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एशिया के दो छोरों पर जंगी माहौल

Tavleen Singh

Updated Mon, 10 Sep 2012 12:00 PM IST
two loops on warlike atmosphere
इस समय एशिया के दो छोरों पर कुछ ऐसी हलचल दिख रही है, जिसमें युद्धोन्मादी तत्वों की अधिकता है। पश्चिमी छोर पर इस्राइल और ईरान के मध्य तथा पूर्वी छोर पर उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच तनातनी कुछ ऐसे ही संकेत कर रही हैं। पश्चिम में इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ईरान को चेतावनी देते दिख रहे हैं कि अब उसके परमाणु कार्यक्रम संबंधी मुद्दे को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने का समय समाप्त हो गया। वहीं पूर्वी छोर पर उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग-उन दक्षिण कोरिया और अमेरिका के संभावित हमलों का मुकाबला करने के लिए एक युद्ध आदेश पर हस्ताक्षर कर चुके हैं। सवाल यह उठता है कि एशिया के दो छोरों पर निर्मित हो रहा युद्धोन्मादी वातावरण क्या एशियाई लोगों के हित में है? कहीं यह अमेरिका और चीन द्वारा खेले जा रहे ग्रेट गेम का हिस्सा तो नहीं है?
पिछले दिनों इस्राइल के मिनिस्टर फॉर होमफ्रंट डिफेंस मतान विलनाई ने, जो अब चीन में इस्राइल के राजदूत नियुक्त हो चुके हैं, एक समाचार पत्र को बताया था कि इस्राइल द्वारा यदि ईरान पर हमला किया जाता है, तो यह लड़ाई लगभग एक महीने तक चलेगी, जिसमें लगभग 500 इस्राइली मारे जाएंगे, पर ईरान के परमाणु केंद्रों को नेस्तनाबूद करने के लिए अमेरिका से तालमेल की जरूरत होगी। पता चला है कि इस्राइल शुरू में ईरान की बुनियादी सेवाओं पर एक साइबर हमला करेगा, फिर बैलेस्टिक मिसाइलों के जरिये उसके परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।

हालांकि अमेरिकी प्रशासन की तरफ से इस विषय पर कोई बयान नहीं दिया गया है, लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्री के बयान से इस्राइल के निर्णय पर सहमति की मोहर लगती दिख रही है। विरोधाभास केवल समय को लेकर है। ईरान के प्रति किसी तरह की सहानुभूति नहीं व्यक्त की जा सकती, क्योंकि वह इस्राइल को ‘कैंसर युक्त ग्रंथि’ मानता है और उसका एक मकसद उसे दुनिया से मिटा देने का है। चूंकि सऊदी अरब, इराक और लीबिया ने अपने तेल उत्पादन कार्यक्रम को इन नवनिर्मित स्थितियों के अनुसार चलाना शुरू कर दिया है, इसलिए यह माना जा सकता है कि एशिया का पश्चिमी छोर युद्ध के काफी निकट पहुंच चुका है।

इसी तरह पूर्वी छोर पर उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन चुनौती भरे लहजे में कहते नजर आ रहे हैं कि यदि शत्रुओं ने हमारे भूक्षेत्र और समुद्री क्षेत्र पर एक भी गोला दागा, तो कोरियन पीपुल्स आर्मी उसका मुंहतोड़ जवाब देगी। विगत 20 अगस्त को अमेरिकी और दक्षिण कोरियाई सेनाओं ने दो सप्ताह का एक युद्धाभ्यास शुरू किया था, जिसका उद्देश्य उत्तरी साम्यवाद के खिलाफ रक्षात्मक प्रणाली को मजबूत करना है। जाहिर है कि इस स्थिति में उत्तर कोरिया की तरफ से किसी सहृदयता की उम्मीद नहीं की जा सकती।

अब उत्तर कोरिया एक और परमाणु परीक्षण के लिए तैयार हो चुका है। ऐसी स्थिति में अमेरिका और दक्षिण कोरिया की तथाकथित रक्षात्मक तैयारियां कोरियाई प्रायद्वीप की शांति के लिए अच्छी नहीं। उत्तर कोरिया पहले ही कह चुका है कि दक्षिण कोरिया यदि उसकी सीमा का अतिक्रमण करता है, तो वह फिजिकल रेस्पांस करेगा, जिसका तात्पर्य परमाणु हमले से है। दावा किया जा रहा है कि उत्तर कोरिया अपने तीसरे परमाणु परीक्षण की तैयारियां लगभग पूरी कर चुका है। इसके जरिये उत्तर कोरिया के नए शासक शासन पर अपनी पकड़ मजबूत बनाने के साथ-साथ दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि वे कमजोर नहीं हैं।

गौरतलब है कि किम जोंग उन को जब सत्ता प्राप्त हुई थी, तब पश्चिमी मीडिया में उनकी राजनीतिक क्षमता पर सवाल उठाए गए थे। उल्लेखनीय है कि किम जोंग उन अपने पिता की मृत्यु के बाद उभरे राजनीतिक शून्य को भरने के साथ उत्तर कोरिया की 11 लाख फौज पर, जो कि दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी सेना है, नियंत्रण स्थापित करने में सफल हो रहे हैं। दक्षिण कोरिया और अमेरिका को इस पर ध्यान देने की जरूरत है। बहरहाल पश्चिमी छोर पर गुप्त रूप से ही सही, परमाणु क्षमता युक्त इस्राइल, अड़ियल ईरान तथा पूर्वी छोर पर दोनों कोरियाई देश का शत्रुतापूर्ण रवैया आने वाले समय के लिए शुभ संकेत नहीं है।
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