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बंदूक नहीं, इन्हें गुलाब पसंद है

Vinit Narain

Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
No guns they like roses
पश्चिमी देशों को यह घातक गलतफहमी है कि ईरान के लोग धर्म को लेकर ज्यादा ही कट्टर हैं। वहां की करीब आधी आबादी पच्चीस वर्ष से कम आयु की है और इनका शैक्षिक स्तर ऊपर उठाने के लिए ईरान ने ठोस कदम उठाए हैं। सड़क मार्ग पर लगभग 1,700 मील की अपनी ईरान यात्रा के दौरान मैं यह देखकर चकित रह गया कि युवा ईरानियों की एक बड़ी आबादी आधुनिक अमेरिकी जीवन मूल्यों को साझा करती है और कट्टरता के बजाय मनबहलाव के साधनों को तरजीह देती है। इन्हें मसजिदों से ज्यादा मनोरंजन पार्कों में दिलचस्पी है, जिनकी वहां बहुतायत है।
बातचीत के दौरान पूर्वी ईरान का एक 23 वर्षीय युवा चहकते हुए बताता है, युवा लोग मसजिदों में नहीं जाते। वे मौज-मस्ती के और साधनों की खोज में रहते हैं। शराब और ड्रग्स पर प्रतिबंध के बाद भी वह युवा इनके सेवन की बात स्वीकारता है। दूसरी ओर ईरानी अधिकारियों की मानें, तो वहां के संभवत: 10 प्रतिशत लोग ही गैर-कानूनी ड्रग्स का प्रयोग करते हैं।
ऊपर जिस युवा का मैंने जिक्र किया, उसे 2009 की लोकतंत्र समर्थक रैलियों में हिस्सा लेने के कारण बुरी तरह पीटा गया। आज भी जब वह अपने टूटे दांत देखता है, तो उन कड़वे अनुभवों को भूल नहीं पाता। अब तो विदेश जाना ही उसका और उसके जैसे तमाम दूसरे युवाओं का एकमात्र सपना रह गया है। इस नाउम्मीदी के कारण ही पश्चिमोत्तर ईरान में बसे तुर्की मूल के कुछ युवाओं ने अलगाववादी रुख अपनाते हुए मुल्क छोड़कर अजरबैजान का रुख किया। तबरेज में आयोजित फुटबाल प्रतियोगिताओं में हताश युवा व्यवस्था-विरोधी नारे लगाते देखे गए।

ईरान में वेश्यावृत्ति भी जोरों पर है। तेहरान में मैंने देखा कि एक युवक अपनी भड़कीले रंग की कार एक महिला के पास रोकता है और थोड़ी देर की बातचीत के बाद उसे कार में बिठाकर निकल जाता है। यह दृश्य देख मेरे जेहन में 2008 की वह घटना कौंधी, जब तेहरान के पूर्व पुलिस प्रमुख को आठ वेश्याओं के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। वैसे इसमें इतना भी अचरज नहीं होना चाहिए। आखिर ईरान केवल कट्टपंथियों का ही नहीं, उमर खय्याम की रुबाइयों में समाए रोमांटिक सुखवाद का भी केंद्र रहा है।

वर्ष 1970 में असंतुष्ट ईरानी युवाओं ने इसलाम के कट्टर स्वरूप को अपनाकर भ्रष्ट और धर्मनिरपेक्ष हुकूमत के खिलाफ विद्रोह का बिगुल बजाया था। आज की युवा आबादी इस कट्टरवाद के खिलाफ मुक्त जीवन जीने की आग्रही है। कभी-कभी ये युवा उम्मीद भरी नजरों से अमेरिका की ओर देखते हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और मिस्र को अरबों डॉलर की मदद दी, लेकिन बदले में उसे नफरत ही मिली है। और यहां ईरान में लोग मुझे उपहार दे रहे हैं।

ईरान की इस युवा संस्कृति को सींचने में इंटरनेट का बड़ा हाथ रहा है। दो-तिहाई ईरानी घरों में कंप्यूटर और प्रतिबंधित सैटेलाइट टेलीविजन की सुविधा है। एक युवा ईरानी महिला को टेलीविजन देखकर ही पता चला कि तुर्की में उस जैसी महिलाएं बिकिनी पहनने से भी परहेज नहीं करतीं। और तब उसने सीखा कि जीवन जीने के और भी ढंग हो सकते हैं। पुलिस ने सैटेलाइट डिश कब्जे में लेने के लिए छापे मारे और ऐसे परिवारों पर 400 डॉलर का जुर्माना भी लगाया, लेकिन इससे भी कोई फर्क नहीं पड़ा।
गोरगान का एक दुकानदार कहता है कि जब दरवाजे पर खड़ी पुलिस ने उसे आवाज दी, तो उसने जवाब नहीं दिया। मजबूरी में पुलिस के जवान सैटेलाइट डिश अपने कब्जे में लेकर लौट गए और वह जुर्माने से बच गया। ईरान में आपको हर जगह तस्करी से लाए गए संगीत, वीडियो और वीडियो गेम्स मिल जाएंगे। एक घर में बच्चों को बैटलफील्ड 3 नामक गेम खेलते देख मुझे हैरानी हुई। इस गेम में अमेरिकी सैनिकों द्वारा तेहरान को ध्वस्त करते दिखाया गया है। यही युवा ईरान का भविष्य हैं, जो अमेरिका के सहयोगी हो सकते हैं। लेकिन परमाणु वार्ताओं की हमारी रणनीति को देखते हुए मैं दावे के साथ नहीं कह सकता कि ईरान को लेकर पश्चिम की कोई स्पष्ट रणनीति है भी या नहीं। पश्चिम के नीति-नियंता ईरान को एक कट्टरवादी मुल्क के रूप में देखते हैं। ठीक वैसे ही, जैसे 1960 के दशक में चीन को देखा जाता था। तब चीन के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई की बात होती थी। यदि हमने यही मार्ग अपनाया होता, तो वहां आज भी माओवादियों का ही शासन होता।

अपनी इस यात्रा से मुझे यह विश्वास हो चला है कि ईरान में बदलाव की बयार को कोई रोक नहीं सकता। साक्षरता दर में वृद्धि, मध्यवर्ग का प्रसार, सरकार की आर्थिक नीतियों के प्रति हताशा और सूचना तंत्र पर सरकार की घटती दखल से वहां यह स्थिति पैदा हो रही है। यदि ईरान और पश्चिम के बीच युद्ध न हो, तो ईरान मजबूत होकर उभरेगा, कट्टरपंथी दरकिनार हो जाएंगे और वह मुल्क तुर्की जैसा हो जाएगा।

मुझे एक ईरानी युवा से अपनी मुलाकात याद आती है, जिसने उत्साहपूर्वक यह कहा था कि अगर एक लड़का किसी लड़की के साथ घूमने की बात सोचता है, तो इसमें गलत कुछ नहीं है। जाहिर है, ऐसे रोमांटिक युवा ही हमारी ताकत बन सकते हैं, क्योंकि इनकी तादाद ईरान में कट्टरपंथियों की तुलना में कहीं अधिक है। बदलाव के कारकों के रूप में हमें कट्टरपंथियों के बजाय इन उदार युवाओं को ही तरजीह देनी चाहिए।
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