आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

जयपुर

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

राजस्थान +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

नेशनल ग्रिड से बन सकता है संतुलन

Vinit Narain

Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
Former Union Power Minister Suresh Prabhu National Grid
अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय विद्युत मंत्री रहे सुरेश प्रभु देश में बिजली क्षेत्र के सुधार कार्यक्रमों के जनक माने जाते हैं। विद्युत कानून, 2003 भी प्रभु के प्रयासों से ही बना था। अब तक के सबसे सफल विद्युत मंत्रियों में गिने जाने वाले सुरेश प्रभु से हरीश लखेड़ा की बातचीत -
प्र. सोमवार और मंगलवार को उत्तर से लेकर पूर्वोत्तर भारत में जिस तरह ग्रिड नाकाम हो गए थे, यह क्या दर्शाता है?
उ. इस ब्लैक आउट को टाला जा सकता था। यदि पहले से तैयारी होती, तो यह घटना नहीं होती। तैयारी का मतलब केंद्र व राज्य यदि बिजली की जरूरतभर उत्पादन कर लेते, ट्रांसमिशन लाइनों की क्षमता बढ़ा देते, तो ब्लैक आउट कभी न होता।

प्र. केंद्रीय विद्युत मंत्रालय इसके लिए उत्तर प्रदेश सहित कुछ राज्यों के ग्रिड से ओवर ड्रॉ को मुख्य कारण मान रहा है। आपका अनुभव किस तरह का रहा है?
उ. यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि ब्लैक आउट के क्या कारण रहे हैं। पर यह बात साफ है कि एनडीए के शासन में बिजली क्षेत्र के लिए जो भी कदम उठाया गया था, उस पर काम नहीं किया गया। मैंने देशभर में फैले पांचों ग्रिडों को आपस में जोड़ने के लिए नेशनल ग्रिड बनाने की योजना शुरू की थी। वह अब तक पूरी नहीं हो पाई है। यदि पांचों ग्रिड आपस में जुड़ जाते, तो एक क्षेत्र की सरप्लस बिजली को दूसरे क्षेत्र में भेज सकते थे।

प्र. इनमें से ऐसी कौन-कौन सी अहम योजनाएं थीं, जिन पर काम आगे नहीं बढ़ सका?
उ. मैने बिजली क्षेत्र के लिए एक कार्ययोजना तैयार की थी। इसमें बिजली का उत्पादन बढ़ाने, ट्रांसमिशन लाइनों को सुदृढ़ करने से लेकर वितरण व्यवस्था को सुधारना था। तब योजना बनी थी कि हर साल उत्पादन क्षमता में 30 हजार मेगावाट का इजाफा किया जाएगा, लेकिन आज भी सालाना 10 हजार मेगावाट से ज्यादा इजाफा नहीं हो रहा है। हमने त्वरित विद्युत विकास व सुधार कार्यक्रम (एपीडीआरपी) तैयार किया, जिसमें 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। इसके तहत राज्यों को अपने वितरण नेटवर्क को सुधारने के लिए पैसा दिया गया। राज्यों से ट्रांसफॉर्मर और तार बदलने के साथ बिजली चोरी रोकने के लिए कहा गया। जो राज्य जितनी ज्यादा चोरी रोकते, उन्हें उतना ज्यादा पैसा देने का प्रावधान किया गया। घाटे में चल रहे विद्युत बोर्डों की माली हालत सुधारने के लिए बांड जारी करने से लेकर उन्हें तीन-तीन कंपनियों में बदलने की हमने पहल की। हमने विद्युत एकीकृत प्रणाली योजना बनाई थी।

प्र. विद्युत क्षेत्र में कार्यरत मानव संसाधन के विकास के लिए आपकी क्या योजना थी?
उ. प्रशिक्षण क्षेत्र में भी एनडीए शासन में ही काम शुरू हुआ। पहली बार ऐसा हुआ, जब लाइन मैन तक को प्रशिक्षण दिया गया। अफसरों के लिए पहली बार एमबीए-पावर का कोर्स शुरू किया गया। शोध और विकास पर भी पहली बार काम शुरू किया गया था।

प्र. आज भी देश 13 फीसदी की बिजली कमी से जूझ रहा है। बिजली चोरी का औसत भी ज्यादा है। आपकी नजर में क्या रास्ता है?
उ. बिजली को लेकर केंद्र और राज्यों को मिलकर काम करना होगा। यह सही है कि बिजली को लेकर पहली जिम्मेदारी राज्यों की है, लेकिन केंद्र को भी मददगार की भूमिका निभानी होगी। एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप करने से काम नहीं बनेगा। बिजली क्षेत्र के लिए कोयला व गैस की कमी को दूर करना होगा। इसी तरह केंद्र के मंत्रालयों- बिजली, वित्त, पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस, कोयला, अक्षय ऊर्जा समेत सभी संबंधित मंत्रालयों में समन्वय बनाना होगा। इसके साथ ही हमें किल्लत दूर करने के लिए जल विद्युत व अक्षय ऊर्जा के अलावा समुद्र के पानी से भी बिजली बनाने के लिए सोचना चाहिए।
  • कैसा लगा
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

शादी के दिन करोड़ों के गहनों से लदी थीं पटौदी खानदान की बहू, यकीन ना आए तो देखें तस्वीरें

  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

16 की उम्र में स्टाइल के मामले में बड़े-बड़ों को टक्कर दे रहीं हैं श्वेता तिवारी की बेटी

  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

शाहिद को छोड़ 10 साल बड़े सैफ से शादी को क्यों तैयार हुईं थीं करीना, इसके पीछे है बड़ा राज

  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

इन लड़कों से दूर भागती हैं लड़कियां, लड़के हो जाएं सावधान

  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

रोज चेहरे पर लगाएं प्याज का रस, छूमंतर हो जाएंगे सारे दाग धब्बे

  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

Most Read

फौज के नियंत्रण में है पाकिस्तान

Pakistan is under the control of the army
  • गुरुवार, 21 सितंबर 2017
  • +

कश्मीर की हकीकत को समझें

Understand the reality of Kashmir
  • बुधवार, 20 सितंबर 2017
  • +

एक फीसदी बनाम निन्यानबे फीसदी

One percent vs ninety nine percent
  • शनिवार, 16 सितंबर 2017
  • +

धार्मिक डेरे और सियासी बिसात

Religious tent and political chess
  • मंगलवार, 19 सितंबर 2017
  • +

द. एशिया में भारत की नई भागीदारी

India's new partnership in South Asia
  • सोमवार, 18 सितंबर 2017
  • +

किसानी का हक मांगती महिलाएं

Women seeking farming rights
  • शुक्रवार, 15 सितंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!