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भ्रष्टाचार-विरोधी उपायों में देरी क्यों

Vinit Narain

Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST
Corruption Corruption Prevention Laws Parliament
राष्ट्रीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आकार का दिनोंदिन बढ़ते जाना एक बड़ी विडंबना तो है ही, उससे भी दुखद यह है कि भ्रष्टाचार-निरोधक कानूनों के प्रति भी हमारा राजनीतिक समुदाय सजग नहीं है। इस समय लोकपाल विधेयक, शिकायत निवारण विधेयक तथा भ्रष्टाचार की चेतावनी देने वालों या व्हिसलब्लोअर की सुरक्षा का विधेयक जैसे अनेक कानून संसद में विचाराधीन हैं। इन प्रस्तावित कानूनों पर चर्चा करते हुए काफी वक्त बीत गया है। चूंकि सरकार को इन कानूनों के क्रियान्वयन की तैयारी का भी काफी वक्त मिल गया है, ऐसे में जरूरी यह है कि इन्हें संसद में शीघ्र पारित कर और अन्य जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर क्रियान्वित किया जाए।
यह सच है कि ऐसे महत्वपूर्ण कानून बहुत जल्दबाजी में नहीं बनने चाहिए। पर यह भी उतना ही सच है कि उन्हें अनावश्यक रूप से अधिक टालना भी नहीं चाहिए। लोकपाल कानून पर जितनी बहस हुई है, उतनी कम ही विधेयकों पर हुई होगी। यह बहस अंतहीन तो नहीं हो सकती। एक समय आता है, जब बहस समाप्त करते हुए आपसी समझौते-समन्वय की कोई राह निकालनी पड़ती है। केवल बहस में उलझे रहने से देश-समाज आगे नहीं बढ़ता। उस स्थिति में यह और भी जरूरी हो जाता है, जब गठबंधनों की सरकार चल रही हो, और गठबंधन सरकार को भी मामूली-सा ही बहुमत प्राप्त हो। ऐसी स्थिति में विवादास्पद विधेयकों की देर तक अटकने की आशंका बढ़ जाती है। सरकार और विपक्ष, दोनों जरूरी कानून पारित करवाने के लिए इच्छाशक्ति दिखाएं, तभी बात आगे बढ़ती है।

लोकपाल कानून के बारे में कांग्रेस, यूपीए गठबंधन के अन्य सहयोगियों और विपक्षी दलों को आपसी बातचीत से कोई ऐसी राह निकाल लेनी चाहिए, जिससे आम सहमति बन सके। बेशक इस समय विधेयक जिस स्थिति में है, उसमें कई महत्वपूर्ण कमियां हैं, जिनमें कई सुधारों की जरूरत है। पर मौजूदा स्थितियों में लोकपाल की स्थापना और उसका काम करना बहुत जरूरी है। तब तो और भी, जब भ्रष्टाचार सांस्थानिक रूप लेता जा रहा है। लोकपाल के मुद्दे पर इतनी बहस हुई है, लेकिन हकीकत में इस दिशा में अब तक कुछ भी नहीं हो पाया है। इससे लोकतंत्र और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को ही चोट पहुंचती है, इनके प्रति लोगों का विश्वास कम होता है। जब यह लगने लगे कि लोकपाल की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सत्ता के साथ-साथ विपक्ष भी बहुत रुचि नहीं ले रहा, तो आम नागरिकों में इसका अनुचित संदेश ही जाएगा।

विचाराधीन शिकायत निवारण कानून आम नागरिकों की जरूरत की दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण है, हालांकि इस पर लोकपाल कानून की अपेक्षा कम चर्चा हुई है। यह कानून इस समय संसद की स्थायी समिति के सामने विचाराधीन है। न सिर्फ इसे पारित कराने की जरूरी पहल होनी चाहिए, बल्कि आम लोगों में इसका प्रचार-प्रसार भी होना चाहिए।

तीसरा महत्वपूर्ण विचाराधीन कानून व्हिसलब्लोअर या भ्रष्टाचार की चेतावनी देने वालों की रक्षा से संबंधित है। इसके बारे में भी बहुत सुझाव आते रहे हैं। यह अपेक्षित भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार की चेतावनी देने वालों की रक्षा बहुत जरूरी है। जो लोग सूचना के अधिकार का उपयोग इस उद्देश्य के लिए करते हैं, उनकी सुरक्षा का मुद्दा भी इस कानून से जुड़ा है। ऐसे अनेक कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। ऐसे में इस कानून को अविलंब पारित करना भी जरूरी है। इसी तरह न्यायपालिका की जवाबदेही संबंधी महत्वपूर्ण विधेयक को पारित करने के बारे में भी अविलंब सोचना होगा।

सत्ताधारी और विपक्षी दलों ने यदि आपसी सहमति बनाकर इन कानूनों को शीघ्र पारित कर दिया, तो यह भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़ा कदम होने के साथ-साथ लोकतंत्र के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि होगा। हालांकि कानून बनने पर क्रियान्वयन के दौर में कोई भी कमी सामने आएगी,तो अपने आप संशोधन और सुधार का जनमत बनेगा। इतना ही नहीं, इन कानूनों के क्रियान्वयन के लिए जरूरी प्रशासनिक तैयारी को भी तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए।
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