आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

महिलाओं के प्रति नजरिया बदलिए

Vinit Narain

Updated Wed, 25 Jul 2012 12:00 PM IST
National Commission for Women Attitude towards women Mentality Dress Code
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ममता शर्मा ने देश में बलात्कार की बढ़ती घटनाओं से मुक्ति के लिए युवतियों को उत्तेजक वस्त्र न पहनने का उपदेश दिया है। उनका समर्थन मध्य प्रदेश के एक मंत्री ने भी किया। यह मानसिकता पहले भी थी, जब महिलाओं को गलत निगाहों से बचने के लिए अपना पूरा शरीर ढकने के लिए कहा गया था। बद निगाहों को बंद करने की जरूरत कोई महसूस नहीं कर रहा। जहां तक वर्तमान संदर्भ का संबंध है, तो हमारा देश एक समतावादी समाज है, जिसमें पुरुष और महिलाओं में किसी को भी हीन नहीं माना गया है।
देश में ऐसा कोई ‘ड्रेस कोड’ नहीं बना है, जिसका अनुपालन करना जरूरी हो। अपेक्षा यही है कि युवतियां वे सारे वस्त्र पहन सकती हैं, जिन्हें अश्लील नहीं माना जाता। इसी प्रकार देश में आज 46 प्रतिशत लोग गरीबी की सीमा से नीचे रहते हैं, जिन्हें जीवन के लिए आवश्यक माने जाने वाले भोजन, वस्त्र और आवास भी उपलब्ध नहीं हो पाए हैं। उच्च वर्ग तो सारी बाध्यताओं और मान्यताओं से मुक्त होकर अपने मानदंड स्वयं निर्धारित करता है। ऐसे उपदेश केवल मध्यवर्ग की महिलाओं के लिए होते हैं, जिससे यह संदेश जाए कि पुरुषों द्वारा स्थापित सारी मान्यताओं और नैतिकताओं के वहन की जिम्मेदारी उनकी है।

समाज में व्यभिचार कामुक प्रवृत्तियों की देन है। जब पारिवारिक रिश्तेदार घर की अबोध बच्चियों के साथ बलात्कार के मामलों में दोषी पाए जाते हैं, तो यह कोई खास वस्त्र पहनने की परिणति नहीं होता। जब ऋषि गौतम की पत्नी अहिल्या के साथ इंद्र ने दुराचार किया था, तो रात में घर में घुसना और उसे झांसा देकर दुष्कृत्य करना उनके पहनने वाले वस्त्रों पर आधारित आचरण नहीं था। अहिल्या तो पत्थर हो गईं, लेकिन इंद्र के इंद्रासन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

जहां तक महिला आयोग की अध्यक्ष के बयान का संबंध है, उससे यही लगता है कि उन्हें वर्तमान युग के संदर्भ में महिलाओं को अनुचित बाध्यताओं से मुक्त करके उन्हें समानता पर आधारित व्यवहार की स्वतंत्रता में सहायक बनने का दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। इन्हें प्राचीन और धार्मिक मान्यताओं से न देखकर नए युग की कल्पनाओं के अनुसार विचार किया जाना चाहिए। आज तो लोकसभाध्यक्ष और नेता विपक्ष, इन सभी पदों पर लोकतंत्र की स्वतंत्रता के प्रावधानों के परिणामस्वरूप महिलाएं ही विद्यमान हैं। हम इसे अपना गौरव मानते हैं, दोष नहीं।

जहां तक ‘ड्रेस कोड’ का संबंध है, यदि महिला आयोग की अध्यक्ष की दृष्टि से ही देखा जाए, तो इसका उल्लंघन करने वाले मध्य और उच्च वर्ग के घरों से आनेवाली महिलाएं और बच्चियां ही हैं। लेकिन 95 प्रतिशत समाज तो अपनी परिस्थितिजन्य बाध्यताओं के कारण ही अपने आचरण भी तय कर चुका है। संसार छोटा हो रहा है, भूमंडलीकरण, परिवहन, यातायात और संचार की सुविधाएं इसमें सहायक हैं। इसलिए आचार, व्यवहार संस्कृति सभी कुछ परिवर्तनशील की श्रेणी में आ गया है। इसलिए हमें अपनी मान्यताएं युग संदर्भों के अनुसार ही करनी पड़ेंगी।

इस संबंध में कुछ महिलाओं द्वारा कम कपड़े पहनने या आधुनिक परिवेश अपनाने को बलात्कार जैसे अपराधों के बढ़ने के लिए दोष देना उचित नहीं है, क्योंकि बलात्कार तो सर्वाधिक उन बच्चियों और युवतियों के साथ हो रहा है, जो परिवेश की दृष्टि से इसके लिए ‘ड्रेस कोड’ की दोषी नहीं मानी जा सकतीं। यदि चिंता का विषय थोड़ी-सी महिलाओं का वेष और व्यवहार ही है, तो इसे राष्ट्रीय दृष्टिकोण पर आधारित सोच नहीं करार दिया जा सकता।

आज भी आदिवासियों में कम कपड़े पहने जाते हैं, लेकिन यह उनकी इच्छा से अधिक मजबूरी है। वह उच्च वर्ग से चाहकर भी प्रभावित नहीं हो सकता। इसलिए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष को संकुचित नहीं, बल्कि राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। महिलाओं को हीन और द्वितीय श्रेणी की मानने वाली मध्यकालीन सोच महिलाओं की मुक्ति में सहायक नहीं हो सकती। राष्ट्रीय महिला आयोग का उद्देश्य भी महिलाओं को स्वावलंबी और निर्णायक बनाना है, उन्हें खींचकर पुराने युग में ले जाना नहीं।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

वर्ल्ड चैंपियन ने कहा, 35 सालों में पहली बार हुआ पति होने का एहसास

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में चमके आमिर और 'दंगल', झटके 4 अवॉर्ड

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

सैमसंग ने लॉन्च किया सस्ता और शानदार 4G स्मार्टफोन J2 Ace

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

फिल्मफेयर अवार्ड 2017 में इन हीरोइनों ने जमकर उड़वाई खिल्ली, ये रहीं बेस्ट

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

बाल काटने का नायाब तरीका, आग लगा कर बनाता है हेयरस्टाइल

  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

Most Read

इस पृथ्वी पर मेरा कोई घर नहीं

I have no home on this earth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

अफगानिस्तान में बेबस ओबामा

Obama in Afghanistan
  • सोमवार, 9 जनवरी 2017
  • +

संक्रमण के दौर में तमिल राजनीति

Tamil politics in transition stage
  • शुक्रवार, 13 जनवरी 2017
  • +

सच क्यों नहीं बोलते राहुल

Why Rahul does not speak the truth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

सुस्त होती रफ्तार और बेजार बाजार

Down market and sluggish pace
  • बुधवार, 11 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में आवाजों पर पहरा

In Pakistan voices are guarded
  • गुरुवार, 12 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top