रामपुर। बीड़ी मजदूरों के हाथ में कार्ड तो थमा पर उन्हें लाभ कुछ नहीं मिल रहा है। न आवासीय और न बेटी के शादी के लिए अनुदान मिल पा रहा है। सामूहिक दुर्घटना बीमा योजना भी उन तक नहीं पहुच पा रही है। लिहाजा चालीस हजार से ज्यादा परिवारों की आर्थिक स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में कई हजार परिवार बीड़ी बनाते हैं। बीड़ी श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने को केंद्र सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसके लिए कार्ड बनाना जरूरी है। जिले में अब तक 42300 बीड़ी श्रमिकों के कार्ड जारी हो चुके हैं। लेकिन उन तक योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। बीड़ी मजदूरों के मुफ्त इलाज की व्यवस्था है पर डिस्पेंसरी में सिर्फ मामूली मर्ज की ही दवा दी जाती है। आवासीय सुविधा मुहैया कराने के लिए बीस आवदेन दो साल से कानपुर में लंबित हैं। कार्ड बनाते समय बीड़ी श्रमिकों का सामूहिक बीमा किया जाता है। दुर्घटना में मौत पर दस हजार और अंत्येष्टि के लिए 1500 रुपये दिए जाते हैं। श्रमिक की बेटी की शादी के लिए दो बच्चों तक पांच -पांच हजार रुपए अनुदान के रूप में दिए जाते हैं। लेकिन इस साल अभी तक एक भी श्रमिक को अनुदान नहीं मिला है। बीड़ी मजदूरों के बच्चों को वजीफा भी दिया जाता है पर स्कूलों से भी फार्म भरवा दिए जाते हैं। जिन बच्चों के फार्म नहीं भरे जाते उन्हें वजीफा भी नहीं मिल पाता है। हजारों मजदूर तो कार्ड से भी वंचित हैं। कुछ लोग कार्ड बनाने के नाम पर श्रमिकों को वसूली कर रहे हैं। बीड़ी श्रमिकों को नहीं मिल रही पूरी मजदूरी रामपुर। वेलफेयर बीड़ी मजदूर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष रईस खां, महासचिव सुल्तान अहमद अंसारी ने जिलाधिकारी को ज्ञापन भेजेकर बीड़ी श्रमिकों को योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि कारीगरों को पूरी मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है और किसी भी योजना का भी लाभ नहीं मिल पा रहा है।