आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

जनांदोलन विफल क्यों हो जाते हैं

Vinit Narain

Updated Mon, 06 Aug 2012 12:00 PM IST
Jaiprakash Narayan Mass Movement Fail BJP Congress
इन दिनों आंदोलनों को लेकर देश में गहन बहस छिड़ी है। दो बातें कही जा रही हैं। एक, जयप्रकाश नारायण के बाद कोई बड़ा आंदोलन इस देश में नहीं हुआ और दो, जो छोटे-छोटे अहिंसक आंदोलन उभरते हैं, वे प्रायः विफल हो जाते हैं। पहली बात आंशिक तौर पर सच है। राजनीतिक सत्ता में परिवर्तन की दृष्टि से यकीनन जयप्रकाश आंदोलन के बाद दूसरा वैसा आंदोलन नहीं हुआ। लेकिन बीती सदी के आखिर में रामजन्मभूमि आंदोलन ने भी पूरे देश में आलोड़न पैदा किया। पूरी भारतीय राजनीति का वर्णक्रम उससे बदल गया था।
चुनावी अंकगणित में हाशिये पर पड़ी भाजपा भारतीय राजनीति का केंद्र बन गई। आजादी के बाद के इन दोनों आंदोलनों की पृष्ठभूमि, विचारधारा और लक्ष्यों में मौलिक भिन्नता थी, लेकिन कांग्रेस की चूल हिलाने तथा आंदोलन की शक्तियों को सत्ता तक पहुंचाने में दोनों कामयाब रहे। हां, जयप्रकाश आंदोलन की तरह भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी आदि को अंततः सरकार-विरोधी प्रचंड राजनीतिक आंदोलन में परिणत करने का इतिहास दोहराया नहीं जा सका।

इस प्रकार आजादी के बाद दो बड़े राजनीतिक परिवर्तन, जिनमें एक तो शुद्ध आंदोलन से निकला था और दूसरा राजनीतिक प्रतिष्ठान के अंदर के विद्रोह से बाहर आया, विफल हो गया। उसके बाद परिवर्तन के लंबे आंदोलन की मानसिकता तैयार करने का जज्बा ही विलुप्त-सा हो गया। ऐसा नहीं है कि भारत में जनांदोलन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां नहीं हैं।

वास्तव में भूमंडलीकरण के बाद आर्थिक, राजनीतिक, प्रशासनिक, सामाजिक, सांस्कृतिक- हर स्तर पर दुश्वारियां बढ़ रही हैं। किंतु वर्तमान राजनीतिक शक्तियों के अंदर आंदोलन का संस्कार मानो मृत हो चुका है। यही कारण है कि अन्ना हजारे और रामदेव जैसे अराजनीतिक लोगों की बातों और मीडिया में उसके प्रचार के कारण लोगों का आकर्षण उनकी ओर बढ़ा। हालांकि अन्ना समूह धरातल पर जनता के बीच पैठ नहीं बना पाया, और अब एक वर्ष तीन महीने के अंदर छह अनशनों के बाद राजनीतिक विकल्प देने का लक्ष्य घोषित करने के बाद परिवर्तन की लंबे आंदोलन की जिन्हें उम्मीद होगी, वे भी अब नाउम्मीद हो गए होंगे।

बल्कि अब तो अन्ना ने अपनी टीम को ही खत्म कर दिया है। रामदेव भी लंबा आंदोलन कर पाएंगे, इसमें संदेह है। वस्तुतः इन दो अभियानों की व्यापक मीडिया कवरेज के कारण यह तथ्य ओझल हो रहा है कि देश में अलग-अलग मुद्दों, समस्याओं को लेकर छोटे-बड़े अहिंसक अभियान चल रहे हैं। माओवादी भी देश के करीब 20 प्रतिशत भूगोल में हिंसक संघर्ष कर रहे हैं।

यह याद रखना जरूरी है कि आजादी के तुरंत बाद गांधी जी ने साफ किया था कि आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आजादी के लिए राजनीतिक आजादी से कहीं ज्यादा परिश्रम और सघन संघर्ष की आवश्यकता है। दुर्भाग्यवश, गांधी जी की हत्या हो गई और आजाद भारत के पुनर्निर्माण के लिए रचना और संघर्ष की अपरिहार्य द्विआयामी दीर्घकालीन जनांदोलन की शुरुआत तक नहीं हो सकी।

गांधी के सामने यह बिल्कुल साफ था कि रचना और संघर्ष का सघन आंदोलन सत्ता के लिए चुनावी राजनीति करने वाले दल के बूते नहीं हो सकता। इसीलिए उन्होंने कांग्रेस को भंग कर उसके कार्यकर्ताओं को गांवों में जाने का ssssसुझाव दिया था। जयप्रकाश नारायण ने बाद में गांधी की उस धारा को आगे बढ़ाने की कोशिश की। लेकिन देश में राजनीति की बढ़ती ताकत और इस दिशा में पर्याप्त काम न किए जाने के कारण व्यापक परिवर्तन की अहिंसक गैर-राजनीतिक आंदोलन की संभावना दिनोंदिन कमजोर होती गई। इसलिए आज बहस इस बात पर है कि यह संभावना फिर पुनर्जीवित होकर कैसे सशक्त हो।

स्पष्ट है कि भारत की संपूर्ण विविधता और उससे उत्पन्न आकांक्षाओं का पूर्ण प्रतिनिधित्व करने वाले लक्ष्य, उसके अनुरूप व्यापक वैचारिक जन जागरण, निष्ठावान समर्पित नेतृत्व और कार्यकर्ता का निर्माण तथा इसके साथ रचना और उसके रास्ते आने वाली बाधाओं के विरुद्ध अहिंसक संघर्ष द्वारा ऐसा संभव होगा। इस समय का कोई अभियान या आंदोलन इस कसौटी पर खरा नहीं उतरता।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

जब भरी पार्टी में हीरो ने कर लिया था अमृता सिंह को किस और फिर...

  • शुक्रवार, 23 जून 2017
  • +

प्रेम के मामले में परेशानियाें से भरा रहेगा सप्ताह का पहला दिन, ये 3 राशि वाले रहें संभलकर

  • शुक्रवार, 23 जून 2017
  • +

फिर नए अवतार में दिखीं सुहाना, इस बार का अंदाज पहले से भी ज्यादा स्टनिंग

  • शुक्रवार, 23 जून 2017
  • +

शेविंग के बाद भूलकर न लगाएं 'आफ्टरशेव', होगा ये नुकसान

  • शुक्रवार, 23 जून 2017
  • +

UP Board : 9वीं से 12वीं तक अब होगी 'योग' की पढ़ाई

  • शुक्रवार, 23 जून 2017
  • +

Most Read

एक सपने की मौत!

Death of a dream!
  • सोमवार, 12 जून 2017
  • +

सामरिक आत्मनिर्भरता की ओर

Toward strategic self-reliance
  • शनिवार, 27 मई 2017
  • +

किसानों को बचाने की लड़ाई

Fight to save farmers
  • शनिवार, 10 जून 2017
  • +

पीछे क्यों हट गए ट्रंप

Why trump go behind
  • शुक्रवार, 9 जून 2017
  • +

भारत-पाक मुकाबला और तनाव

Indo-Pak match and Stress
  • सोमवार, 5 जून 2017
  • +

जेनेरिक दवाएं दे सकती हैं जिंदगी

Generic drugs can give life
  • मंगलवार, 30 मई 2017
  • +
Live-TV
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top