आपका शहर Close

आईआईटी में सरकारी दखल

Vinit Narain

Updated Tue, 12 Jun 2012 12:00 PM IST
Government intervention in IIT
मानव संसाधन मंत्री की अध्यक्षता में 28 मई को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान परिषद (आईआईटी कौंसिल) की बैठक में यह निर्णय लिया गया कि देश के सभी आईआईटी, एनआईटी और आईआईआईटी को मिलाकर वर्ष 2013 से एक ‘कॉमन एन्ट्रेंस’ प्रवेश परीक्षा को अनिवार्य किया जाएगा। इस प्रवेश परीक्षा द्वारा चुने हुए विद्यार्थियों की मैरिट बनाते समय 40 प्रतिशत ‘वेटेज’ उनके 12 वीं के अंकों को दिया जाएगा।
प्रवेश परीक्षा ‘कॉमन एन्ट्रेंस’ पद्धति से हो, अथवा अलग-अलग, यह एक अलग मुद्दा है। मूल प्रश्न यह है कि क्या सत्ता इस प्रकार आईआईटी संस्थानों की फैकल्टी, सीनेट तथा अन्य समितियों से सलाह-मशविरा किए बिना निरंकुश ढंग से चल सकती है। इस मूल प्रश्न को उठाया कानपुर आईआईटी ने। वहां की सीनेट ने एक विशेष बैठक बुलाकर सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि वह अपनी प्रवेश परीक्षा स्वयं कराएगी। उसका मानना है कि यह एकतरफा निर्णय संस्थान की स्वायत्तता पर सरासर सरकारी हस्तक्षेप है।

देश में इस समय 15 आईआईटी हैं, जिनमें ग्रेजुएट स्तर पर प्रतिवर्ष लगभग 10,000 छात्रों को प्रवेश मिलता है। इसमें पांच लाख से अधिक विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा में बैठते हैं। पर ‘कॉमन एन्ट्रेंस’ परीक्षा का अर्थ होगा लगभग 20-22 लाख विद्यार्थियों की परीक्षा। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों की प्रवेश परीक्षा आयोजित करने का अर्थ होगा अराजकता। तब परीक्षा की गोपनीयता बनाना भी आसान नहीं होगा।

यदि यह पूछा जाए कि स्वतंत्रता के पश्चात उच्च शिक्षा में निरंतर पतन क्यों होता गया, तो एक पंक्ति में इसका उत्तर होगा कि उच्च शिक्षा केंद्रों के मामलों में सरकारी हस्तक्षेप के कारण। उच्च शिक्षा केंद्रों को यदि हमें विश्व स्तर का बनाना है, तो उन्हें पूरी स्वायत्तता देनी ही होगी। स्वायत्तता का अर्थ है पाठ्यक्रम, प्रवेश, शिक्षण, विभिन्न भारतीय और विदेशी विश्वविद्यालयों से आदान-प्रदान, छात्रों और फैकल्टी का अनुपात-अर्थात सभी अकादमिक, प्रशासनिक, शैक्षिक और वित्तीय मामलों में पूर्ण स्वतंत्रता।

वित्तीय सहायता अवश्य सरकार से मिलेगी, किंतु व्यय किस प्रकार हो, उस पर पूरा अधिकार विश्वविद्यालय का होगा। स्वायत्तता पर हस्तक्षेप के विभिन्न ढंग हैं। उदाहरण के लिए, अभी कुछ वर्ष पूर्व विदेश मंत्रालय में यह सोचा जा रहा था कि कोई भी शैक्षिक अथवा व्यापारिक संस्थान किसी भी विदेशी प्रतिनिधिमंडल को विदेश मंत्रालय से अनुमति लिए बिना आमंत्रित नहीं कर सकता।

आईआईटी संस्थानों की स्थापना नेहरू का स्वप्न था। लेकिन इन संस्थानों में शोध की निरंतर गिरती हुई स्थिति चिंता का विषय बन गई है। आईआईटी कानुपर को ही लें। 1960-65 में जहां लगभग 350 विदेशी छात्रों ने डॉक्टरेट में वहां प्रवेश लिया, आज गिने-चुने विदेशी विद्यार्थी वहां दिखाई पड़ते हैं। 1960 के दशक में वहां के एक विभाग से प्रतिवर्ष 50 विद्यार्थियों को डॉक्टरेट की डिगरी मिलती थी। पर आज वहां प्रतिवर्ष दो छात्र भी हर विभाग से डॉक्टरेट नहीं हो पाते।

वस्तुतः आईआईटी से उत्तीर्ण अधिकांश छात्र अब विदेश चले जाते हैं। जो भारत में रह जाते हैं, उनका उद्देश्य होता है आईएएस जैसी प्रशासनिक सेवा अथवा किसी बड़ी कॉरपोरेट कंपनी में कार्य करना, जहां उन्हें लाखों में वेतन मिलता है। जब शोध के लिए आईआईटी के अध्यापकों को वहां के पढ़े विद्यार्थी ही नहीं मिल रहे हैं, तो भला कैसे यह उम्मीद की जा सकती है कि वहां शोध का स्तर ऊंचा होगा।

सही मायनों में शोध इस समय आईआईटी में नहीं, बल्कि देश के कुछ-गिने चुने शोध संस्थानों में हो रहा है। ये संस्थान हैं, ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बंगलुरू, टाटा फंडामेंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट, भाभा शोध संस्थान, इंडियन स्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट आदि। इन संस्थानों को शोध करने के लिए विद्यार्थी आईआईटी से नहीं, बल्कि उन विश्वविद्यालयों से उत्तीर्ण एमएससी, एम फिल, एम टेक आदि मिलते हैं, जिनके नाम पर दिल्ली में बैठा अभिजात वर्ग नाक मुंह सिकोड़ता है। काननुपर आईआईटी की पहल उच्च शिक्षा के सभी केंद्रों के लिए सीख है। ध्यान रहे स्वायत्तता नीचे से प्रारंभ होती है, ऊपर से नहीं।
Comments

Browse By Tags

स्पॉटलाइट

ऐसे करेंगे भाईजान आपका 'स्वैग से स्वागत' तो धड़कनें बढ़ना तय है, देखें वीडियो

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान के शो 'Bigg Boss' का असली चेहरा आया सामने, घर में रहते हैं पर दिखते नहीं

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

आखिर क्यों पश्चिम दिशा की तरफ अदा की जाती है नमाज

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

सलमान खान को इंप्रेस करने के चक्कर में रणवीर ने ये क्या कर डाला? देखें तस्वीरें

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में निकली वैकेंसी, मुफ्त में करें आवेदन

  • सोमवार, 20 नवंबर 2017
  • +

Most Read

इतिहास तय करेगा इंदिरा की शख्सियत

 History will decide Indira's personality
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

सेना को मिले ज्यादा स्वतंत्रता

More independence for army
  • शनिवार, 18 नवंबर 2017
  • +

मोदी-ट्रंप की जुगलबंदी

Modi-Trump's Jugalbandi
  • गुरुवार, 16 नवंबर 2017
  • +

मानवाधिकार पर घिरता पाकिस्तान

Pakistan suffers human rights
  • मंगलवार, 14 नवंबर 2017
  • +

जनप्रतिनिधियों का आचरण

Behavior of people's representatives
  • रविवार, 19 नवंबर 2017
  • +

युवाओं को कब मिलेगी कमान?

When will the youth get the command?
  • शुक्रवार, 17 नवंबर 2017
  • +
Top
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!