आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

सिविल सोसाइटी के सरोकार

Vinit Narain

Updated Fri, 10 Aug 2012 12:00 PM IST
Concerns of civil society
हमारे देश के कुछ विशिष्ट बुद्धिजीवियों द्वारा चलाया गया पद है, सिविल सोसाइटी। इसमें समाज का मतलब केवल उनके अपने जैसे लोग ही होता है। हमारे अंगरेजी पत्रकार-बुद्धिजीवी पीएलयू (पीपुल लाइक अस) नामक मुहावरे का प्रयोग करते ही रहे हैं। इसीलिए जब बुद्धिजीवी किसी विषय पर कुछ कहते हैं, तो उसमें आम जनता की आशा-आकांक्षा प्रतिबिंबित नहीं होती। यह उन हिंदी कलमकारों पर भी लागू है, जो दिन-रात पूंजीवाद, बाजारवाद या धर्मनिरपेक्षता पर लिखते हैं। इन विजातीय मुहावरों का जनता की अपनी समझ से दूर-दूर तर जुड़ाव नहीं है। कलमकार अपनी आइडियोलॉजी को ‘जनवाद’ का मतवादी नाम जरूर देते हैं। मगर जनता के वास्तविक स्वर से उन्हें वैसी ही वितृष्णा है, जितनी किसी तानाशाह को।
इसीलिए सिविल सोसाइटी या बुद्धिजीवी और जनता प्रायः दो अलग समूह हैं। बुद्धिजीवी प्रगल्भ-प्रभावशाली तथा जनता बेजुबान-प्रभावहीन। लोकतंत्र में जनता का एक सीमित महत्व तो है, किंतु नीति-निर्णयों में जन-भावनाओं की पूछ नहीं होती। वहां बुद्धिजीवी की चलती है। आठ-दस चतुर-संगठित बुद्धिजीवी भी कोई नियम, निर्देश आदि बनवा लेते हैं। उद्योग, व्यापार जगत की हस्तियां केवल आर्थिक, व्यापारिक विषयों में ध्यान रखती हैं। अन्य मामलों पर कुछ बुद्धिजीवी ही अपनी सनक से तय करते-करवाते रहते हैं। शिक्षा और संस्कृति संबंधी मामलों में इसके उदाहरण देखे जा सकते हैं।

अतः बुद्धिजीवी एक विशेषाधिकार संपन्न तबका है। इस तबके में प्रवेश पाने के लिए विशेष विचारधारा का समर्थक होना जरूरी है। यह विचारधारा ‘प्रतिष्ठान विरोधी’ रेडिकल होती है, चाहे इसके प्रतिनिधि सरकारी संस्थानों में उच्च पद स्थापित क्यों न हों। कोई विद्वान उस प्रचलित रेडिकलिज्म से भिन्न कितनी भी विवेकशील बात कहे, बुद्धिजीवी उसे अपना मानने से इनकार कर देते हैं।

कोई विश्व-प्रसिद्ध सम्मानित लेखक भी क्यों न हो, यदि वह बुद्धिजीवी समाज की लाइन से हटकर कुछ कहे, तो वह सरसरी तौर पर खारिज है। उसकी बात का नोटिस तक नहीं लिया जाता। जबकि बुद्धिजीवी वर्ग की अनुशंसित विचारधारा मानने वाला चालू टिप्पणीकार, नया रंगरूट, एक्टिविस्ट लेक्चरर, रिटायर्ड अफसर आदि कोई भी किसी भी मंच पर पदासीन किया जा सकता है। यानी विचारधारा का टिकट बुद्धिजीवी समाज में गिने जाने हेतु आवश्यक है। फिर आप दुनिया के किसी भी विषय पर विचार देने योग्य हो जाते हैं! चाहे उसके अध्ययन से आप का दूर-दूर तक संबंध न रहा हो।

उदाहरणार्थ, किसी नक्सली को जेल दिए जाने पर कोई अभिनेत्री भी कह देती है कि न्यायालय ने ‘एकतरफा फैसला’ दिया, क्योंकि बुद्धिजीवी समाज यही मानता है। इसका दूसरा पहलू यह भी है कि बुद्धिजीवी केवल चुनी हुई बातों पर ही घोषणाएं करता है। वह चुने हुए उत्पीड़ितों का पक्ष लेता है। जिनका पक्ष लेता है, उन के संबंध में असुविधाजनक तथ्यों को छिपाता भी है। वही बुद्धिजीवी वर्ग एक ओर, नरेंद्र मोदी को पदच्युत करने के लिए किसी प्रमाण की जरूरत नहीं समझता, तो दूसरी ओर, प्रमाणिक आतंकवादियों, ह्त्यारे नक्सलियों को भी सजामुक्त करने के लिए हर कुतर्क गढ़ता है। यह अनुपात-विहीनता और पक्षपात जनता की भावना के विरुद्ध है, मगर ‘जनवादी’ बुद्धिजीवियों की आम राय है!

बुद्धिजीवियों की चिंताओं के चयन का आधार समझना जरूरी है। नहीं तो, हमारी गरदन पर जेहादी, नक्सली और न जाने कितने आक्रमणकारी चढ़े जा रहे हैं। विविध प्रकार की भारत-विरोधी बाहरी शक्तियां और अंदर में नक्सलवादी, आतंकवादी हर तरह के छल का उपयोग करते हैं। इसीलिए इनके हमलों का पहले से अनुमान नहीं किया जा सकता।

यह समझना जरूरी है कि बिना वैचारिक समर्थन के आतंकवाद बहुत दिन टिक नहीं सकता। इसीलिए हर आतंकवादी अभियान अपने गिरोह के वैचारिक प्रशिक्षण के प्रति कटिबद्ध रहता है। यही वह बिंदु है, जहां बुद्धिजीवी वर्ग उन्हें जाने-अनजाने मदद पहुंचाता है। अतः अभिव्यक्ति स्वतंत्रता और सामाजिक विध्वंस या देशद्रोह के सक्रिय प्रयत्न के बीच सीमारेखा तय करना जरूरी है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

Open Letter: हीरोइन का अपडेटेड वर्जन नाकाबिले बर्दाश्त क्यों?

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

'रामायण' बनाने वाले की पोती तस्वीरें वायरल

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

यह खिलाड़ी साबित हुआ भारत के लिए विभीषण

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

खुले में नहाती हैं सुष्मिता, सैफ को है बाथरूम से प्यार

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

ऑस्कर की 'कीमत' सिर्फ 10 अमेरिकी डॉलर

  • शनिवार, 25 फरवरी 2017
  • +

Most Read

कांग्रेस के हाथ से निकलता वक्त

Time out from the hands of Congress
  • मंगलवार, 21 फरवरी 2017
  • +

पाकिस्तान पर कैसे भरोसा करें

How Trust on Pakistan
  • शुक्रवार, 24 फरवरी 2017
  • +

नेताओं की नई फसल

The new crop of leaders
  • गुरुवार, 23 फरवरी 2017
  • +

भद्र देश की अभद्र राजनीति

Vulgar politics of the Gentle country
  • बुधवार, 22 फरवरी 2017
  • +

पड़ोस में आईएस, भारत को खतरा

IS in neighbor, India threat
  • सोमवार, 20 फरवरी 2017
  • +

वंशवादी राजनीति और शशिकला

Dynastic politics and Shashikala
  • रविवार, 19 फरवरी 2017
  • +
TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top