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परमाणु ऊर्जा से मुक्ति का साहस

Mrinal Pandey

Updated Tue, 08 May 2012 12:00 PM IST
Courage of freedom from nuclear energy
बीते साल 11 मार्च को जापान में भूकंप और सुनामी के कारण बड़ी तबाही फैली और पूर्वोत्तर क्षेत्र के फुकुशिमा में स्थित परमाणु संयंत्र बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। उसके बाद देश के कई जगहों में परमाणु संयंत्र नियमित परीक्षण के लिए क्रमशः बंद होते रहे और परीक्षण के बाद भी उनका संचालन फिर से नहीं हुआ, क्योंकि स्थानीय लोगों ने इनका जमकर विरोध किया।
इस प्रकार जापान में धीरे-धीरे संचालित परमाणु संयंत्रों की संख्या कम होती रही। आखिरकार विगत पांच मई की आधी रात को होक्काइदो स्थित आखिरी परमाणु संयंत्र भी नियमित परीक्षण के लिए बंद हो गया। जापान में वर्ष 1970 में परमाणु संयंत्र का संचालन शुरू हुआ था। उसके 42 साल बाद पहली बार जापान के संपूर्ण परमाणु संयंत्र बंद हो गए।

जापान में पांच मई का दिन बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। बाल दिवस हमारे लिए भविष्य का प्रतीक है। ऐसे अर्थपूर्ण अवसर पर ही जापान परमाणु ऊर्जा से मुक्त हुआ है। अब हालांकि जापान सरकार इस बात की कोशिश कर रही है कि जल्दी से किसी एक परमाणु संयंत्र का संचालन दोबारा शुरू किया जाए। पर फुकुशिमा हादसे के बाद वहां की जनता के बीच परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के प्रति अविश्वास बढ़ गया है।

जापान के लोगों की यह आशंका स्वाभाविक है, क्योंकि फुकुशिमा परमाणु संयंत्र की क्षतिपूर्ति अभी तक थोड़ी ही हुई है। वहां से आज भी बड़े पैमाने पर विकिरण होता रहता है। फुकुशिमा के लोग अब भी कमोबेश परमाणु विकिरण का सामना कर रहे हैं। ऐसे में दूसरे परमाणु संयंत्रों को दोबारा शुरू करना उस खतरे को दोहराने जैसा ही होगा।

जापान में परमाणु ऊर्जा के खिलाफ कितना क्षोभ और गुस्सा है, इसका पता इसी से चलता है कि विगत पांच मई को आखिरी परमाणु संयंत्र के बंद होने की सूचना पर पांच हजार से अधिक लोग टोक्यो में इकट्ठा हो गए और उन लोगों ने इस पर खुशियां मनाईं। इसे अजीब संयोग कह सकते हैं कि जब खासकर विकसित विश्व ऊर्जा के लिए परमाणु पर अपनी निर्भरता बढ़ाना चाहता है, तब जापान फिलहाल इससे मुक्ति पा चुका है।

परमाणु ऊर्जा रहित समाज की स्थापना के लिए जापान आज एक महत्वपूर्ण संक्रांति-काल में है। अब जापान में गरमी का मौसम शुरू हो रहा है। यदि देश के संपूर्ण परमाणु संयंत्र बंद ही रहेंगे, तो जनता को बिजली की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ेगा। पिछले साल के हादसे के बाद से जापान के प्रत्येक घर और कंपनी में बिजली के कम से कम इस्तेमाल की लगातार कोशिश हो रही है। अब इस कोशिश को और भी बढ़ाकर असुविधा झेलने के लिए तैयार रहना पड़ेगा। आज जापान की जनता दुविधा में पड़ गई है कि एक ओर परमाणु संयंत्रों की सुरक्षा के प्रति उनके मन में गहरा संशय है, तो दूसरी तरफ बिजली की कमी की घनघोर आशंका भी है।

फिर सवाल केवल निजी इस्तेमाल का ही नहीं है। बिजली की कमी से उद्योग-धंधे भी प्रभावित होंगे। वैसे भी जापान की आर्थिक स्थिति कोई बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में बिजली का यह अभाव उसे इस मोरचे पर और भी ज्यादा प्रभावित करेगा। लेकिन जापान को अब ऊर्जा के मामले में कोई दूरगामी कदम उठाना ही पड़ेगा। उसे न सिर्फ मनुष्य और पर्यावरण, दोनों के लिए अनुकूल ऊर्जा विकल्प उपलब्ध करने का संकल्प लेना होगा, बल्कि ऐसी नीतियां बनानी होंगी कि भविष्य में भी जापान को परमाणु ऊर्जा की जरूरत महसूस न हो।

इसी तरह जापान के आम नागरिकों को जहां ऊर्जा के कम से कम इस्तेमाल के लिए प्रेरित होना होगा, वहीं सरकार को उद्योग क्षेत्र के लिए भी कोई न कोई रास्ता निकालना ही होगा, ताकि परमाणु ऊर्जा के अभाव में किसी अन्य ऊर्जा विकल्प का इस्तेमाल करते हुए देश की औद्योगिक गति को बरकरार रखा जा सके।

जहां तक दूसरे विकल्पों की बात है, तो सरकार को प्राकृतिक गैस और ताप संयंत्र से सहायता लेते हुए देश में प्राकृतिक ऊर्जा के तीव्र विकास की कोशिश करनी चाहिए। उम्मीद करनी चाहिए कि निकट भविष्य में जापान अपनी तकनीक का पूरा उपयोग कर प्राकृतिक ऊर्जा का विकास और ऊर्जा की बचत के मामले में विश्व का नेतृत्व करेगा।
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