आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

तब के पिता और अब के

Vinit Narain

Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
मैं इस सर्वे से सहमत हूं कि आज के बच्चों को पिता का साथ ज्यादा मिलता है। चूंकि मैं पूर्व बेटा और आजकल पिता चल रहा हूं, इसलिए यह बात अच्छे ढंग से जानता हूं। बचपन याद आता है, तो पिता का साथ उसी दृश्य में नजर आता है, जबकि वे किसी की नकली-असली शिकायत पर मुझे झाड़ने के लिए एक पैर और दोनों हाथों से तैयार रहते थे। पिता का सामीप्य बस मारपीट के दौरान ही मिलता था। लाड़ करना, पुचकारना, गोद में उठाना जैसे कमाल भी होते तो थे, मगर पिता इन सारे ढोंग से अपने को दूर ही रखते थे।
जब शिकायत की एवज में पिता तमतमाते हुए हम पर हमला करते थे, तो शिकायती सहित पूरा मोहल्ला बचाव में उतर आता था कि क्या इतनी-सी बात पर बच्चे की जान ले लोगे! यह सुन पिता पर पितापना और हिलोरें मारने लगता। इधर लोग बच्चे को बचा रहे हैं, उधर बापजी इस कोशिश में मरे जा रहे हैं कि एकाध लात तो और जड़ ही दूं।

मुझे बाप को पहचानने के लिए एक हरकत बचपन में करनी पड़ती थी... कि उनके पाजामे को पकड़ कर लटक जाया करता था। जो मुझे गोद में उठा लेता था, वह किसी और का बाप रहता था, क्योंकि मेरे पिता तो पाजामे को छूते ही मुझे झिड़क देते थे। उनकी इस हरकत पर सार्वजनिक रूप से भले ही भर्त्सना की जाती हो, पर प्राइवेट बैठकों में तारीफ ही मिलती कि देखो, इतनी शरम-हया तो है कि बड़े-बुजुर्गों के सामने अपनी औलाद को उठाया तक नहीं। मुझे यह समझ में नहीं आया कि अपनी औलाद को गोद में न उठाना किस संस्कार की देन है।

तब पिता की यह भी आदत रहती थी कि जवान हो रहे बेटे से सीधे वार्तालाप नहीं करते हुए बेटे की मां को उपयोग में लाते थे...‘आजकल दिमाग ठिकाने पर नहीं है...कलपू के छोरे के साथ कुछ ज्यादा ही घुट रही है...पढ़ाई-वढ़ाई तो ताक पर रख दी है...भीख मांगेंगे या जेल जाएंगे। जरा कंट्रोल में रखो।’ हिदायत देने के बाद पिता फारिग हो जाते और मां बेचारी ‘देख बेटा... तेरे पिताजी कह रहे थे...।’ और बेटा पूरा मजमून जान लेता था। पिता से पहले हम खा नहीं सकते थे, उनसे पहले सो नहीं सकते थे, और उनके जागने के बाद तक यदि आप सो रहे हैं, तो ‘पूजा’ की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में हो जाती थी।

अब तो आप भी सहमत होंगे कि आज के पिता बच्चों को ज्यादा समय देते हैं। बच्चे भी पिता का साथ ज्यादा चाहते हैं, क्योंकि आज के बाप बच्चे को बच्चा नहीं, अपना बाप मानते हैं।
  • कैसा लगा
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

यहां खुद कार चलाकर ऑपरेशन थियेटर में जाते हैं बच्चे

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

इस नवरात्रि दिल्ली के इन रेस्तरां की जरूर करें सैर, व्रत रखने वालों की होगी मौज

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

व्रत में सेहत और स्वाद दोनों का ख्याल रखेगा आलू केला पकौड़ा

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

नवरात्रि 2017: आज पहने 'हरे' कपड़े, वेस्टर्न के साथ दें इंडियन टच

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

अगर आपकी गर्लफ्रेंड के हैं बहुत 'मेल फ्रेंड्स' तो होंगे ये फायदे

  • शुक्रवार, 22 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

एक फीसदी बनाम निन्यानबे फीसदी

One percent vs ninety nine percent
  • शनिवार, 16 सितंबर 2017
  • +

द. एशिया में भारत की नई भागीदारी

India's new partnership in South Asia
  • सोमवार, 18 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

स्कूलों का हाल इतना बुरा क्यों है?

Why school's situation is so bad?
  • रविवार, 17 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!