आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

पूर्वोत्तर के विकास की 'असली' कहानी

Yashwant Vyas

Updated Sat, 16 Jun 2012 12:00 PM IST
real story of the development of Northeast
हाल में जारी की गई एक नई रिपोर्ट ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस रिपोर्ट में पूर्वोत्तर राज्यों में मानव विकास की दशा को दयनीय बताया गया है। यह रिपोर्ट योजना आयोग, स्वास्थ्य या मानव संसाधन विकास मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन या यूनिसेफ द्वारा नहीं लाई गई है, बल्कि यह तो उस मंत्रालय की रिपोर्ट है, जिस पर पूर्वोत्तर के विकास की जिम्मेदारी है। यह मंत्रालय है पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय।
इस रिपोर्ट में जहां पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के बीच की स्थितियों की तुलना की गई है, वहीं यह पूर्वोत्तर की शेष भारत से तुलना में भी मददगार साबित होगी। इस रिपोर्ट ने योजना आयोग के उस आकलन की भी पुष्टि की है, जिसमें कहा गया है कि विगत दशकों में असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नगालैंड को पर्याप्त केंद्रीय सहायता मिलने के बावजूद गरीबी रेखा से नीचे वालों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है।

मंत्रालय की पूर्व सचिव जयती चंद्रा के अनुसार फल-सब्जियों के प्रचुर उत्पादन के बावजूद असम, सिक्किम और त्रिपुरा में बड़ी संख्या में महिलाएं एनीमिया से ग्रसित हैं। मातृत्व मृत्यु दर के मामले में देश में सबसे खराब हालत असम की है, जहां प्रति एक लाख प्रसवों के दौरान 381 मांएं मौत का ग्रास बन जाती हैं। साक्षरता के मामले में बेहतर स्थिति के बावजूद पूर्वोत्तर में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की लगातार बढ़ती संख्या चिंताजनक है। कुल मिलाकर स्थिति अत्यधिक दयनीय है। लेकिन इन राज्यों की स्थिति के बारे में देश में व्याप्त सामान्य सोच कुछ अलग ही है। यह धारणा है कि मानव विकास के क्षेत्र में पूर्वोत्तर की स्थिति संतोषजनक है। लेकिन गहराई से देखने पर हकीकत कुछ और ही नजर आती है। पूर्वोत्तर क्षेत्र की वर्तमान स्थिति यह मांग करती है कि इस दिशा में सरकार उपचारात्मक कार्रवाई और लक्षित हस्तक्षेप करे।

मंत्रालय की यह रिपोर्ट वर्ष 1993-94 और वर्ष 2004-05 के आंकड़ों पर आधारित है। हालांकि आवश्यकता पड़ने पर रिपोर्ट में 2009-10 और जनगणना-2011 से प्राप्त जानकारियों का भी उपयोग किया गया है। रिपोर्ट में पूर्वोत्तर क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी परिवारों के उपभोग व्यय में आ रहे एक महत्वपूर्ण बदलाव की ओर संकेत किया गया है। पूर्वोत्तर राज्यों के अधिकांश ग्रामीण परिवार अपनी आय का अधिकांश भाग शिक्षा, परिवहन आदि मदों के बजाय भोजन पर खर्च करते हैं, जबकि शहरी परिवारों की स्थिति इसके ठीक विपरीत है। ये परिवार भोजन की तुलना में अन्य मदों पर व्यय को अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। विभिन्न आय समूहों में व्याप्त विषमता ने भी पूर्वोत्तर के इन राज्यों की समग्र आर्थिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है।

यदि शिक्षा की बात करें, तो नई जनगणना में उस व्यक्ति को शिक्षित माना गया है, जो किसी भाषा को भली प्रकार से समझते हुए पढ़ने और लिखने में समर्थ हो, भले ही उसने औपचारिक शिक्षा ग्रहण नहीं की हो। इस संदर्भ में देखें, तो पूर्वोत्तर के राज्य शिक्षा के मामले में अग्रणी कहे जा सकते हैं। लेकिन स्थितियों में विचलन यहां भी दिखता है। मसलन, जहां अरुणाचल की साक्षरता 66.95 प्रतिशत है और इसका भारत के 35 राज्यों में 34वां स्थान है, वहीं 91.58 प्रतिशत साक्षरता के साथ मिजोरम है, जो राष्ट्रीय स्तर पर केरल और गोवा के बाद तीसरे स्थान पर आता है। एक ही राज्य के विभिन्न जिलों के बीच भी विचलन देखने में आता है। नगालैंड के मोकोचंग जिले की साक्षरता 92.68 प्रतिशत है, तो मोंस जिले में यह मात्र 56.60 प्रतिशत है। ग्रामीण जलापूर्ति के मामले में ऐसा ही अंतर है। अरुणाचल प्रदेश के 80 प्रतिशत ग्रामीण घरों में जहां नल से जल की आपूर्ति होती है, वहीं ग्रामीण असम में ऐसे घर मात्र सात प्रतिशत हैं।

रोचक यह है कि 68 पन्नों की यह दर्दनाक रिपोर्ट उस एजेंसी द्वारा जारी की गई है, जिस पर पूर्वोत्तर की स्थिति में सुधार लाने की जिम्मेदारी है। आंकड़ों की मानें, तो अभी बहुत कुछ करना शेष है। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे राष्ट्रीय प्राथमिकता में आने वाले क्षेत्रों के कार्यक्रम भी धीमे क्रियान्वयन की बीमारी से ग्रसित हैं। यह पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के मूल अधिकारों का उल्लंघन नहीं तो और क्या है। हां, सूचना के अधिकार से यह उम्मीद जरूर की जा सकती है कि वह पूर्वोत्तर क्षेत्र में व्याप्त इस अंधेरे को दूर करते हुए राज्य सरकारों को अच्छी सेवाएं देने को बाध्य करेगा।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

Nokia 3310 की कीमत का हुआ खुलासा, 17 मई से शुरू होगी डिलीवरी

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

फॉक्सवैगन पोलो जीटी का लिमिटेड स्पोर्ट वर्जन हुआ लॉन्च

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

सलमान की इस हीरोइन ने शेयर की ऐसी फोटो, पार हुईं सारी हदें

  • बुधवार, 26 अप्रैल 2017
  • +

इस बी-ग्रेड फिल्म के चक्कर में दिवालिया हो गए थे जैकी श्रॉफ, घर तक रखना पड़ा था गिरवी

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

विराट की दाढ़ी पर ये क्या बोल गईं अनुष्का

  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

Most Read

एक बार फिर बस्तर में

Once again in Bastar
  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

बेकसूर नहीं हैं शरीफ

Sharif is not innocent
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +

छुट्टियों से निकम्मा बनता समाज

Society become lazy by holidays
  • गुरुवार, 20 अप्रैल 2017
  • +

अर्धसैनिक बलों की मजबूरियां

Compulsions of paramilitary forces
  • मंगलवार, 25 अप्रैल 2017
  • +

तीन तलाक को खत्म करने की चुनौती

Challenge to eliminate three divorce
  • सोमवार, 24 अप्रैल 2017
  • +

राष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष की परीक्षा

Examination of opposition in presidential election
  • रविवार, 23 अप्रैल 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top