आपका शहर Close

चंडीगढ़+

जम्मू

दिल्ली-एनसीआर +

देहरादून

लखनऊ

शिमला

उत्तर प्रदेश +

उत्तराखंड +

जम्मू और कश्मीर +

दिल्ली +

पंजाब +

हरियाणा +

हिमाचल प्रदेश +

छत्तीसगढ़

झारखण्ड

बिहार

मध्य प्रदेश

राजस्थान

अप्रासंगिक क्यों हो रहे हैं राष्ट्रीय दल

शांता कुमार

Updated Mon, 26 Nov 2012 11:04 AM IST
why national parties are being irrelevant
वर्तमान लोकतंत्र धीरे-धीरे एक नया रूप धारण करता जा रहा है। आजादी के बाद देश में एक लंबे समय तक एक दलीय पार्टी का शासन रहा है। उसके बाद गैरकांग्रेसी दलों के गठबंधन की जनता पार्टी, फिर कांग्रेस और पुनः भाजपा से मिलकर क्षेत्रीय दलों के संयुक्त मोरचे ने दिल्ली की बागडोर संभाली, परंतु अब भारतीय राजनीति में एक नया आयाम उभर रहा है। बढ़ते भ्रष्टाचार और आम जनता के प्रति संवेदनहीनता के कारण राजनीतिक अविश्वास का एक वातावरण पनपने लगा है। आम व्यक्ति कह रहा है कि सभी राजनीतिक दल भ्रष्ट हैं। लोकतंत्र पर आस्था की चूलें हिलने लगी हैं।
इन सबका एक परिणाम यह हो रहा है कि राष्ट्रीय राजनीतिक दल धीरे-धीरे अप्रासंगिक होने लगे हैं। छोटे क्षेत्रीय दल विभिन्न प्रदेशों में मजबूत होते जा रहे हैं। देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दल, कांग्रेस और भाजपा, अप्रासंगिक हो गए। प्रदेश की जनता मुलायम सिंह के कुशासन से परेशान हुई थी, तो सत्ता बहुजन समाज पार्टी को सौंप दी गई। पांच साल के बाद मायावती से जनता क्षुब्ध हुई, तो फिर से समाजवादी पार्टी को सत्ता सौंप दी गई। इस बात पर गहरा आत्मचिंतन होना चाहिए कि देश के सबसे बड़े राज्य में दोनों राष्ट्रीय राजनीतिक दल अप्रासंगिक क्यों हो गए? आखिर पंडित जवाहर लाल नेहरू का उत्तर प्रदेश कांग्रेस को क्यों भुला बैठा है? जनता को विकल्प के रूप में राष्ट्रीय जनाधार वाले दल कांग्रेस और भाजपा नहीं दिखाई दिए, तो इसकी वजह क्या है?

ये दोनों ही पार्टियां विचारधाराओं के आधार पर पूरे देश की पार्टियां हैं। दोनों का अपना इतिहास है और दोनों में शीर्षस्थ, विद्वान और अनुभवी नेता शामिल हैं। दक्षिण के तमिलनाडु में दो क्षेत्रीय दल वर्षों से सत्ता संभाल रहे हैं। इस समय भारत के कुल 28 प्रदेशों में से कांग्रेस 10 और भाजपा सात राज्यों में सत्तासीन है। देश के शेष 11 प्रदेशों में क्षेत्रीय दल सत्ता संभाल रहे हैं। क्षेत्रीय दल भी भारतीय हैं, देशभक्त हैं, पर उनकी विचारधारा और दृष्टिकोण प्रादेशिक है। कुछ दल तो विचारधारा पर चलने के बजाय किसी नेता, जाति और वंश पर चल रहे हैं।

विगत में केंद्र की सत्ता कुछ ऐसे क्षेत्रीय नेताओं को सौंपी गई, जिनका पूरे देश में आधार नहीं था। नतीजतन वे स्थिर शासन देने में असमर्थ रहे। सचाई यह है कि केंद्र को स्थिर शासन राष्ट्रीय आधार वाले राजनीतिक दलों ने अथवा उन दलों के संयुक्त गठबंधनों ने ही दिया है। लेकिन अब राष्ट्रीय दलों की अप्रासंगिकता के कारण यदि केंद्र में छोटे क्षेत्रीय दलों का गठजोड़ सत्ता में आता है, तो आने वाले दिनों में एक चिंताजनक स्थिति पैदा हो सकती है। इसकी वजह यह है कि कुछ प्रदेशों के क्षेत्रीय दल किसी विशेष विचारधारा से नहीं, अपितु किसी नेता के कारण बने और उसी के वंश के आधार पर चल रहे हैं। इन नेताओं में अपने परिवार के लोगों को आगे लाने की प्रवृत्ति ही बढ़ रही है। पार्टी और जनता के सहयोग से प्राप्त पद को नेता अपनी जागीर समझकर उत्तराधिकार के रूप में बांटने लगे हैं। इस तरह लोकतंत्र परिवार तंत्र में बदलता जा रहा है।

राष्ट्रीय दल अप्रासंगिक हो रहे हैं और क्षेत्रीय दलों का परिवार तंत्र बढ़ता जा रहा है, तो इसके पीछे राजनीतिक अविश्वास एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। देश की आजादी के बाद लौह पुरुष सरदार पटेल ने देश के 500 रजवाड़े परिवारों को समाप्त करके एक शक्तिशाली देश का निर्माण किया था। अलग-अलग टुकड़ों में बंटे देश को एक सूत्र में बांधने की वह चुनौती विकट थी। लेकिन दुर्भाग्य है कि करीब साढ़े छह दशक बाद आज यह देश क्षेत्रीय दलों के नाम पर उसी परिवार तंत्र में फंसने जा रहा है।

यही हालात रहे, तो वह दिन दूर नहीं, जब पांच सौ के बजाय कुल 15-20 परिवार ही अलग-अलग प्रदेशों में देश का शासनतंत्र चलाने लगेंगे। देश की इस चिंताजनक राजनीतिक परिस्थिति पर देश के बुद्धिजीवियों और सभी दलों को विचार करना चाहिए। कहना अतिशयोक्ति नहीं कि यह अविश्वास का संकट लोकतंत्र पर आस्था की चूलों को हिला रहा है। इस विश्वास को बहाल करने के लिए दलों की दीवारों से ऊपर उठकर एक राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता है।
  • कैसा लगा
Write a Comment | View Comments

स्पॉटलाइट

पाकिस्तान की हार के बावजूद टूटा विवियन रिचर्ड्स का रिकॉर्ड

  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

प्रियंका चोपड़ा ने लाइट जलाकर बनाए हैं संबंध, खुद किया खुलासा

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

OMG: ये लड़की डॉक्टर से मांग लाई अपना कटा पैर, फिर दिखाए गजब के करतब

  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

प्रियंका का सबसे जुदा अंदाज, किसी राजकुमारी से कम नहीं लग रही हैं

  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

BIGG BOSS : स्वामी ओम के चलते सलमान ने लिया बड़ा फैसला, ऐसा अब तक नहीं हुअा

  • शुक्रवार, 20 जनवरी 2017
  • +

Most Read

न्याय चाहिए, मुआवजा नहीं

Want justice, not compensation
  • गुरुवार, 19 जनवरी 2017
  • +

कैसे रुकेगी हथियारों की होड़

How to stop the arms race
  • सोमवार, 16 जनवरी 2017
  • +

इस पृथ्वी पर मेरा कोई घर नहीं

I have no home on this earth
  • रविवार, 15 जनवरी 2017
  • +

चुनाव सुधार के रास्ते के रोड़े

Hurdel of Election reforms
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +

संक्रमण के दौर में तमिल राजनीति

Tamil politics in transition stage
  • शुक्रवार, 13 जनवरी 2017
  • +

पाकिस्तान में चीन की ताकत

China's strength in Pakistan
  • बुधवार, 18 जनवरी 2017
  • +
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper
Your Story has been saved!
Top