाराएं काफी समय से रही हैं। एक का मानना है कि चूंकि मनुष्य स्वतंत्र पैदा हुआ है, लिहाजा उसे राष्ट्र, समाज और विचारों की सीमाओं में नहीं बांधा जाना चाहिए। दूसरी धारा मर्यादाओं की सीमा-रेखा की वकालत करती रही है। बहरहाल आजाद मीडिया की अवधारणा को दोनों ही चिंतन धाराएं पूरी संजीदगी से स्वीकार करती रही हैं।
 
इंटरनेट और उसके जरिये सोशल मीडिया का जैसे-जैसे विस्तार शुरू हुआ, दोनों ही चिंतन धाराओं ने इसे आजाद अभिव्यक्ति का सबसे बड़ा साधन मानकर समर्थन किया। निश्चय ही सोशल मीडिया ने सामाजिक अपेक्षाओं पर खरा उतरने की कोशिशें भी की और उन करतूतों को उजागर भी किया, जिन्हें मुख्यधारा का मीडिया शायद ही सामने ला पाता।

यह कथित मुख्यधारा का मीडिया राजनीतिक और कॉरपोरेट दबाव की वजह से कई बार असलियत को सामने लाने से कभी जानबूझकर, तो कभी अनजाने में चूकता रहा है। कभी उसकी राह में पूंजी भी बाधक बनती रही है। इन अर्थों में सोशल मीडिया कहीं ज्यादा आजाद था, लेकिन लगता नहीं कि अब यह मीडिया भी ज्यादा दिनों तक आजाद रह पाएगा।

सबसे पहले अमेरिका में इराक और अफगानिस्तान नीति पर मजबूती से सवाल उठाकर सोशल मीडिया शासक वर्ग की नजरों की किरकिरी बना। फिर रही-सही कसर विकीलिक्स के खुलासों ने पूरी कर दी। अभी अमेरिका-यूरोप इससे उबरने की कोशिश कर ही रहे थे कि मध्यपूर्व के देशों में उठी जनबयार ने वहां के शासक वर्ग को इस मीडिया के प्रति सशंक बना दिया। भारत में भी महंगाई और भ्रष्टाचार के खिलाफ अलख जगाने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका रही।

इस पूरे अभियान में शासक तंत्र से संबंधित कुछ आपत्तिजनक सामग्री-फोटो और व्यंग्य चित्र भी इस मीडिया पर प्रकाशित हुए। इससे हमारे शासक तंत्र की भी भौंहें टेढ़ी हो गईं। लेकिन मानवतावादी लोकतांत्रिक विचारधारा के कथित दबाव में सरकार कुछ करने में हिचक रही थी, लेकिन असम में कथित हिंसा की अफवाहों ने उसे मौका दे दिया। निश्चित तौर पर इसमें आतंकी तत्वों का हाथ था, लेकिन इस बहाने सरकार ने सोशल मीडिया को बांधने और आपत्तिजनक सामग्रियां हटाने की तैयारी कर ली है। इसके लिए उन्हीं कानूनों का सहारा लिया जाने वाला है, जो कथित मुख्यधारा की मीडिया पर लागू होते हैं।
 
सोशल मीडिया पर मौजूदा सरकारी तंत्र के गुस्से की मुख्य वजह है, भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन के दौरान राजनीतिक शुचिता की अवधारणा का तार-तार होना। राजनीतिक वर्ग को मीडिया का यह रूप स्वीकार्य नहीं है। उसे मुख्यधारा का मीडिया एक हद तक इसलिए पसंद है, क्योंकि आर्थिक और दूसरी वजहों से उसे अलिखित तौर पर नियंत्रित भी कर लिया जाता है। पर सोशल मीडिया की राह में सरकारें बड़ी रोड़ा बन नहीं पातीं।

बेशक सोशल मीडिया में भी अतिवाद है, पर नहीं भूलना चाहिए कि जिस तकनीक के अति संवेदनशील और ताकतवर घोड़े पर सोशल मीडिया सवार है, उसे बांध पाना सरकारों के वश में नहीं है। कुछ राजनेता चीन की तर्ज पर सोशल मीडिया को बांधने का सुझाव देते रहे हैं, पर वे भूल जाते हैं कि प्रतिबंध के बावजूद वहां भी यह मीडिया दूसरे रूपों में प्रॉक्सी सर्वरों की मदद से अपना काम कर रहा है। वैसे भी जब हम चीन की तर्ज पर पहरेदारी की पैरोकारी करते हैं, तो हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऐसा करने के बाद हम उदारवादी लोकतांत्रिक देश कहलाने का अधिकार खो सकते हैं।  

सोशल मीडिया के अतिवाद के खिलाफ प्रस्तावित पहरेदारी तभी कारगर हो पाएगी, जब कानूनों का दुरुपयोग न हो और उनकी भी कारगर निगरानी हो। अन्यथा अंतहीन तकनीक कोई-न-कोई राह निकालकर नए रूप में सोशल मीडिया को सामने ला खड़ा करेगी, जो और भी खतरनाक होगी। अतिवादी राह से आए विचार हमेशा उलटी दिशा में ले जाते हैं। चूंकि सोशल मीडिया विचारों की अभिव्यक्ति का ही जरिया है, लिहाजा इसका असर विचारों की दुनिया पर भी पड़ेगा। पहरेदारी से निकले विचार नुकसान ही ज्यादा पहुंचाते हैं। पहरेदारी की तैयारियों में इस तथ्य को भी गहराई से समझना होगा।
  • कैसा लगा
Comments

स्पॉटलाइट

आखिर क्यों करीना को साइन करना पड़ा था 'No Kissing Clause', अब ऐश्वर्या ने भी लिया ये फैसला

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

व्रत में सेंधा नमक क्यों खाते हैं? आप भी जान लें

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

PHOTOS: ऐश्वर्या राय ने पहनी अब तक की सबसे अजीब ड्रेस, शाहरुख की भी छूट गई हंसी

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

पत्नी को छोड़ इस राजकुमारी के साथ 'लिव इन' में रहते थे फिरोज खान, फिर सामने आया था ‌इतना बड़ा सच

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

नवरात्रि 2017ः इस पंडाल में मां दुर्गा ने पहनी 20 किलो सोने की साड़ी, जानें खासियत

  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

निर्यात बन सकता है विकास का इंजन

Export can become engine of development
  • सोमवार, 25 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

बच्चों को खुला आकाश दीजिए

Give children open sky
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

फेरबदल का सियासी संदेश

political message of Reshuffle
  • सोमवार, 4 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!