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एन्वायरमेंट क्लीयरेंस में अटके कर्मचारियों के फ्लैट

Chandigarh

Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
चंडीगढ़। यूटी प्रशासन के कर्मचारियों की आवासीय योजना एन्वायरमेंट क्लीयरेंस न मिलने के कारण चार साल से लटकी हुई है। सीएचबी ने एन्वायरमेंट क्लीयरेंस के लिए दो दिन पहले ही नए सिरे से टेंडर मंगवाए हैं। हालांकि चार महीने पहले भी सीएचबी ने इसके लिए टेंडर निकाले थे, लेकिन प्रशासन ने इन्हें अयोग्य करार दे दिया था। नए सिरे से टेंडर मंगाने के चलते अब इस आवासीय योजना के निर्माण में और देरी होने की संभावना है। ऐसे में प्रशासन के कर्मचारियों को फ्लैट के लिए न सिर्फ तीन साल और इंतजार करना होगा, बल्कि पांच से दस लाख रुपये अधिक भी देने पडे़ंगे। उधर, फ्लैट से वंचित रह गए कर्मचारियों के लिए भी प्रशासन अभी तक कोई निर्णय नहीं ले सका है।
सीएचबी ने प्रशासन के कर्मचारियों के लिए आवासीय योजना 2008 में लांच की थी और चार नवंबर 2010 को इस योजना के लिए ड्रा निकाला था। चार साल बाद भी हाउसिंग बोर्ड एन्वायरमेंट क्लीयरेंस नहीं ले सका है।
सीएचबी के अधिकारियों का कहना है कि एन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलने के बाद ही कंस्ट्रक्शन एस्टिमेट बनाया जाएगा और इसके बाद फ्लैटों के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। निर्माण में 18 माह का समय लग सकता है। निर्माण के समय जो भी कंस्ट्रक्शन कॉस्ट आएगी वह कर्मचारी से ली जाएगी और कॉस्ट निकलने के बाद ही पता चलेगा कि किस वर्ग के फ्लैट के लिए कुल कितनी राशि देनी होगी। उम्मीद है कि कर्मचारियों को 30 से 40 फीसदी राशि ज्यादा देनी होगी।
प्रशासन के कई कर्मचारी तो इस स्कीम के लिए जमा कराई अग्रिम राशि पर ही चार साल में एक लाख रुपये से अधिक ब्याज अदा कर चुके हैं। बैंकों की ओर से हर छह माह बाद कर्मचारियों से ब्याज मांगा जाता है। प्रशासन की गलती का खामियाजा हजारों कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है। ध्यान रहे कि प्रशासन के 6600 कर्मचारियों ने इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम के अंतर्गत आवेदन किया था। इस स्कीम में तीन हजार कर्मचारियों का नाम ड्रा में निकला था। 3600 कर्मचारियों का ड्रा में नाम नहीं निकल सका था। सीएचबी के सचिव एमएम सभरवाल का कहना है कि एन्वायरमेंट क्लीयरेंस के लिए पहले निकाला गया टेंडर अयोग्य हो गया था। इस कारण दोबारा टेंडर निकालना पड़ा। एन्वायरमेंट क्लीयरेंस मिलते ही फ्लैट के निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे।
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