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शावेज की जीत के मायने

प्रकाश्‍ा करात

Updated Wed, 17 Oct 2012 09:45 PM IST
Article of prakash Karat on Hugo Shavez
हाल ही में ह्यूगो शावेज चौथी बार वेनेजुएला बोलिवारियाई गणराज्य के राष्ट्रपति चुने गए हैं। इस ऐतिहासिक चुनाव में शावेज ने विपक्ष के उम्मीदवार हैनरिक कैप्रिलेस को 11 फीसदी के अंतर से मात देकर 55.11 फीसदी वोट लेकर जीत दर्ज की। इस चुनाव में करीब 80 फीसदी लोगों ने मतदान किया था, जो अब तक का सबसे ऊंचा मतदान रहा है।
शावेज सबसे पहले 1998 में चुने गए थे और 1999 में नए संविधान के लागू होने के बाद से यह लगातार तीसरा चुनाव है, जिसमें वह विजयी हुए हैं। वह 2019 तक के लिए छह साल के कार्यकाल के लिए निर्वाचित हुए हैं। वेनेजुएला और कुल मिलाकर लैटिन अमेरिका के ही भविष्य के लिए यह चुनाव निर्णायक था।

राष्ट्रपति शावेज ने 1999 से जबसे बोलिवारियाई क्रांति की शुरुआत की है, तभी से एक संघर्ष चल रहा है। जो ताकतें आपस में टकरा रही हैं, उनमें एक तरफ पुराना शासक वर्ग तथा पूंजीवादी कुलीनतंत्र है और दूसरी तरफ शावेज तथा वामपंथी-समाजवादी ताकतों के नेतृत्ववाला लोकप्रिय आंदोलन।

वेनेजुएला एक तेल समृद्ध देश है, जिसके पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार हैं और सऊदी अरब उसके बाद दूसरे नंबर पर आता है। शावेज ने दौलत का पुनर्वितरण करने के लिए तेल भंडारों पर राष्ट्रीय नियंत्रण स्थापित किया है। उन्होंने तेल राजस्व का इस्तेमाल साक्षरता, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आवास जैसे सामाजिक मिशन के लिए धन मुहैया कराने के लिए किया है। इससे गरीबी के स्तरों में भारी कमी आई है।

वर्ष 2006 में शावेज ने घोषणा की थी कि बोलिवारियाई क्रांति का लक्ष्य समाजवाद है। वेनेजुएला चारों तरफ से पूंजीवादी प्रणाली से घिरा हुआ देश है। शावेज की अगुवाई में सरकार ने उद्योग तथा टेलीकम्युनिकेशन के अच्छे-खासे हिस्से का राष्ट्रीयकरण किया है। विदेशी कंपनियों के पास जो बड़ी-बड़ी जमीनें थीं, उनका स्वामित्व वापस ले लिया गया है।

भूमि सुधार के कदम उठाए गए हैं। ‘सामुदायिक परिषदें’ (कम्युनल काउंसिल) कहे जाने वाले स्थानीय स्वशासित निकायों के जरिये नागरिकों की जनतांत्रिक राजनीतिक भागीदारी स्थापित की गई है। एएलबीए (अल्बा) जैसे क्षेत्रीय सहयोग के संस्थान खड़े करने में वेनेजुएला ने अगुवाई की है।

वेनेजुएला लैटिन अमेरिका में वामपंथ की प्रगति की धुरी है और बोलिविया तथा इक्वाडोर उसे समर्थन तथा एकजुटता मुहैया करा रहे हैं। क्यूबा तथा वेनेजुएला के बीच करीबी बिरादराना संबंध तथा सहयोग इन प्रगतिशील बदलावों का आधार हैं।
इस सबसे अमेरिका तथा घरेलू कुलीन बेहद नाराज हैं। इसीलिए शावेज के नेतृत्व वाली सरकार को अस्थिर करने की कई कोशिशें की गई हैं।

लेकिन वेनेजुएलाई क्रांतिकारी प्रक्रिया की जबर्दस्त खासियत यह है कि इसने देश में जनतंत्र को गहन बनाया है। ये प्रतिक्रियावादी साम्राज्यवादपरस्त हलके ही हैं, जो जनता की जनतांत्रिक इच्छा शक्ति को कमतर करने की कोशिश करते हैं, जैसा कि 2002 के विफल सैन्य तख्तापलट में देखने में आया था।

अक्तूबर, 2012 के चुनाव इन्हीं वजहों से महत्वपूर्ण हो गए थे और इसमें बड़े भारी दांव लगे हुए थे। दक्षिणपंथी विपक्ष-राउंडटेबल ऑफ डेमोक्रेटिक यूनिटी (एमयूडी) तमाम तरह के विपक्ष को एक साथ ले आया था, ताकि कैप्रिलेस को एकजुट विपक्षी उम्मीदवार के रूप में खड़ा किया जा सके।

दक्षिणपंथी कट्टरतावादी हलके से आनेवाले कैप्रिलेस ने एक उदार मध्यमार्गी चेहरा पेश करने की कोशिश की थी। पर यह स्पष्ट था कि विपक्ष की जीत का अर्थ होगा, उन उपलब्धियों का पलटना, जो बोलिवारियाई क्रांतिकारी प्रक्रिया के जरिये हासिल की गई हैं। विपक्ष को वित्तीय मदद देने के लिए अमेरिका ने पानी की तरह पैसा बहाया था।

विपक्ष ने यह अभियान शुरू किया था कि वह चुनाव परिणामों से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगा। शावेज और उनकी चुनावी संभावनाओं को लेकर कुप्रचार चलाने के लिए दक्षिणपंथी मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया गया था। गत वर्ष शावेज ने कैंसर से लड़ाई जीती है और अब वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।    

वेनेजुएलाई जनता का जनादेश बोलिवारियाई क्रांतिकारी प्रक्रिया को जारी रखने के पक्ष में आया है। यह झूठा प्रचार पूरी तरह बेनकाब हो गया है कि शावेज राजकीय ताकत के बल पर चुनावों का विकृतिकरण करेंगे। वास्तव में तो वहां की चुनाव प्रणाली की व्यापक सराहना ही हुई है।

चुनावों पर नजर रखने वाले यूनियन ऑफ साउथ अमेरीकन नेशंस (यूएनएएसयूआर) के चुनावी मिशन के प्रमुख ने कहा है कि ‘वेनेजुएला ने इसका उदाहरणीय प्रदर्शन किया है कि जनतंत्र कैसे काम करता है और उसने दुनिया को इस बारे में सीख दी है और यह महत्वपूर्ण है।’

राष्ट्रपति शावेज अब वेनेजुएला को एक सामाजिक रूप से न्यायपूर्ण तथा प्रगतिशील समाज में तबदील करने के बड़े भारी काम के साथ आगे बढ़ सकते हैं। वहां व्यापक रूप से व्याप्त अपराध, महंगाई और नशे के कारोबार जैसी गंभीर समस्याएं हैं, जिनसे निपटा जाना है। उनकी जीत ने यह सुनिश्चित किया है कि दक्षिण अमेरिकी देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग नव-उदारवाद तथा साम्राज्यवादी प्रभुत्व से मुक्त रास्ते पर आगे बढ़ सके।

अल्बा, मरकोसुर और कम्युनिटी ऑफ लैटिन अमेरिकन ऐंड कैरेबियन स्टेट्स प्रगति कर सकते हैं तथा सुदृढ़ बन सकते हैं। वेनेजुएला में हुई यह जीत साम्राज्यवादी देशों की वैश्विक तेल राजनीति के खिलाफ संघर्ष में भी मदद करेगी।

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