जच्चा-बच्चा की जिंदगी (महिला दिवस पर विशेष )अनपढ़ हैं पर बुलंद हौसले से छू रहीं कामयाबी की ऊंचाइयांमलिन बस्तियों की महिलाएं जगा रहीं अपनी बस्ती मेें स्वास्थ्य चेतनाअर्बन हेल्थ रिसोर्स सेंटर ने 45 बस्तियों में बनाई 55 महिला स्वास्थ्य समितिखुद पैसा जोड़कर करती जच्चा के प्रसव का प्रबंध, बच्चों के टीके लगवाती आगरा। जागरूकता और इलाज के अभाव में आए दिन बस्ती में गर्भवती महिलाओं की मौत होते देख वे सिहर उठती पर रास्ता नजर नहीं आता। अर्बन हेल्थ रिसोर्स सेंटर की पहल ने उन्हें संगठित किया और आज उनके इलाके में हर जच्चा-बच्चा महफूज है। अनपढ़ हैं लेकिन तरीका इतना आसान बनाया कि जच्चा-बच्चा की देखरेख में चूक होने का सवाल ही नहीं रहता। गर्भवती महिलाओं के घर पर बड़ी बिंदी लगा दी जाती है और बच्चे के जन्म के बाद बगल में छोटी बिंदी चिपका दी जाती है। बिंदी देखकर ही जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य की देखरेख की जाती है। झुग्गी-झोपड़ी से अटी यमुनापार स्थित मारवाड़ी बस्ती में पांच साल पहले यूएचआरसी ने अपने स्वास्थ्य प्रोजेक्ट के तहत यहां मारवाड़ी महिला स्वास्थ्य समिति गठित कर उन्हें स्वास्थ्य संबंधी प्रशिक्षण दिया। 10 सदस्याओं के इस गु्रप ने पांच-पांच रुपये जोड़कर शुरुआत की। समिति की अध्यक्ष जमुना देवी कहती हैं कि पहले पूरी बस्ती में डिलीवरी घर पर ही होती थी। हमने घर-घर जाकर महिलाओं को जागरूक किया। अधिकांश गर्भवती महिलाओं का प्रसव हम अपनी बचत से नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर कराते हैं। घर पर होने वाले प्रसव में भी हम मौजूद रहकर साफ सफाई का पूरा ध्यान रखते हैं। ऐसा करने वाली सरकारी महकमे की आशा कार्यकत्री नहीं बल्कि मलिन बस्तियों की महिलाएं हैं जो अपने समूह में चंदा जोड़ निःशुल्क रूप से जच्चा-बच्चा को रक्षा कवच पहनाती हैं। समिति की 26 वर्षीय बेबी ने बताया कि हमने बस्ती का नक्शा बनाया है जिसमें सभी की गलियां बांट दी हैं। पढ़े लिखे नहीं हैं इसलिये जच्चा बच्चा वाले घर पर बिंदी का निशान लगाते हैं। जच्चा को बड़ी बिंदी और बच्चा को छोटी। इसी से हम सभी याद रखते हैं। बच्चे के जन्म के बाद जब टीकाकरण हो जाता है तो बिंदी हटा ली जाती है।आर्थिक मजबूती के साथ मिली पहचान सभी महिलाएं हंटर बनाने का काम करती हैं। 100 रुपये हर महीने हम जोड़ते हैं। स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिये 2 रुपये ब्याज पर और दूसरे कामों के लिये 3 रुपये ब्याज दर पर पैसे भी देते हैं। पहले हमारी जिंदगी बहुत बदहाल थी लेकिन आज हमें आर्थिक मजबूती और पहचान मिली है। बेबी को महिला दिवस के बारे में नहीं पता लेकिन कहती है कि औरत ठान ले तो पुरुष को पीछे छोड़ सकती है।कछपुरा की ताज महिला आरोग्य समिति की 11 महिलाओं के गु्रप ने तो 60 हजार रुपये का संग्रह कर लिया है। स्वास्थ्य संबंधी कार्यों के साथ समूह व दूसरी महिलाओं को भी सस्ते दर पर ब्याज उपलब्ध करा रही हैं। समिति की कोषाध्यक्ष सुनीता के अनुसार अब गर्भवती महिला को प्रसव के लिये हास्पिटल ले जाना, टीके लगवाना हमारा जिम्मा है। ................................2009 में हमारा हेल्थ प्रोजेक्ट खत्म होने के बावजूद हमने समूह संबंधी गतिविधियां जारी रखी। ट्रांसयमुना, शाहगंज, रकाबगंज क्षेत्र की 45 मलिन बस्तियों में 55 गु्रप कार्यरत हैं। इसके साथ ही आठ दस समूहों को मिलाकर तीन फेडरेशन भी गठित किये हैं जिनमें विभिन्न स्वास्थ्य संबधी गतिविधयां होती हैं। आर्थिक रूप से भी वे सशक्त हैं। आज महिलायें अपने स्वास्थ्य को लेकर बहुत जागरूक हुई हैं। ---- नौशाद अली, सिटी पार्टनरशिप ऑफिसर, यूएचआरसी