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तूफान के गुजर जाने के बाद

पॉल क्रूगमैन (जाने-माने स्तंभकार)

Updated Mon, 05 Nov 2012 11:08 PM IST
after passing storm in us
अमेरिका के महत्वपूर्ण राज्यों में गिने जाने वाले न्यूजर्सी की तरफ सैंडी के तेज सफर के साथ ही वहां इस चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया था कि क्या यह तूफान राष्ट्रपति बराक ओबामा का 'कैटरीना' साबित होगा? क्या इस आपदा से हुए नुकसान के लिए मतदाता उन्हें दोषी मानेंगे और मंगलवार को इसका असर दिखेगा? लेकिन ऐसा बिलकुल नहीं है।
रुझान बताते हैं कि इस तूफान से निपटने की ओबामा की रणनीति को भारी समर्थन मिला है और उन्हें पसंद करने वालों की तादाद में काफी इजाफा हुआ है। वाकई ओबामा प्रशंसा के पात्र हैं। ऑटो बेलआउट की तरह ही उनकी सरकार ने सैंडी के मामले में भी अपने दर्शन का प्रदर्शन किया। यहां दर्शन का मतलब है, संकट के समय सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई जरूरी मदद। वैसे यह लेख लिखते वक्त मेरे घर सहित ग्रेटर न्यूयॉर्क के इलाकों में बिजली नहीं है। यहां पेट्रोल की कमी है और कुछ दूर-दराज वाले इलाके उपेक्षित-से हैं।

दक्षिणपंथी समाचार मीडिया इन सबको काफी तवज्जो दे रहा है। इन परेशानियों को वह आपदा के रूप में प्रदर्शित कर इसे वर्ष 2005 में आए कैटरीना तूफान से भयावह बताने में जुटा हुआ है। लेकिन हकीकत यही है कि दोनों की तुलना नहीं की जा सकती।

मैं इसे बिंदुवार बता सकता हूं और आप देखेंगे कि 2005 का कैटरीना वाकई कितना भयावह था। लेकिन इन दोनों तूफानों की तबाही के अंतर को मैं केवल दो तसवीरों में समेटूंगा। पहला दृश्य न्यू ओरलींस कन्वेंशन सेंटर का है, जहां हजारों लोग दिन भर गंदगी में फंसे रहे। इस वीभत्सता को सभी अमेरिकियों ने टेलीविजन पर देखा, लेकिन शीर्ष अधिकारी बेपरवाह बने रहे। दूसरा दृश्य बाढ़ग्रस्त होबोकेन का है, जहां तूफान से हुई तबाही के अगले दिन भोजन और जल उपलब्ध कराने और आपदा में फंसे लोगों की मदद के लिए नेशनल गार्ड के जवान पहुंचे थे।

अहम बात यह है कि कैटरीना के वक्त सरकार को यह नहीं सूझ रहा था कि ऐसे संकट के समय उसे क्या करना चाहिए, लेकिन सैंडी के समय ऐसा नहीं है। और यह महज इत्तफाक नहीं है कि जब कभी ह्वाइट हाउस पर रिपब्लिकन का कब्जा होता है, तो आपदा से जूझने के मामले में संघीय सरकार की क्षमता बहुत कमजोर नजर आती है। जबकि इसके उलट, जब डेमोक्रेट सत्ता में होते हैं, तो ऐसी मजबूरी नहीं दिखती।

इसे समझने के लिए फेडरल इमरजेंसी मैनेजमेंट एजेंसी (फेमा) के इतिहास पर विशेष तौर पर गौर करने की जरूरत है। जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश के राष्ट्रपति के कार्यकाल के दौरान फेमा नाकारा राजनेताओं का जमावड़ा बन गई थी। साल 1992 में जब इसकी परीक्षा की घड़ी आई, तो यह एजेंसी पूरी तरह विफल साबित हुई। राष्ट्रपति बनने के बाद बिल क्लिंटन ने इस एजेंसी में पेशेवर लोगों की नियुक्ति की और इसकी प्रतिष्ठा बहाल हुई।

पिछले अनुभवों के आधार पर जॉर्ज डब्ल्यू बुश से उम्मीद की जा रही थी कि वह क्लिंटन की उपलब्धियों को बरकरार रखेंगे। लेकिन नहीं, उन्होंने इस एजेंसी के प्रमुख के पद पर अपने प्रचार प्रबंधक जोए अलबॉग को नियुक्त किया। अलबॉग ने बहुत जल्दी आपदा प्रबंधन को प्रांतीय और स्थानीय स्तर पर हस्तांतरित करने के संकेत दे दिए। इस तरह सामूहिक प्रयास को कमजोर किया गया। अलबॉग के निजी क्षेत्र में जाने के बाद उनकी जगह माइकल ब्राउन को इस एजेंसी का प्रमुख बनाया गया। क्लिंटन की तरह ओबामा ने भी फेमा के पेशवराना अंदाज, प्रभाव और प्रतिष्ठा को बहाल किया। लेकिन सवाल यह है कि अगर मिट रोमनी राष्ट्रपति बन जाते हैं, तो क्या वह भी इस एजेंसी को दोबारा निष्प्रभावी नहीं कर देंगे​​? मेरा मानना है कि वह ऐसा कर सकते हैं।  

यह बात सबको पता है कि प्राइमरी चुनाव के दौरान रोमनी जैसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, वह अलबॉग से मिलती-जुलती थी। जैसे उनका कहना था कि आपदा राहत को फिर से प्रांतों और निजी क्षेत्र के हवाले कर दिया जाना चाहिए। स्टीफन कॉलबर्ट की वह पंक्ति इस मामले पर बेहद सटीक है, जिसमें कहा गया है कि जिस राष्ट्र के आधारभूत संसाधन हाल ही में समुद्र में बह गए हों, उससे बेहतर इस बात का जवाब कौन दे सकता है कि उसकी सीमा के भीतर क्या चल रहा है? यहां रोनाल्ड रीगन के उस पुराने मजाक पर गौर करिए, जिसे रिपब्लिकन बहुत पसंद करते हैं।

उन्होंने कहा था कि आपदा के समय यह सुनना सबसे खतरनाक होता है, कि 'मैं सरकार की तरफ से हूं और आपकी मदद के लिए यहां आया हूं।' निश्चित रूप से जब वह सत्ता में रहे, तो उन्होंने एक ऐसी एजेंसी को नष्ट करने में कोर-कसर नहीं छोड़ी, जिसका वास्तविक काम उपर्युक्त पंक्तियों से स्पष्ट है। और हां, यह पाखंड नहीं, तो और क्या है कि दक्षिणपंथी समाचार मीडिया यह कहते हुए ओबामा पर हमले कर रहा है कि उन्होंने लोगों की पर्याप्त मदद नहीं की।

अगर बात राजनीति की करें, तो कुछ रिपब्लिकंश ने पहले से ही रोमनी की संभावित हार का ठीकरा सैंडी पर फोड़ना शुरू कर दिया है। लेकिन ये तर्क बेहद कमजोर हैं। प्रांत स्तरीय रुझानों में हफ्तों से ओबामा की बढ़त के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। लेकिन जैसा मैंने कहा कि एक सीमा तक इस तूफान के चलते ओबामा को फायदा हो सकता है और वह इसके लायक हैं।

वहीं, अगर रोमनी पिछले चार साल से देश के राष्ट्रपति होते, तो सभी तरह की आपदाओं के समय संघीय सरकार का रुख बेहद कमजोर नजर आता। कोई ऑटो बेलआउट संभव नहीं था, क्योंकि रोमनी ऐसी संघीय मदद की मुखालफत करते हैं, जो बचाव के लिए जरूरी होती है। और फेमा जॉर्ज बुश के समय की तरह की अक्षम एजेंसी बनी रहती। इसलिए यह तूफान शायद ही चुनाव की दिशा मोड़ सके, लेकिन अगर ऐसा होता है, तो यह बहुत अच्छे कारणों से होगा।
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