आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

580... और ऐसी बेरुखी

किश्वर देसाई

Updated Sun, 23 Dec 2012 12:17 AM IST
580 and such indifference
दिल्ली में एक 23 साल की युवती के साथ दरिदंगी से भरा जो हादसा हुआ है, उसके बाद यह सवाल खड़ा होने लगा है कि ऐसे विकास का क्या मतलब है, जिसमें देश की आधी आबादी की सुरक्षा का ख्याल न रखा जा रहा हो। ऐसी जानकारियां मिल रही हैं कि जिस लड़की के साथ यह हादसा हुआ है, उसके पिता ने बेहद कमजोर आर्थिक हालत होने के बावजूद इस उम्मीद में उसको पढ़ाया कि वह भविष्य में अपने पैरों पर खड़ी होकर परिवार की मदद कर पाएगी।
महिलाओं के लिए सुरक्षा और विकास के मुद्दे एक साथ चलते हैं। हर देश में नियोक्ता, चाहे वह निजी हो या सरकारी, महिलाओं के कार्यस्थल पर सुरक्षा सुनिश्चित करता है। दरअसल, समाज में औरतों की जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं। उनसे उम्मीद की जाती है कि वे घर संभाले, ऑफिस का काम करें और अपने लिए भी समय निकाले। इसलिए यह समाज का दायित्व है कि वह महिलाओं को एक सुरक्षित माहौल दे।

समस्या का एक दूसरा पहलू यह भी है कि ज्यादातर युवा लड़कियों को अपने जीवन में छेड़छाड़ या यौन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, लेकिन वे शिकायत नहीं करतीं, क्योंकि वे जानती हैं कि इसका कोई नतीजा नहीं निकलेगा। कई बार महिलाएं बेइज्जती के डर से भी पुलिस स्टेशन जाने से हिचकती हैं। इन हालात में जनता का गुस्सा वाजिब है। यह देखकर हैरानी होती है कि इस हादसे पर अब तक किसी भी वरिष्ठ राजनेता की कोई टिप्पणी सामने नहीं आई है।

संभव है कि ये नेता इसे एक आकस्मिक घटना मान रहे हों। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। ऐसी घटनाएं देश में बार-बार हो रही हैं। चूंकि ताजा हादसा राजधानी के बीच में हुआ, इसलिए यह सुर्खियों में आ गया। इसमें शीला दीक्षित की गलती नहीं है, लेकिन चूंकि सरकार उन्हीं की है, इसलिए वह इसकी नैतिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकतीं। अकेले दिल्ली में एक वर्ष में बलात्कार के लगभग 580 मामले पंजीकृत किए गए हैं। दरअसल, पुरुषों को कानून का कोई डर नहीं है।

ऐसे हादसे समाज के लिए भी कोई कम खतरनाक नहीं हैं। जिस समाज में ऐसे हादसे को अंजाम देने वाले कुंठित युवा रह रहे हों, वहां इस बात की बेहद जरूरत है कि उनको सही रास्ते पर लाया जाए। शायद ये वही लोग हैं, जिनका राजनीतिक दल अपने प्रचार में या दंगों को भड़काने में उपयोग करते हैं। अपने भविष्य की चिंता किए बगैर जी रहे इन युवाओं को परखना और उनको मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग देना बेहद जरूरी है।

इसके अलावा सांसदों और विधायकों को अपने क्षेत्रों में जाकर लोगों के रहन-सहन की पड़ताल और सड़कों, गलियों, बसों और खासतौर पर मॉल्स के सामने सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करनी चाहिए। पूरे समाज में हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति भी चिंताजनक है। लड़कियों को एक वस्तु समझने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए कहीं से तो शुरुआत करनी ही होगी। इसके लिए संसद के विशेष सत्र की जरूरत नहीं है।

पहले परिवार और फिर क्रमशः शिक्षा संस्थान, कॉर्पोरेट और सरकार में सुधारों की पहल करनी होगी। अच्छी बात यह है कि इन मामलों में प्रिंट मीडिया कुछ हद तक अपने दायित्वों को समझता है, लेकिन अन्य मीडिया को भी इस पर गौर करना चाहिए। जहां तक ऐसे मामलों में सजा की बात है तो इसका फैसला न्यायाधीश के विवेक पर छोड़ देना चाहिए। मामले की गंभीरता और समाज में जाने वाले संदेश के मद्देनजर जघन्य मामलों में मृत्युदंड भी दिया जा सकता है।

इन हालात में बदलाव लाने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए। बहुत से देशों में मीडिया के जरिये बदलाव लाए गए हैं। 2 जी मामले में मीडिया ने जैसी भूमिका निभाई थी, कुछ वैसी ही उम्मीद इस मामले में भी है। कुछ समय पहले इंग्लैंड में मीडिया के दबाव के चलते ही सरकार को ‘सेरा का कानून’ नामक एक कानून पारित करना पड़ा था, जिसमें ऐसे लोगों का डाटा बेस तैयार किया गया था जो बलात्कार जैसे मामलों में संलग्न पाए गए थे। इस डाटा बेस को आम आदमी की पहुंच में लाया गया। इससे समाज में सतर्कता बढ़ी। शायद भारत को भी ऐसे ही किसी कानून की जरूरत है।

  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

ऋतिक की पार्टी में पहुंची एक्स वाइफ सुजैन, 'काबिल' देखकर पति को भर लिया बाहों में

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

हर लड़के के लिए ये 6 काम है जरूरी, तभी खुश रहेगी गर्लफ्रेंड

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

काबिल ऋतिक की 8 नाकाबिल फिल्में, हो गई थी फ्लॉप

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

अमिताभ नहीं अब ये हीरो करेगा 'केबीसी' को होस्ट

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

वीवो का V5 प्लस भारत में लॉन्च, फ्रंट में लगे हैं दो कैमरे

  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

Most Read

न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं

Want justice, not compensation
  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

अर्द्धसैनिक बल और सेना में फर्क

difference in Paramilitary forces and the army
  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

बजट में दिखेंगे नोटबंदी के फायदे

Advantage of Demonitisation will show in Budget
  • सोमवार, 23 जनवरी 2017
  • +

चीन की बराबरी के लिए सुधार जरूरी

Reforms is must for china equipollence
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +

यह कैसी आचार संहिता है

What type of this Code of Conduct
  • रविवार, 22 जनवरी 2017
  • +

चुनाव सुधार के रास्ते के रोड़े

Hurdel of Election reforms
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top